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समर नीति: चीन के पड़ोसियों को ब्रह्मोस का निर्यात करे भारत

ब्रह्मोस मिसाइल
फाइल फोटो

सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का भारत में गत दो दशकों से उत्पादन हो रहा है और इसे भारत की अग्रणी शस्त्र प्रणाली के तौर पर देखा जाता है जिसके निर्यात से भारत भी चीन के पड़ोसी देशों के साथ अपने रक्षा रिश्ते गहरे कर सकता है। चीन के पड़ोसी देशों  द्वारा लम्बे अर्से से की जा रही मांग को अब भारत और रूस की सरकारों ने मंजूरी दी है तो उम्मीद की जानी चाहिये कि जल्द से जल्द दक्षिण चीन सागर के तटीय देशों को  इनका निर्यात होने लगेगा।





सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को हासिल करने में दक्षिण चीन सागर के तटीय देश इसलिये रुचि लेते रहे हैं कि चीन इस सागरीय इलाके पर अपना दावा जताता है और तटीय देशों को धमकाता रहता है। इन तटीय देशों ने करीब एक दशक से भारत से आग्रह किया है कि   ब्रह्मोस मिसाइलों का निर्यात करें लेकिन चीन की संवेदनशीलताओं के मद्देनजर भारत इसमें हिचक दिखाता रहा है। हालांकि चीन ने भारत के पडोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार आदि को कई तरह के संवेदनशील हथियारों का निर्यात कर भारत की सुरक्षा पर आंच डाली है लेकिन भारतीय रक्षा कर्णधारों ने  चीन की सुरक्षा पर आंच डालने वाला ऐसा कदम उठाने में हिचक दिखाई है।

 चीन ने पाकिस्तान को परमाणु हथियारों और मिसाइलों से तो लैस किया ही है उसे युद्धपोतों, लडाकू विमानों, पनडुब्बियों आदि से भी लैस कर अपने रक्षा उद्योग को चमकाया है।  चीन ने बांग्लादेश जैसे देश को भी पनडुब्बियां बेचने से हिचक नहीं दिखाई। चीन भारत के आसपास के देशों को अपने सुरक्षा घेरे में लेने की रणनीति पर जिस तरह काम कर रहा है उसी तरह की रणनीति भारतीय रक्षा कर्णधारों को भी अपनानी चाहिये।  जैसे चीन  भारत के पडोसी देशों के बीच भारत को लेकर भय पैदा कर उन्हें  आधुनिक संवेदनशील हथियारों की बिक्री करता है उसी तरह भारत को भी चीन के पडोसी मंगोलिया. वियतनाम, और दक्षिण चीन सागर के तटीय देशों को अपने नवीनतम सैनिक साज सामान की सप्लाई कर चीन पर उसी तरह का सामरिक दबाव बनाने की रणनीति बहुत पहले ही अपनानी चाहिये थी।

 अब जब कि चीन ने भारत के सीमांत जमीनी इलाकों को धोखे से हडप लेने में कोई हिचक नहीं दिखाई है भारत के लिये अब मौका है कि चीन को संदेश देने के लिये  भारत भी चीन के सागरीय और जमीनी पडोसी देशों को आधुनिक हथियारों  और मिसाइलों का निर्यात शुरु कर दे। इंडोनेशिया, वियतनाम जैसे देशों की सेनाएं जब ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस होंगी तो  चीन बीच सागर में इन देशों की मछलीमार नौकाओं को यह कर  नुकसान पहुंचाने की हिम्मत नहीं कर सकेगा कि वे चीन के सागरीय इलाके में विचरण कर रही हैं।

 वास्तव मं ब्रह्मोस मिसाइलों की रणनीतिक से अधिक सामरिक अहमियत है और इसी वजह से भारत को  ब्रह्मोस मिसाइलों को चीन के पडोसी देशों को बेचकर  अपनी समर नीति को मजबूती देनी चाहिये। चीन को  जब  यह संदेश मिलेगा कि भारत भी चीन की तरह   उसके पडोसी देशों को आधुनिक हथियारों की सप्लाई कर सकता है तो चीन भारत के पडोसी देशों को परमाणु मिसाइलों से लेकर पनडुब्बियों की सप्लाई  करने  के दुष्परिणामों के बारे में सोचेगा।

  ब्रह्मोस मिसाइलों की कोई काट चीनी सेना के पास नहीं है इसलिये जब चीन का कोई प्रतिद्वंद्वी देश इन मिसाइलों से लैस होगा तो चीन के लिये यह चिंता की बात होगी। इसीलिये चीन रुस पर यह दबाव डालता रहा है कि वह ब्रह्मोस मिसाइलों के तीसरे देश को निर्यात की अनुमति नहीं दे। लेकिन  चीन के इस दबाव के बावजूद रूस ने  ब्रह्मोस मिसाइलों  के तीसरे देशों को निर्यात की अनुमति भारत रुस संयुक्त कम्पनी को दी है तो यह भारत की राजनयिक विजय कही जानी चाहिये। चूंकि  ब्रह्मोस मिसाइलों का साझा उत्पादन भारत औऱ रूस की संयुक्त कम्पनियों द्वारा  किया जाता है इसलिये चीन ने रूस  से कहा था कि वह चीन के विरोधी देशों को इन मिसाइलों के निर्यात की अनुमति नहीं दे।

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