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समर नीति- ताकतवर देश की भूमिका कैसे निभाएं ?

भारतीय सेना हिंद महासागर में

हिंद महासागर से लेकर प्रशांत सागर तक भारत अपना सामरिक दबदबा स्थापित करना चाहता है लेकिन इसके लिये आर्थिक ताकत के साथ सैन्य सामर्थ्य का भी होना जरूरी है। आर्थिक ताकत के साथ भारत एक सैन्य ताकत के तौर पर भी उभरना चाहता है लेकिन सेनाओं को हर साल जिस तरह सीमित बजटीय समर्थन मिलता रहा है वह भारत को इस सम्भावित भूमिका के लिये तैयार नहीं कर सकता। इस भूमिका के लिये केवल बयानबाजी से ही काम नहीं चलेगा। जिस तरह चीन ने हिंद महासागर के इलाके में अपनी परमाणु पनडुब्बियां तैनात कर रखी हैं उसी तरह भारत को भी अपने कई युद्धपोत हिंद महासागर से लेकर प्रशांत सागर के इलाके में तैनात रखने होंगे।





इस नजरिए से सोचें तो हमें इस साल का रक्षा बजट निराश ही करता है। पिछले साल के 2लाख 74हजार करोड़ रुपये के रक्षा बजट में इस साल महज 7.6 प्रतिशत की बढोतरी कर करीब 2लाख 95हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया है जिससे यह संदेश हमारे पड़ोसी देशों को जाएगा कि भारतीय सेनाओं को आने वाले वर्षों में जरूरी संसाधन नहीं मिलने वाले।

सैन्य सामर्थ्य के लिये जरूरी है कि सेनाओं के पास समुचित संसाधन हों। हाल में अमेरिका ने हिंद प्रशांत इलाके में शांति व सुरक्षा बनाए रखने में भारत को अपना साझेदार घोषित किया है और चार देशों आस्ट्रेलिया, जापान, अमेरिका औऱ भारत का एक चतुर्पक्षीय गुट भी इसी इरादे से बनाया है कि सभी मिल कर हिंद महासागर से लेकर प्रशांत सागर तक चीन के विस्तारवादी कदमों का एकजुट मुकाबला करें। हिंद महासागर के अगुआ देश होने के नाते इस गुट के सभी साझेदार देश भारत से ही यह उम्मीद कर रहे हैं कि भारत इतने सैन्य संसाधन तैनात करेगा कि चीन इस इलाके पर ललचाई निगाह नहीं रखे।

भारतीय सेनाओं के सामने न केवल अपनी जमीनी सीमाओं की चौकसी की भारी जिम्मेदारी है बल्कि हिंद महासागर के सम्पूर्ण इलाके में अपनी मौजूदगी दिखाते रहने की जरूरत है ताकि भारत के प्रतिद्वंद्वी देश भारत की सैन्य ताकत से डर कर हमारे इलाके में भटकें ही नहीं। जमीनी सेनाओं पर जहां चीन और पाकिस्तान से भारी चुनौती मिल रही है वहीं सागरीय इलाके में भी चीन भारत के लिये बडे खतरे के तौर पर उभरने लगा है। भारत का 90 प्रतिशत से अधिक आयात निर्यात समुद्र के रास्ते होता है इसलिये जरूरी है कि हिंद प्रशांत के सागरीय इलाके में भारत अपने समुद्री व्यापार को सुरक्षा मुहैया कराए। किसी देश के साथ सैन्य तनाव की हालत में भारत का यह समुद्री व्यापार बाधित हो सकता है। समुद्र के जरिये होने वाला व्यापार भारत की जीवन रेखा है इसलिये इनकी सुरक्षा के लिये जरूरी है कि न केवल भारत अपनी जमीनी और हवाई सेनाओं को ताकतवर बनाए बल्कि अपनी समुद्री सेनाओं को भी जरूरी संख्या में युद्धपोत और पनडुब्बियां मुहैया कराए। लेकिन भारतीय नौसेना की नये युद्धपोतों को हासिल करने की जो योजना है उसके मद्देनजर नहीं लगता कि कुछ सालों तक भारत अपने प्रतिद्वंद्वी देशों के नापाक इरादों को चुनौती दे सकेगा। इसके लिये जरूरी है कि सरकार राष्ट्रीय संकल्प दिखाते हुए तीनों सेनाओं के लिये जल्द से जल्द जरूरी संसाधन हासिल करने के लिये समुचित बजटीय प्रावधान करे।

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