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समर नीतिः भारत के लिए चिंता का सबब बनता मालदीव

मालदीव के बिगड़ते हालात

मालदीव भारत के लिये गले की हड्डी बन गया है। मालदीव के अब्दुल्ला यामीन द्वारा अपनी गद्दी बचाने की कोशिश में चीन की गोद में बैठ जाने से भारत के सामने विदेश नीति की सबसे बड़ी चुनौती पेश हो रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता सम्भालते ही पड़ोसी प्रथम की विदेश नीति को प्राथमिकता देने का ऐलान किया था लेकिन पड़ोसी देशों के नेताओं द्वारा अपनी कुर्सी बचाने के लिये चीन से दोस्ती की धौंस दिखाने की वजह से भारत के लिये वहां जनतांत्रिक मूल्यों के साथ चलने की परम्परागत नीति को धक्का लगा है। जिस तरह नेपाल में मधेसी लोगों के साथ हो रहे अन्याय को भारत बर्दाश्त नहीं कर सकता था उसी तरह मालदीव में भी जनतांत्रिक मूल्यों को कुचलने वाले राष्ट्रपति यामीन की निंदा करने में भारत कोताही नहीं कर सकता है। यामीन को डर है कि भारत के साथ रिश्तों की चिंता की तो उनकी सत्ता जा सकती है। इसीलिये यामीन ने अपने देश को पूरी तरह चीन के हवाले कर दिया है। चीन इसका नाजायज फायदा उठा कर मालदीव को अपने जाल में फंसा चुका है और भारत दुविधा में है कि मालदीव के साथ क्या करे कि मालदीव भारत के प्रभाव क्षेत्र से बाहर नहीं जाए।





मालदीव केरल के समुद्र तट से करीब 300 किलोमीटर दूर है और चीन यदि वहां के कुछ द्वीपों को अपने कब्जे में लेकर वहां अपनी सेनाओं के लिये सुविधाएं स्थापित करने लगे तो भारत का चिंतित होना लाजिमी है। चीन की दीर्घकालीन रणनीति है कि मालदीव को अपने कब्जे में रखे और इसके द्वीपों पर अपनी मौजूदगी बना कर हिंद महासागर में अपनी नौसेना के लिये ठहरने और रखरखाव का ठिकाना बनाए। भारत अब तक श्रीलंका के हमबनटोटा और पाकिस्तान के ग्वादार बंदरगाहों की वजह से ही चिंतित था लेकिन इस कड़ी में मालदीव के जुड़ जाने से भारतीय सामरिक हलकों में गहरी चिंता है। भारत के इर्द-गिर्द मोतियों की माला पिरोने की चीन की रणनीति अब पूरी तरह जमीन पर उतरती लग रही है।

हिंद महासागर भारत का आंगन माना जाता है और इस इलाके में चीन यदि इस तरह के सामरिक खेल खेलने लगे तो चीन की मंशा साफ हो जाती है कि वह अपने सामरिक असर का विस्तार हिंद महासागर के इलाके तक करना चाहता है। चीन की इस रणनीतिक चाल को काटने के लिये भारत को अपनी समर नीति को आक्रामक बनाना होगा और इसके लिये जरूरी है कि भारतीय नौसेना को जरूरी संसाधन मुहैया कराए जाएं। इनमें सबसे जरूरी है कि उसके पास पनडुब्बियों का बेड़ा जल्द से जल्द बढ़ाया जाए।

मालदीव में यामीन को अपने कब्जे में रखने की चीन की रणनीति उसकी हिंद महासागर रणनीति का एक हिस्सा है। इसलिये मालदीव और हिंद महासागर में चीन की चाल को काटने के लिये भारत को चार देशों के  हिंद प्रशांत गठजोड़ को भी जल्द से जल्द सक्रिय करने में अपना योगदान देना होगा। हिंद महासागर में चीन की बढ़त रोकने में चार देशों के गुट के बाकी सदस्यों अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया की भी समान रुचि है इसलिये चारों देशों को अपने सैनिक संसाधनों का एकजुट इस्तेमाल करना होगा। चार बड़ी ताकतों की एकजुटता चीन को अभी से परेशान करने लगी है इसलिये चीन के सामरिक हलकों में इस चतुर्पक्षीय गुट को लेकर निंदात्मक टिप्पणियां की जा रही हैं। लेकिन इसकी परवाह नहीं करते हुए भारत को चीन के खिलाफ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साथी देशों के साथ तालमेल से काम करना होगा।

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