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समर नीति: अमेरिका जाकर इमरान ने क्यों कबूली यह सच्चाई

इमरान खान और डोनाल्ड ट्रंप
फाइल फोटो

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अमेरिका दौरे में खुद यह बात कह कर पाकिस्तान के लोगों को अचम्भे में डाल दिया है कि उनके देश में तीस से चालीस हजार आतंकवादी रहते हैं। पाकिस्तान के लोग हैरान इसलिये हैं कि खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने यह बात कहने की हिम्मत कैसे  की। क्या उऩ्हें पाकिस्तान की सैन्य सत्ता से डर नहीं लगता ?  उन्होंने अमेरिका की एक विचार संस्था  को सम्बोधित करते हुए साफ शब्दों में यह स्वीकार किया  कि पाकिस्तान में  तीस से चालीस हजार मिलिटेंट यानी साफ  शब्दों में कहें तो आतंकवादी रह रहे हैं। हालांकि भारत सहित सारी दुनिया लम्बे अर्से से  यह कहती रही है कि पाकिस्तान आतंकवादियों का गढ़  बना हुआ है क्योंकि वहां ये तत्व पाकिस्तान की सेना औऱ सरकार की मदद से पाले पोसे जाते हैं। पाकिस्तानी लोग दबी जुबान से यह बात स्वीकार करते रहे हैं कि उनके देश मे आतंकवादी तत्व खुलेआम अपनी गतिविधियां चलाते हैं। लेकिन कभी यह हिम्मत नहीं कर सके कि वे  खुलेआम सारी दुनिया  के सामने यह सच्चाई कबूलें। उन्हें पता है कि पाकिस्तान के पिछले प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने जब पाकिस्तानी सेना को इस बारे में आगाह करने की कोशिश की  तो उनका क्या हश्र हुआ। नवाज शरीफ के खिलाफ  भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर उन्हें जेल की सलाखों के भीतर भेज दिया गया।





अमेरिका दौरे में प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ वहां के सेना प्रमुख जनरल वाजवा भी गए थे। इसलिये क्या यह कह सकते है कि इमरान खान ने जनरल बाजवा से अनुमति लेकर यह बात अपने अमेरिका दौरे में तब कही जब राष्ट्रपति डोनाल्ड  ट्रम्प से मिलने वह गए। पाकिस्तान आतंकवाद की बदौलत अमेरिका से अरबों डॉलर झटक चुका है और राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे लेकर पाकिस्तान को खुलेआम लताड़ा  भी है।

पाकिस्तान इनका इस्तेमाल भारत के जम्मू-कश्मीर औऱ अफगानिस्तान में अपने सामरिक हितों की पूर्ति के लिये  करता रहा  है। पाकिस्तान इनका इस्तेमाल भाड़े के सैनिकों की तरह करता रहा है लेकिन वह यह बात दुनिया के सामने कैसे माने कि वह अपने सामरिक हितों के संवर्द्धन के लिये ऐसी ओछी रणनीति इस्तेमाल करता है। जम्मू कश्मीर को अपने देश का हिस्सा बनाने के लिये पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ  इनका इस्तेमाल किया है औऱ सारी दुनिया को यह कहता रहा है कि  भारतीय कश्मीर के लोग भारत से आजादी की लडाई लड रहे हैं।लेकिन इन आतंकवादियों का इस्तेमाल पाकिस्तान भारत के खिलाफ भाड़े का युद्द लडने के लिये कर रहा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि इनके जरिये वह भारत औऱ अफगानिस्तान के इलाके में कम तीव्रता का युद्ध लड़ रहा है ताकि भारतीय कश्मीरी इलाके को हथिया सके। पाकिस्तान को अच्छी तरह पता है कि वह भारत के खिलाफ खुला युद्ध नहीं लड़ सकता क्योंकि उसके पास इतनी सैन्य ताकत नहीं है।

इसलिये यह सवाल उठता है कि इमरान खान ने अपने देश के सबसे बड़े खुले रहस्य को दुनिया के सामने और वह भी अमेरिकी समुदाय के सामने कैसे कबूला। क्या इसके पीछे पाकिस्तान की नई चाल या रणनीति है ?

वास्तव में पाकिस्तान जहां एक ओर दिवालिया होने के कगार पर है वहीं उसके खिलाफ आतंकवादी तत्वों को वित्तीय मदद के लिये पेरिस स्थित संस्था फाइनेनशियल एक्शन  टास्क फोर्स ने अल्टीमेटम दिया हुआ है कि यदि अक्टूबर तक अपने देश से आतंकवादी तत्वों को वित्तीय मदद के सारे रास्ते बंद नहीं किये तो वह काली सूची में डाल दिया जाएगा और तब पाकिस्तान की जनता आर्थिक कंगाली का सामना करने लगेगी  औऱ पाकिस्तानी लोग कराह उठेंगे। शायद इस संकटपूर्ण स्थिति से बचने के लिये ही पाकिस्तान  ने दुनिया के सामने यह सच्चाई कबूली है और वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह अपेक्षा कर रहा है कि चूंकि  पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी तत्वों से निपटने में उसे वक्त चाहिये इसलिये उसके खिलाफ  प्रतिबंध लगाने वाली कोई कार्रवाई नहीं करे।

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