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समर नीति: भारत की कोरोना कूटनीति

पीएम मोदी का आह्वान

कोरोना वायरस का कहर दुनिया भर में फैलने के बाद भारत तो इससे अछूता नहीं रहा लेकिन इसके बावजूद भारत ने अपने पड़ोसी देशों को जरुरी मदद पहुंचाने की कवायद शुरू कर दी है। हालांकि भारत में कोरोना वायरस का सीमित असर देखने को मिल रहा है लेकिन भारत पर वायरस फैलने का खतरा बना हुआ है। इसके मद्देजनर जहां एक ओर भारत सरकार अपने देश में कोरोना वायरस के प्रकोप को फैलने से रोकने के लिये राष्ट्रीय स्तर पर कदम उठाए हैं वहीं भारत ने अपने पड़ोसी देशों को भी कोरोना से निबटने में जरूरी मदद की कवायद शुरू कर दी है। पिछले रविवार को जब प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के राष्ट्रप्रमुखों की बैठक की थी तब उन्होंने एक करोड़ डॉलर का सार्क आपात कोष बनाने का सुझाव दिया था जो गठित होने के साथ ही पूरा इस्तेमाल में लाया गया। भूटान, मालदीव नेपाल जैसे देशों ने भारत से जो मदद मांगी वह एक करोड़ डालर की तय राशि से भी अधिक की लागत की थी लेकिन भारत ने वादा किया है कि वह हर तरह से अपने पडोसी देशों को मदद जारी रखेगा।





सार्क के अलावा भारत ने एक और अहम पहल की। दुनिया के 20 विकसित और विकासशील देशों के संगठन जी-20 के सदस्य देशों के बीच भी कोरोना वायरस के प्रकोप से साझा तौर पर निबटने के लिये शिखर स्तर पर वीडियो सम्मेलन का प्रस्ताव रखा है जिस पर विचार किया जा रहा है। इसके लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-20 के मौजूदा अध्यक्ष सऊदी अरब के शासन प्रमुख प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान से बात की जिन्होंने इस पर चर्चा करने का वादा किया है।

कोरोना वायरस के प्रकोप से सबसे ज्यादा दुनिया के सर्वाधिक विकसित देश ही प्रभावित हुए हैं जिनमें दुनिया की सबसे बडी ताकत अमेरिका भी शामिल है। जी-20 के सदस्य इटली में चार हजार लोग वायरस के प्रकोप से मारे जा चुके हैं और अमेरिका में भी दौ सौ से अधिक लोग वायरस के शिकार हो चुके हैं। ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देश भी कोरोना का कहर झेल रहे हैं। ऐसे में यह लाजिमी हो जाता है कि दुनिया के इस सबसे ताकतवर समूह के सदस्य देश मिल कर कोरोना से निबटने का साझा प्रयास करें।

प्राकृतिक आपदाओं के वक्त भारत ने पहले भी प्रभावित देशों को कई तरह की मदद दे कर एक ताकतवर देश के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभाई है। इसकी एक ज्वलंत मिसाल भारत ने साल 2004 में पेश की थी जब हिंद और प्रशांत महासागर के इलाके में आए भीषण समुद्री भूकम्प सूनामी की वजह से करोडों लोग प्रभावित हुए थे।। भारत भी इससे बच नहीं सका था लेकिन इसके बावजूद भारत ने सभी प्रभावित देशों को अपने नोसैनिक पोतों के जरिये सभी तटीय देशों को जरूरी राहत व बचाव सामग्री भेजकर पूरे इलाके में अपनी मौजूदगी का आहसास कराया था। इस बार भी जब कोरोना वायरस पूरी दुनिया में कहर ढाने लगा है और हजारों लोग मारे जा चुके हैं तथा लाखों प्रभावित हो चुके हैं भारत ने न केवल क्षेत्रीय स्तर पर बल्कि वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों को एक मंच पर ला कर साझा उपाय करने की असाधारण पहल की है।

कोरोना और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत व बचाव के कार्यों में भागीदारी दिखाकर भारत ने दुनिया को यह दिखाया है कि वह गैर पारम्परिक सुरक्षा में भी उतनी ही अहम भूमिका निभाने की क्षमता रखता है जैसे कि वह सागरीय इलाके में विभिन्न खतरों से समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में निभाने की पहल करता रहा है। कोरोना के दौरान भी भारत दक्षिण एशियाई इलाके में अपनी क्षेत्रीय पहल को जमीन पर उतार कर सामरिक जगत में अपनी अहम भूमिका सुनिश्चित करेगा।

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