vishesh

समर नीति: विकसित देशों के गुट में भारत की एंट्री

जी- 7 देश
फोटो सौजन्य- गूगल

सात विकसित देशों के संगठन जी-7 का विस्तार करने का प्रस्ताव है और इसमें भारत को शामिल करने की सिफारिश अमेरिका ने की है। जी-7 में फिलहाल अमेरिका, जापान, इटली, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी और फांस शामिल हैं। इस संगठन के कामकाज में अग्रणी भूमिका निभाने वाले अमेरिका ने कहा है कि इस संगठन में अब नये सदस्यों को साथ लेने की जरूरत है क्योंकि जी-7 का मौजूदा स्वरुप पुराना पड चुका है। जी-7 की स्थापना 1975 में तब हुई थी जब 1973 के तेल संकट से विकसित देशों के साथ पूरी दुनिया कराह रही थी। जी-7 के सदस्य तेल संकट से निबटने के लिये एक साझा रणनीति पर काम करने के इरादे से इकट्ठे हुए थे। लेकिन तब शीतयुद्ध का भी माहौल था और चूंकि इस समूह में सभी सदस्य देश अमेरिकी खेमे के ही थे इसलिये कहा गया कि यह संगठन तत्कालीन सोवियत संघ की कम्युनिस्ट सत्ता को चुनौती देने के लिये बनाया गया है।





लेकिन पिछली सदी के अंतिम दशक में शीतयुद्ध को खत्म समझा जाने लगा औऱ नवगठित रूसी महासंघ और अमेरिका में साझेदारी बनने लगी। फलस्वरूप 1997 में रूसी महासंघ को जी-7 का सदस्य बना कर इसे जी-8 कहा जाने लगा। जी-7 मुख्य तौर पर विश्व आर्थिक हालात से निबटने के लिये साझा कार्यक्रम बना कर उसके पालन की भूमिका ही निभाता रहा लेकिन बाद में इसने राजनीतिक भूमिका भी निभानी शुरु की और इसने विश्व मामलों के लिये भी साझी रणनीति और फैसले लेने शुरु किये। जैसे 2014 में जब रूस ने उक्रेन के क्राइमिया इलाके पर कब्जा कर लिया तब अमेरिका और इसके साथी यूरोपीय देशों ने भारी एतराज किया और जी-8 से रूसी महासंघ को निष्कासित कर दिया।

अब एक बार फिर अमेरिका ने प्रस्ताव किया है कि जी-7 का जब विस्तार किया जाएगा तब इसमे रूस को भी शामिल किया जाएगा। विस्तारित सूची में भारत का नाम तो सर्वोच्च प्राथमिकता में तो है ही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे सूचित करने औऱ आगामी सितम्बर में वाशिंगटन में आयोजित हो रही जी-7 शिखर बैठक में निमंत्रित करने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गत दो जून को फोन पर बातचीत भी की। जी-7 के विस्तारित स्वरूप में भारत रूस के अलावा आस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को भी शामिल करने का प्रस्ताव अमेरिकी राष्ट्रपति ने किया है। इस तरह जी-7 का विस्तारित स्वरूप जी-10 या जी-11 हो जाएगा। इस विस्तारित जी-7 में भारत को शामिल होने से विश्व रंगमंच पर भारत की अहमियत बढ़ेगी और भारत की आवाज सुनी जाएगी।

जी-7 के सदस्य देशों में अब तक दुनिया के सबसे विकसित देशों को ही शामिल होने का सम्मान मिला है लेकिन भारत भी चूंकि दुनिया की दस सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो गया है औऱ भारत का सकल घरेलू उत्पाद बढकर पौने तीन ट्रिलियन डालर हो गया है इसलिये ऐसे अंतरराष्ट्रीय समूह में शामिल होना भारत का हक बनता है। विस्तारित जी-7 में शामिल होने से न केवल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्य के तौर पर भारत का दावा मजबूत होगा बल्कि 48 देशों के न्युक्लियर सप्यायर ग्रुप में भी भारत की सदस्यता का दावा मजबूत होगा। साफ है कि भारत की विश्व रंगमंच पर पूछ बढती जाएगी और भारत एक ऐसी शक्तिशाली आवाज बन कर उभरेगा जिसे चीन जैसे देश बंदरघुड़की देने के पहले कई बार सोचेंगे। चूंकि चीन को इस समूह में सामिल करने का प्रस्ताव नहीं है और उसके साथी देश रुस को शामिल करने का प्रस्ताव है इसलिये माना जा रहा है कि ऐसा होने पर चीन और रूस के बीच दुराव पैदा करने में अमेरिका और इसके साथी देश कामयाब हो सकते हैं। फिलहाल रूस ने अमेरिका और यूरोपीय देशों से इसलिये नाराजगी जाहिर की है कि उसे अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से बाहर करने की चाल अमेरिका करता रहा है।

Comments

Most Popular

To Top