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समर नीति: नए नक्शे के पीछे इमरान की चाल

पाक पीएम इमरान खान
फाइल फोटो

नेपाल के नक्शेकदम पर चलते हुए पाकिस्तान ने भी अपने देश का नया राजनीतिक  नक्शा जारी किया है।  पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को लगा कि जैसे  अपने देश में हर मोर्चे पर नाकाम रहे प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने भारत के साथ प्रादेशिक विवाद  छेड कर जनता में लोकप्रिय होने की कोशिश की वैसी ही कोशिश के जरिये  वह अपने देश में भी अपनी गिरती साख को बचा सकते हैं।  भारत के साथ इस तरह का विवाद खडा करने के पीछे  भारत से दुश्मनी पैदा करने की चाल किस देश की हो सकती है यह हम अच्छे से समझ  सकते हैं।  प्रादेशिक विवाद ऐसा मसला है जिसे लेकर किसी भी देश में राजनीतिक सर्वानुमति बन जाती है और वहां का नेता इसी आधार पर सत्ता पर अपनी पकड मजबूत करने की कोशिश करता है।





 वास्तव में भारत के पडोसी देशों में भारत के प्रादेशिक इलाकों को अपने देश का बताकर उन्हें राष्ट्रीय स्वाभिमान से जोडने की होड सी चल पडी है। इन देशों का राजनीतिक नेतृत्व देख रहा है कि घरेलू समस्याओं से अपनी जनता का ध्यान बंटाने का यह एक अच्छा जरिया हो सकता है। पडोसी देश के इलाके को अपना बताकर अपने देश में भावनाओं की लहर पैदा करना आसान है और उसे इन सरकारों द्वारा इस तरह पेश किया जाता है कि वे अपने देश की सम्प्रभुता की किस तरह रक्षा कर रहे हैं।  नेपाल ने यही चाल चली थी। जब वहां के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली  की सत्ता को अपने सहयोगी दलों से चुनौती मिलने लगी तो उन्होंने अपने देश में अपनी लोकप्रियता सिद्ध करने के  लिये भारत के साथ प्रादेशिक विवाद खडा किया। नेपाल ने लिपुलेख के इलाके को अपना बताकर अपने देश का नया राजनीतिक नक्शा जारी कर दिया और इसे लेकर देश भर में जनता की वाहवाही लूटने की कोशिश की कि वही देश की  सम्प्रभुता बचाने में सक्षम हैं। रोचक बात यह है कि नेपाल ने इस राजनीतिक नक्शे की प्रति संयुक्त राष्ट्र में दर्ज्ञ करने की कोशिश की लेकिन संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया।

 पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने देश का जो नया राजनीतिक नक्शा जारी किया है उसमें भारतीय  जम्मू-कश्मीर, सियाचिन , गुजरात का जूनागढ और लद्दाख का इलाका दर्शाया गया  है। स्वाभाविक है कि भारत द्वारा इस तरह की हरकतों को कडा जवाब दिया जाता। इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि हमने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा जारी कथित राजनीतिक नक्शे को देखा है।  विदेश मंत्रालय ने ठीक ही कहा है कि   भारतीय  प्रदेशों गुजरात और  जम्मू कश्मीर व लद्दाख के इलाकों को अपना बताना राजनीतिक  बकवास है।  इन हास्यास्पद दावों की न तो कोई वैधानिक वैधता है और  ने ही अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता औऱ मान्यता। वास्तव में पाकिस्तान की ताजा चाल यह दर्शाती है कि वह आतंकवाद के जरिये अपने प्रादेशिक इलाके का विस्तार करना चाहता है। यह महज संयोग नहीं है कि पाकिस्तान द्वारा नया राजनीतिक मानचित्र जारी करने के बाद चीन ने भी अपने ताजा बयान में कहा कि पिछले साल पांच अगस्त को भारत ने लद्दाख  और जम्मू कश्मीर इलाके को लेकर जो कदम उठाया है चीन उसे वैध नहीं मानता है।

  भारत के साथ प्रादेशिक विवाद पैदा कर उसे एकतरफा सुलझाने की पाकिस्तान और नेपाल की चालें दुनिया समझ चुकी है। ऐसा कर भारत के साथ रिश्तों को प्रभावित किया जा सकता है और इन देशों में भारत के खिलाफ भावनाएं  उग्र होने लगती हैं तो इसका फायदा भारत के  इन देशों की सरकारों  को मिलने लगता है। भारत के साथ सीमा विवाद को सैनिक तनातनी का रुप देकर भी चीन को लग रहा है कि उसकी चाल नहीं कामयाब हो रही तो उसने भारत के पडोसी देशों को इस तरह की साजिशें सिखा कर भारत के खिलाफ दुश्मनी की भावना पैदा करने को उकसाया है ताकि भारत अपने पडोसी देशों के साथ   पारम्परिक दोस्ती को गहराई नहीं दे सके।

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