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समर नीति: ताकि दुश्मन का मिसाइली वार बेकार जाए

पाक बैलिस्टिक मिसाइल

देश के इर्द-गिर्द तैनात हो रही बैलिस्टिक मिसाइलों से भारत की राजधानी औऱ कई बड़े शहरों को गम्भीर खतरा महसूस होने लगा है। पाकिस्तान औऱ चीन की सेनाओं ने भारत की ओऱ निशाना कर मझली और लम्बी दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टक मिसाइलें तैनात कर दी  हैं। ये मिसाइलें परमाणु बमों से लैस होती  हैं  और इन्हें दिखाकर  भारत को अक्सर ब्लैकमेल किया जाता है। पाकिस्तान की ओऱ से अक्सर धमकी भरे बयान तो आते ही हैं पिछले साल डोकलाम में सैन्य तनातनी के दौरान चीन से भी भयावह नतीजों की धमकियां आईं थीं।





 इसलिये वक्त आ गया है कि इन मिसाइलों से बचाव के लिये पुख्ता इंतजाम किये जाएं। परमाणु मिसाइलों से लैस इन बैलिस्टिक मिसाइलों से महानगरों में रह रहे करोड़ों लोगों के जीवन की रक्षा के लिये पिछले कई सालों से चल रही स्वदेशी  कोशिश पूरी तरह कामयाब होते नहीं देख सरकार  को अब इन्हें रूस और अमेरिका से आयात करने को मजबूर होना पड़ा है। हालांकि देश में ही अडवांस्ड एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली (एएडी)  का विकास पिछले दशक के शुरु से ही चल रहा है लेकिन ये तैनात होने की स्थिति में नहीं हैं। 2006 में जब पहली बार अडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम का सफल परीक्षण किया गया था तब रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआऱडीओ) ने इसे  2010 के अंत तक तैनात कर देने का वादा किया था। लेकिन हमलावर मिसाइलों से बचाव के लिये ये एंटी मिसाइल प्रणालियां अभी परीक्षण के दौर से ही गुजर रही हैं। गत 2 अगस्त को ही ओडिशा के बालासोर परीक्षण स्थल से  इंटरसेप्टर बैलिस्टिक मिसाइल अडवांस्ड एयर डिफेंस मिसाइल (एएडी)  का एक और सफल परीक्षण किया गया है लेकिन ये एंटी मिसाइलें केवल 15 से 25 किलोमीटर दूरी तक ही किसी हमलावर मिसाइल को मार गिरा सकती है।

 जब कि जरुरत इस बात की है कि कोई हमलावर बैलिस्टिक मिसाइल को भारत की नभ सीमा में घुसने से पहले ही आसमान में मार गिराया जाए। इसके लिये भारत सरकार ने पहले रूस से एस-400 ट्रायम्फ एंटी मिसाइल प्रणाली हासिल करने पर बातचीत की जो कि 250 किलोमीटर दूर से ही किसी हमलावर मिसाइल को आसमान में ध्वस्त कर सकती है। करीब पौने छह अरब डालर की लागत से ऐसी पांच एस-400 मिसाइल बैटरियां खरीदने के लिये रुस से सहमति हो चुकी है। लेकिन सामरिक हलकों में हैरानी तब हुई जब अमेरिका से भी इससे कुछ कम क्षमता वाली नेशनल एडवांस सर्फेस टू एयर मिसाइल सिस्टम ( एनएएसएएमएस)  की बैटरियां खऱीदने की प्रक्रिया शुरू करने की बात हुई। राजधानी के कई इलाके काफी संवेदनशील हैं जहां देश के सत्ता वर्ग के आला प्रतिनिधि बैठते हैं। देश पर किसी बड़े परमाणु हमले के दौरान इन राजनेताओं  और सामरिक कर्णधारों को बचाना बेहद जरुरी होगा ताकि देश का नेतृत्व जरुरी फैसले लेते रहे।

सामरिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि भविष्य के किसी भी युद्ध में बैलिस्टिक मिसाइलों का जम कर इस्तेमाल होगा। इसलिये जरूरी है कि इनसे बचाव के लिये देश के महत्वपूर्ण राजनीतिक औऱ सैनिक सत्ता केन्द्रों को जरुरी सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि दुश्मन को पता हो कि उनका वार बेकार जाएगा।  बैलिस्टिक मिसाइलों के हमलों से बचाव के लिये एंटी मिसाइल प्रणालियों की तैनाती से देश के सैन्य औऱ राजनीतिक नेतृत्व का मनोबल ऊंचा बना रहेगा। तभी वे बेधड़क दुश्मनों के हमलों से बचाव और उन्हें डराने  के लिये अहम फैसले ले सकते हैं।

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