vishesh

समर नीति: परमाणु हथियारों की होड़ बढ़ाएगा अमेरिकी बजट

राष्ट्रपति ट्रंप
फाइल फोटो

गत सोमवार को वाशिंगटन में घोषित साल 2021 के लिये अमेरिकी रक्षा को 705 अरब डॉलर का रिकार्ड बजट दिया गया है जिसमें दो नये न्यूक्लियर वारहेड औऱ दो नई मिसाइलों के विकास के लिये 19.8 अरब डॉलर का विशेष बढ़ा हुआ प्रावधान किया गया है। इनमें एक हैं W-93 मिसाइल जिसकी क्या खासियतें होंगी इनका खुलासा नहीं किया गया है लेकिन अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि इनका विकास साल 2034 तक हो पाएगा।





इसके अलावा एक औऱ किस्म की परमाणु मिसाइल 87-1 का विकास भी होगा जो कि वास्तव में जमीन से छोड़ी जाने वाली मिसाइलों पर तैनात करने योग्य 40 साल पुराने थर्मो न्यूक्लियर वेपन का नया डिजाइन किया होगा और इसका विकास 2030 तक ही होने का अनुमान है।

इन नई मिसाइलों के विकास के फैसलों से यह संकेत मिल रहा है कि अमेरिका अपनी सुरक्षा नीति को एक बार फिर परमाणु हथियारों पर केन्द्रित करने जा रहा है। हो सकता है कि अगली बार डोनाल्ड ट्रम्प फिर व्हाइट हाउस में नहीं विराजमान हों तो अगला राष्ट्रपति इन नई घातक मिसाइल प्रणालियों के विकास के कार्यक्रम को रोक सकता है। लेकिन अमेरिका को फिर महान बनाने का संकल्प लेने वाले डोनाल्ड ट्रम्प फिर राष्ट्रपति बनते हैं तो दुनिया एक बार फिर परमाणु हथियारों की होड़ देखेगी जिसके भयावह दुष्परिणाम भारत जैसे देशों के लिये होंगे क्योंकि चीन भी अमेरिका-रूस के परमाणु होड़ में शामिल होगा औऱ जो भारत के लिये भयावह लग रहा है।

सवाल यह उठता है कि जब बड़ी ताकतों के पास हजारों औऱ सैंक़डों की संख्या में परमाणु मिसाइलें हैं और दुश्मन की इन मिसाइलों से रक्षा के लिये एंटी मिसाइलें भी तैनात होने लगी हैं तब अमेरिका नई किस्म की परमाणु मिसाइलों औऱ वारहेडों का विकास क्यों करने जा रहा है।

इसमें पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली डब्ल्यू-93 न्यूक्लियर वारहेड और नई किस्म की पारम्परिक इंटरमीडियट रेंज मिसाइलें शामिल हैं। इन हथियारो के विकास के लिये 2017 के दौरान किये गए प्रावधान से 50 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा अंतरिक्ष में तैनात किये जाने वाले नये संसाधनों के लिये साढ़े 15 अरब डालर दिए गए हैं। बजट में हाइपरसोनिक हथियारों के लिये 3.2 अरब डालर का प्रावधान किया गया है। कहा जारहा है कि छूटने के बाद इन मिसाइलों का पथ सीधे रास्ते पर नहीं होता जिससे कोई भी एंटी मिसाइल प्रणाली इनका नाश नहीं कर सकती।

अमेरिकियों का बहाना है कि रूस भी कुछ इसी किस्म के हथियारों का विकास कर रहा है इसलिये अमेरिका को इस तरह का विकास कार्यक्रम शुरु करना पड़ा। शंका जाहिर की जा रही है कि क्या अमेरिकी मिसाइल प्रणालियों को तब तक तैनात किया जा सकेगा जब तक रूसी मिसाइल प्रणालियों की तैनाती हो चुकी होगी।

राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन ने जब रूस के साथ एक दशक पहले नई स्टार्ट संधि ( सामरिक अस्त्र परिसीमन वार्ता) की थी तब यह ऐलान किया था कि यह अमेरिका की नीति है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में परमाणु हथियारों की भूमिका गौण रहेगी। इसके अलावा अमेरिका 21 वीं सदी में अमेरिका परमाणु हथियारों के खतरों को कम करने पर जोर देगा। इसके साथ ही उन्होंने यह वचन भी दिया था कि अमेरिका की सुरक्षा के लिये सुरक्षित और प्रभावी परमाणु हथियारों का समुचित भंडार बनाए रखा जाएगा।

लेकिन ओबामा प्रशासन के इस संकल्प को तोड़ते हुए डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने परमाणु हथियारों के नये प्रोजेक्ट शुरू करने का ऐलान कर दिया है। डोनाल्ड ट्रम्प के रक्षा बजट में पुराने हथियारों को अधिक प्रभावी बना कर इनका इस्तेमाल करने के इरादे से भी नये बजटीय प्रावधान किये गए हैं। साफ है कि डोनाल्ड ट्रम्प दुनिया को एक बार फिर नये शीतयुद्ध में ले जाने को आतुर हैं जिनमें परमाणु हथियारों का डर सारी दुनिया को सताएगा।

Comments

Most Popular

To Top