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समर नीति: पड़ोसी देश म्यांमार को भारत की पनडुब्बी

पनडुब्बी-शिशुमार
फाइल फोटो

भारत के जमीनी और सागरीय पड़ोसी देश म्यांमार को अपने नैसैनिक बेड़े में से एक पनडुब्बी सौंपने का फैसला भारत की नई पड़ोसी नौसैनिक कूटनीति का परिचायक है। भारत के पडोसी देशों श्रीलंका, बांग्लादेश और म्यांमार को अपने रक्षा साज सामान की सप्लाई कर चीन अपने रक्षा सम्बन्ध न केवल गहरे करने की कोशिश कर रहा था बल्कि उन देशों की चीन पर निर्भरता भी बनाता जा रहा था। ऐसे में भारतीय नौसेना और म्यांमार की नौसेना के बीच रिश्तों के नये समीकरण बनने की विशेष सामरिक अहमियत है।





अपने बेड़े में भारतीय पनडुब्बी को शामिल कर म्यांमार ने यह संदेश भी दिया है कि वह अपने सारे अंडे चीन की टोकरी में नहीं डालना चाहता है। हाल के सालों में जब म्यांमार में सेना का राज चल रहा था. चीन म्यांमार के साथ विशेष रिश्ते बनाने में कामयाब हो रहा था। लेकिन जब से म्यांमार में जनतांत्रिक शासन आया है म्यांमार चीन पर अपनी निर्भरता कम करता जा रहा है।

भारत और म्यांमार के बीच 1,640 किलोमीटर लम्बी सीमा उत्तर पूर्वी राज्यों के साथ लगती है जब कि दोनों देशों के बीच 725 किलोमीटर लम्बी सागरीय सीमा भी है। यह इलाका बंगाल की खाडी में है जहां बांग्लादेश के साथ भी भारत की समुद्री सीमा लगती है। बाग्लादेश को चीन ने तीन साल पहले दो पुरानी पनडुब्बियों की सप्लाई की है इसके मद्देनजर म्यांमार को भारतीय नौसेना द्वारा अपने पनडुब्बी बेडे में से एक दे देने का फैसला काफी अहम है।

ऐसे वक्त जब चीन भारत के पडोसी देशों के साथ अपने सामरिक रिश्ते मजबूत कर रहा हो भारत के लिये जरूरी था कि अपने पड़ोसी देशों को चीन की गोद मैं बैठने से रोकने के लिये एक सुनियोजित समर नीति चलाए। इसमें भारत को पहली कामयाबी मिली है। वास्तव में भारत की सबसे बडी चिंता श्रीलंका और चीन के बीच गहराते सामिरक रिश्तों को लेकर है। तीन साल पहले चीन की नौसेना की एक परमाणु पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट पर लंगर डाला था तब भारत के सामरिक हलकों में सनसनी पैदा हुई थी लेकिन इसके बाद भारत ने श्रीलंका सरकार को आगाह किया कि भविष्य में ऐसा नहीं करे। महिन्द राजपक्ष की अगुवाई वाली श्रीलंका की वर्तमान सरकार ने भारत को भरोसा दिया है कि चीन के साथ रिश्ते आर्थिक सहयोग तक ही सीमित हैं और उनका देश भारत के सुरक्षा हितों को किसी तरह चोट नहीं पहुंचाएगा।

इसी तरह म्यांमार ने भी भारत को भरोसा दिया है कि वह भारत के सुरक्षा हितों पर किसी तरह आंच नहीं आने देगा। चीन की कोशिश रही है कि वह म्यांमार के रास्ते बंगाल की खाडी और हिंद महासागर तक अपनी सीधी पहुंच बना सके। भारतीय रणनीतिकारों को यह देखना होगा कि वे कौन सी वजहें हैं जिनसे प्रेरित हो कर भारत के पड़ोसी देश चीन की गोद में बैठने लगते हैं। भारत ने इन वजहों को अब तक नजरंअदाज किया और पड़ोसी देशों पर चीन हावी होता गया। वास्तव में चीन ने भारत और पडोसी देशों के रिश्तों में दरारों का लाभ उठाया और भारत के इर्दिगिर्द मोतियों की हार पहनाने की अपनी रणनीति के तहत भारत के पडोसी देशों को भारत से छीनने की कोशिश की है।

लेकिन भारतीय रणनीतिकार अब सजग हो गए हैं और अपनी सैन्य क्षमता घटने की कीमत पर भी जिस तरह म्यांमार की नौसेना को अपने चिंताजनक स्तर तक पहुंच चुके पनडुब्बी बेडे में से एक किलोवर्ग की पनडुब्बी आईएनएस सिंधुवीर निकाल कर म्यांमार को सौंपी है उस पर दुनिया के सामरिक विश्लेषकों का ध्यान जाएगा। म्यांमार भारतीय पनडुब्बी पर अपने नौसैनिकों को ट्रेनिंग देने के तौर पर इस्तेमाल करेगा तो स्वाभाविक है कि वह भारतीय पनडुब्बी संचालकों को ही इसके लिये आमंत्रित करेगा इससे भारत औऱ म्यांमार के बीच दीर्घाकालीन सामरिक रिश्ते मजबूत होते जाएंगे।

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