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समर नीति: ब्रिटेन के चुनाव नतीजे ब्रिटिश एकता पर चोट

बोरिस जॉनसन
फोटो सौजन्य- गूगल

12 दिसम्बर को ब्रिटेन में हुए संसदीय चुनावों के नतीजे चौंकाने वाले इसलिये हैं क्योंकि यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने के मसले पर ब्रिटेन में गहरा विवाद चल रहा था। हालांकि भारत के नजरिये से ब्रिटेन के चुनाव नतीजे अनुकूल कहे जा सकते हैं क्योंकि ब्रिटेन की लेबर पाटी ने अपने वोट बैंक को मजबूत करने की खातिर मुस्लिम और पाकिस्तान तुष्टिकरण की राजनीति की ताकि ब्रिटेन में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के लाखों लोग लेबर पार्टी को वोट दें। इसलिये ताजा चुनाव नतीजों में सत्तारुढ़ कंजर्वेटिव पार्टी को भारी बहुमत मिलने से भारत को राहत महसूस होगी । कंजर्वेटिव पार्टी के नेता और मौजूदा प्रधानमंत्री बोरिस जानसन ने भारतीय समुदाय को अपनाया और उन्हें भरोसा दिलाया कि कंजर्वेटिव पार्टी उनके और भारत के हितों के खिलाफ कुछ नहीं करेगी।





चुनाव नतीजों में कंजर्वेटिव पार्टी को 364 और लेबर पार्टी को महज 203 सीटें मिलने से पाकिस्तानी समर्थक तत्वों को भारी झटका लगा है। दूसरी ओर  ब्रिटेन को एकजुट देखने की इच्छा रखने वाले लोग भी शंकित हैं कि कहीं इस चुनाव नतीजे का असर ब्रिटेन की प्रादेशिक एकता पर नहीं पड़ने लगे।

घोषित चुनाव नतीजों में कंजर्वेटिव पार्टी को 364 और लेबर पार्टी को महज 203 सीटें मिलने से साफ  है कि प्रधानमंत्री बोरिस जानसन को यूरोपीय संघ से अपनी शर्तो पर निकलने के प्रस्ताव मनवाने मे  अधिक दिक्कतें नहीं होंगी। वह नई संसद से अपने सभी प्रस्ताव आसानी से पारित करवा सकेंगे लेकिन इसके साथ ही ब्रिटेन में इन शंकाओं को बल मिलेगा कि ब्रिटेन के राज्य  स्काटलैंड में ब्रिटेन  से आजादी की मांग तेजी पकड़ सकती है।  स्काटलैंड में कंजर्वेटिव पार्टी को भारी शिकस्त मिली है औऱ वहां आजादी समर्थक स्काटिश नेशनल पार्टी (SNP) को 59 में से 48 सीटे मिली हैं। इससे स्काटलैंड की आजादी की मांग करने वालों का मनोबल और बढ़ेगा जिससे जानसन सरकार को जल्द ही उलझना होगा।

वास्तव में स्काटलैंड के लोग यूरोपीय संघ की सदस्यता बरकरार रखना चाहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यूरोपीय संघ से स्काटलैंड के लोग भारी लाभ उठा रहे हैं। लेकिन जब बोरिस जानसन की सरकार यूरोपीय संघ से अलग होने के लिये यूरोपीय संघ से समझौता कर लेगी  तब स्काटलैंड में आजादी की सुगबुगाहट तेज होगी और तब शायद बोरिस जानसन इसे नजरंअदाज नहीं कर सकेंगे।

स्कॉटलैंड की आजादी की मांग जब जोर पकड़ेगी तब उत्तरी आयरलैंड भी पीछे नहीं रहना चाहेगा। इसी मई महीने में वहां करवाए गए एक जनमत सर्वेक्षण में 51 प्रतिशत लोगों ने ब्रिटेन से अलग होने और मुख्य आयरलैंड देश में विलय कर जाने का मत दिया था।

इस तरह  ब्रिटेन के ताजा चुनाव नतीजे ब्रिटेन के एकजुट भविष्य के लिये  शंकाएं पैदा करने लगे हैं। चार प्रांतों- इंग्लैंड, वेल्स, उत्तरी आयरलैंड और स्कॉटलैंड  को मिलाकर बना यूनाइटेड किंग्डम  अब बिखराव के कगार पर लगता है। ब्रिटेन के ताजा चुनाव इस प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं।

चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री बोरिस जानसन ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह ब्रिटेन में राजनीतिक भूकम्प  जैसा है लेकिन सही मायने में देखा जाए तो ताजा चुनाव नतीजे ब्रिटेन में भौगोलिक भूकम्प पैदा करने की सम्भावना पैदा कर चुके हैं जिससे ब्रिटेन के लिये बचना मुश्किल होगा।

ब्रिटेन का यह घटनाक्रम पूरे विश्व की भू-राजनीति पर असर डालेगा। ब्रिटेन के विघटन की प्रक्रिया शुरू होते ही पिछली सदी में दुनिया के करीब आधे हिस्से पर राज करने वाला ब्रिटेन स्वयं  मिटता हुआ लगने लगा है इस बात की सम्भावनाएं राजनयिक पर्यवेक्षक देखने लगे हैं।

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