vishesh

समर नीति: अफ्रीका में भारतीय रक्षा सामान

रक्षा प्रदर्शनी

लखनऊ में पांच से नौ फरबरी तक चली रक्षा प्रदर्शनी  डेफ एक्सपो -2020 का आयोजन  भारत अफ्रीका सामरिक सम्बन्धों के नजरिये से काफी कामयाब कहा जा सकता है

लखनऊ में पांच से नौ फरबरी तक चली रक्षा प्रदर्शनी  डेफ एक्सपो -2020 का आयोजन  भारत अफ्रीका सामरिक सम्बन्धों के नजरिये से काफी कामयाब कहा जा सकता है। डेफ एक्सपो के दौरान  भारत अफ्रीका रक्षा मंत्री सम्मेलन का आयोजन भारत औऱ अफ्रीकी देशों के बीच सामरिक और रक्षा सम्बन्धों को गहरा करने में  अहम योगदान करेगा। 54 अफ्रीकी देशों के संगठन अफ्रीकी यूनियन के साथ भारत 2008 से ही हर तीन साल पर शिखर सम्मेलन करता रहा है जिसमें करीब सभी  अफ्रीकी देशों के राष्ट्रप्रमुखों की भागीदारी भारत की एक बड़ी राजनयिक कामयाबी कही जा सकती है। इसी तर्ज पर भारत ने पहली बार लखनऊ में डेफएक्सपो के बहाने भारत अफ्रीका रक्षा मंत्री सम्मेलन का आयोजन किया जिसमें 12 अफ्रीकी रक्षा मंत्रियों के साथ कुल 38 देशों के  रक्षा प्रतिनिधियों ने भाग लिया औऱ इसके बाद एक साझा घोषणा पत्र जारी किया जो भारत अफ्रीका सम्बन्धें में नया सामरिक आयाम जोड़ेगा।





 अफ्रीकी देशों के साथ  भारत का ऐतिहासिक और भावनात्मक रिश्ता रहा है। अफ्रीकी देशों को औपनिवेशिक दासता से मुक्ति दिलाने में   भारत ने हर  राजनयिक मंच पर न केवल नैतिक समर्थन प्रदान किया है बल्कि उन्हें सैनिक और आर्थिक मदद भी दी है।  पिछली सदी के उत्तरार्द्ध में अफ्रीकी देशों में चल रहे गृहयुद्धों को खत्म कराने और वहां अपने शांति रक्षक दलों को भेज कर भारत ने शांति व स्थिरता बहाल करने में  भारत ने असीम मदद दी है। इन सबके बावजूद भारत अफ्रीका के  व्यावसायिक और रक्षा बाजार का उस स्तर पर दोहन नहीं कर सका जैसा कि चीन ने किया है।

शायद इसलिये कि भारत रक्षा निर्यात के क्षेत्र में नीतिगत तौर पर सक्रिय नहीं रहा है। भारत ने अफ्रीकी देशों को तकनीकी और शैक्षणिक मदद दे कर उन्हें अपने पांवों पर खड़ा होने में भी अहम योगदान दिया है। अब वक्त आ गया है कि  अफ्रीकी देशों को रक्षा साज सामान के क्षेत्र में भी भारत उसी तरह मदद करे जैसे कि वह अफ्रीका को अपने  पांवों  पर खडा होने में मदद करता रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत अफ्रीका रक्षा मंत्री सम्मेलन के दौरान अपने इरादे साफ कर दिय़े। उन्होंने साफ कहा कि भारत अफ्रीकी देशों को तेज चलने   वाले समुद्री  गश्ती पोत,इंटरसेप्टर बोट, बख्तरबंद वाहन , रात में देखने वाले चश्मे, मानव रहित यान, डार्नियर विमान, हथियार और गोलाबारूद , कई अन्य तरह की शस्त्र प्रणालियों आदि का निर्यात करने को तैयार है। अफ्रीकी देश आर्थिक तौर पर तेजी से विकास करने वाला महाद्वीप बन चुका है और वहां देशों को सुरक्षा तैयारी भी उसी स्तर पर करने की जरुरत है जिसकी मांग अब तक काफी हद तक चीन ने पूरी करने की कोशिश की है।

भारत में 40 से अधिक आयुध कारखाने और आठ सार्वजनिक उपक्रमों के बावजूद भारत अब तक अपने ही देश की सेनाओं की शस्त्र मांगें नहीं पूरी कर पा रहा था लेकिन  जब से भारत ने रक्षा निर्यात में अपने ठोस कदम रखने का संकल्प जाहिर किया है भारत की नजर खासकर अफ्रीकी रक्षा बाजारों पर पड़ी है।  भारत का रक्षा निर्यात पिछले साल 11 हजार करोड रुपये से अधिक रहा। अफ्रीकी देशों को जिस तरह के सैनिक साज सामान की जरुरत है भारत उन्हें पूरा करने में सक्षम हो सकता है। जरुरत केवल इस बात की है कि अफ्रीकी देशों के साथ मेलजोल और आदान प्रदान को और गहरा किया जाए। रक्षा मंत्री सम्मेलन के आयोजन के पहले भारत ने अफ्रीकी देशों के साथ साझा सैन्य अभ्यासों का सिलसिला भी चलाया और अब  इस साल के उत्तरार्द्ध में भारत अफ्रीका शिखर सम्मेलन के आयोजन की तैयारी शुरु हो चुकी है। रक्षा मंत्रियों का सम्मेलन भारत अफ्रीका शिखर बैठक के लिये जरुरी जमीन तैयार करेगा।  वक्त आ गया है कि अफ्रीकी देशों में भारत अपनी लोकप्रियता का लाभ  सामरिक क्षेत्र में उठाने के लिये और भी  जरुरी पहलें करे।

Comments

Most Popular

To Top