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समर नीति: अब Space Force का गठन करेगा अमेरिका

अमेरिका के उप-राष्ट्रपति

अमेरिका ने लम्बी तैयारी के बाद अपनी सेनाओं के लिये छठी शाखा Space Force की स्थापना का अंततः ऐलान कर दिया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन में एक भाषण के दौरान इस फैसले का ऐलान करते हुए कहा कि वक्त आ गया है कि यूनाइटेड स्टेट्स space force की स्थापना की जाए। अमेरिका इसके लिये तीनों सेनाओं के मौजूदा कमांडों को एकीकृत कर नये एकीकृत space force का गठन करेगा।





पेंस के मुताबिक यह एक नया उभरता हुआ रणक्षेत्र है जिसके खतरों का मुकाबला करने के लिये अमेरिका तैयार होगा। साल के अंत तक अमेरिकी सेनाओं की इस नई शाखा का गठन हो जाएगा। इसके पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक ट्वीट संदेश में space force के गठन के फैसले की ओर इशारा किया था। अंतरिक्ष से संचालित युद्ध के लिये अमेरिका ने काफी पहले ही space कमांड का गठन किया था लेकिन अब इसका स्तर ऊंचा कर इसे space force का रूप दिया जाएगा।

अमेरिका के इस कदम से यह निश्चित है कि अमेरिका के मुख्य प्रतिदवंद्वी रूस औऱ चीन भी अंतरिक्ष में अपनी सैन्य space force की स्थापना करें। इस तरह अंतरिक्ष में सैन्य संसाधनों का जमावड़ा बढ़ने की तैयारी अब पहले से कहीं अधिक तेज होगी। अमेरिकी सशस्त्र सेनाओं के पास इसके पहले – आर्मी, नेवी, एयर फोर्स, मरीन कोर, कोस्ट गार्ड सक्रिय था जिसमें अब छठी शाखा space force जुड़ जाएगी।

जहां भारत में space कमांड के गठन पर लम्बे अर्से से फैसला इसलिये टला हुआ है कि यह काफी खर्चीला है वहीं चीन ने कई साल पहले ही space कमांड का गठन कर अंतरिक्ष युद्ध से निबटने की तैयारी कर ली है। अब अमेरिका द्वारा space force का गठन करने के बाद चीन और रूस भी अपने space कमांड का स्तर ऊंचा कर space force का स्वरूप देने के लिये काम शुरु कर सकते हैं।

अमेरिकी सशस्त्र सेनाओं के पास स्वतंत्र तौर पर सक्रिय मिलिट्री space आपरेशंस कमांड हैं जिनमें एयर फोर्स space कमांड, यूएस नेवी नेवल नेटवर्क वारफेयर कमांड, अमेरिकी थलसेना का space एंड मिसाइल डिफेंस कमांड और अमेरिकी स्ट्रैटजिक कमांड है जिसमें अंतरिक्ष के लिये Joint functional component command for space शामिल है।

अमेरिका के इन हर स्वतंत्र कमांड के पास अपना ही स्वतंत्र शोध, विकास, परीक्षण एवं आकलन (आरडीटीई) विभाग है। अमेरिका इन्हीं सभी अंतरिक्ष कमांडों को एकीकृत कर बेहतर तालमेल के लिये Unified Space Force की स्थापना करना चाहता है।

रणक्षेत्र में अपने को सर्वश्रेष्ठ साबित करने के लिये दुनिया भर में सेनाएं अक्सर संगठनात्मक पुनर्गठन करती हैं। अमेरिका भी अब सभी कमांडों को एकीकृत कर ताकतवर space force के तौर पर उभरना चाहता है ताकि चीन और रूस की अंतरिक्ष में सैन्य ताकत पर हावी हुआ जा सके। सैन्य विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य के युद्ध अंतरिक्ष से संचालित होंगे इसलिये हवाई और जमीनी शस्त्र प्रणालियों के संचालन में अंतरिक्ष आधारित लेजर शस्त्र प्रणालियां औऱ संचार सुविधाओं का सक्षम इस्तेमाल किया जाएगा। अंतरिक्ष से ही धऱती और हवा में तैनात शस्त्र मंचों औऱ प्रणालियों का संचालन होगा और अंतरिक्ष से ही धरती की शस्त्र प्रणालियों को बेअसर किया जा सकेगा। साफ है कि जिस देश के पास अंतरिक्ष में यदि ये सुविधाएं स्थापित नहीं होंगी तो वह धरती आधारित अपनी शस्त्र प्रणालियों को समुचित निर्देश वक्त पर नहीं दे पाएंगी। भविष्य का युद्ध वही जीतेगा जो हर सेकंड की अहमियत समझता हो और इसमें अंतरिक्ष आधारित उपग्रह अपने कैमरों और संचार उपकरणों की मदद से संचार नेटवर्क अपने लिये तो स्थापित करे ही दुश्मन के संचार नेटवर्क को तोड़ने में भी कामयाब हो जाए।

 

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