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समर नीति: चीनी सैनिकों को सबक सिखाया

लद्दाख सीमा पर भारतीय सेना

गत 15 जून को पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी इलाके में 20 भारतीय सैनिकों को चीनी सेना द्वारा बर्बरता पूर्वक मारने की रिपोर्टों ने पूरे देश को दहला दिया है और पूरा देश गुस्से में है। लेकिन इसके जवाब में क्या भारतीय सैनिक चुपचाप मार खाते रहे या चीनी सैनिकों को मुंहतोड जवाब दिया। इसका संकेत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 19 जून को सर्वदलीय बैठक को सम्बोधित करते हुए दिया गया जिसमें उन्होंने कहा कि शहीद भारतीय सैनिक चीनी सैनिकों को सबक सिखा कर गए। पूर्वी लद्दाख से छन छन कर जो रिपोर्टें आ रही हैं उनसे पता चलता है कि भारतीय सैनिकों पर चीनी सैनिकों ने तब हमला किया जब गलवान घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गत छह जून को दोनों सेनाओं के बीच लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत में जो सहमति बनी थी उसका पालन सुनिश्चित करने के लिये जब भारतीय सैनिक वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गए तो देखा कि चीनी सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के ठीक पार कुछ संरचनाएं बनाई हैं जिस पर भारतीय सैनिकों ने एतराज करते हुए उन्हें हटाने को कहा तो चीनी सैनिकों ने न केवल उन्हें हटाने को कहा बल्कि वहां गए भारतीय सैनिकों पर अचानक धावा बोल दिया। इस दौरान वहां तैनात भारतीय सेना के कर्नल संतोष बाबू पर चीनी सैनिकों ने इतना करारा वार किया कि उनकी वहां मौत हो गई। इसे देखकर भारतीय सैनिक गुस्से में आग बबूला हो गए और वे अपने और साथी सैनिकों के साथ मिलकर चीनी सैनिकों पर पलटकर हमला किया जिसमें करीब 20 चीनी सैनिकों की उन्होंने राइफल में लगी चाकू से गर्दनें उडा दीं।





रिपोर्ट है कि कम से कम 43 चीनी सैनिकों की इस जवाबी हमले में मौत हो गई। साफ है कि भारतीय सेना ने भी चीनी सेना के कायरतापूर्ण हमला के कडा जवाब दिया और चीनी सैनिकों को भी स्वर्ग का रास्ता दिखाया। इस घटना को लेकर भारत और चीन के बीच राजनयिक स्तर पर तू तू मैं मैं चली जिसमें चीनी सेना ने भारतीय सेना पर आरोप लगाया कि उन्होंने वास्तविक नियंत्रण रेखा को उल्लंघन किया और चीनी इलाके में जा कर हिंसा की। भारतीय विदेश मंत्रालय ने 20 जून की रात को साफ किया कि भारतीय सेना ने कभी भी वास्तविक नियंत्रण रेखा का उल्लंघन नहीं किया।

चीन की गलवान नदी घाटी इलाके पर गहरी नजर इसलिये लगी है कि यह इलाका पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर इलाके के गिलगिट के नजदीक है जहां से चीन द्वारा बनाया जा रहा चीन-पाक आर्थिक गलियारा है जिसकी सुरक्षा को लेकर चीन चिंतित है और उसे लग रहा है कि भारतीय सेना गलवान नदीं के इलाके से चीनी आर्थिक गलियारा को नुकसान पहुंचा सकती है। चीनी सेना ने गत पांच मई को इसलिये इस इलाके में गश्ती दे रही भारतीय सेना को चुनौती दी और तब से इस इलाके में दोनों सेनाओं के बीच तनातनी बनी हुई है। चीनी सेना ने कडा रुख अपनाते हुए पूरी गलवान घाटी को अपना इलाका बताया है लेकिन ऐतिहासिक सच्चाई बताती है कि 1962 के बाद से चीनी सेना इस इलाके से पीछे इसलिये हट गई थी कि यह इलाका लद्दाख का है। चीनी सेना ने कभी इस इलाके में भारतीय सेना को चुनौती नहीं दी और भारतीय सेना ने भी कभी यह नहीं सोचा कि चीन इस इलाके पर भविष्य में अपना दावा जताएगा। लेकिन गत मई महीने से इस इलाके में चीनी सेना ने अपनी तैनाती बढाकर अपने नापाक इरादे साफ कर दिये हैं कि वह एकतफा तौर पर इस इलाके की वास्तविक नियंत्रण रेखा का उल्लंघन करना चाहता है। चीन के इन इरादों को भारत ने चुनोती दी है और चीनी धमकियों से निबटने के लिये अपनी सेनाओं को मुस्तैद कर दिया है। चीन को समझ में आना चाहिये कि वह सैन्य हमले की धमकी दे कर भारत को कभी झुका नहीं सकता।

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