vishesh

समर नीति: इमरान का नया पाकिस्तान कैसे बनेगा ?

इमरान खान

पाकिस्तान में जनतांत्रिक चुनावों के बाद नये प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक नया पाकिस्तान बनाने की बात कही है। पाकिस्तान का नया प्रधानमंत्री नया पाकिस्तान बना पाएगा या नहीं यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह पाकिस्तान को विकास के पथ पर किस तरह लाने में कामयाब होता है।  विडम्बना यह है कि पाकिस्तान में धन अर्जित करने वाले जो कारखाने चल रहे हैं वे आतंकवाद के कारखाने हैं जहां आतंकवादी पैदा किये जाते हैं जो पाकिस्तान के सामरिक हितों की पूर्ति के लिये अफगानिस्तान या भारत जैसे पड़ोसी देशों में भेजे जाते हैं। इसके अलावा पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार काफी हद तक आतंकवाद के नाम पर अमेरिका जैसे देशों से ली गई फिरौती की बदौलत भरा जाता रहा है। आतंकवाद को खत्म करने के नाम पर पाकिस्तान अमेरिका और साथी देशों से सैनिक और वित्तीय सहायता लेता है। ये देश पाकिस्तान में पैदा आतंकवाद से डर कर पाकिस्तान को आर्थिक मदद देते हैं ताकि उनके देशों पर आतंकवादी हमले नहीं हों। पिछले दशक के शुरू से अब तक पाकिस्तान को आतंकवाद से मुक्त करने के लिये अमेरिका ने पाकिस्तान को 30 अरब डालर से अधिक की राशि दी है लेकिन पाकिस्तान के रुख पर इसका कोई सकारात्मक असर पड़ता नहीं देख कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को कड़ा बायान देना पड़ा कि पाकिस्तान ने अमेरिका से मिली मदद के जवाब में केवल झूठ और धोखा ही दिया है।





पाकिस्तान में जब तक आतंकवाद की फैक्टरी चलती रहेगी तब तक वहां विकास का कारखाना कैसे फलफूल सकता है। मौजूदा पाकिस्तान को नया पाकिस्तान बनाने के लिये वहां विकास की फैक्टरी चलानी होगी। लेकिन आतंकवाद और विकास की फैक्टरी एक साथ नहीं चल सकती क्योंकि जब विदेशी और घरेलू निवेशकों को लगेगा कि आतंकवाद के कारखानों के बगल में विकास के कारखाने नहीं चल सकते तब तक वहां विकास के कारखाने कैसे लगेंगे। अब यदि पाकिस्तान को विकास का कारखाना लगाना है तो आतंकवादी और जेहादी गुटों के कारखाने बंद करने होंगे। सवाल यह उठता है कि आतंकवादी तत्वों का पोषण करने वाली जिस सेना की बदौलत और जिन जेहादी ताकतों से मदद लेकर इमरान ने चुनाव जीते हैं क्या वे इमरान को आतंकवाद का कारखाना बंद करने की अनुमति देंगे।

अपने देश के विकास के लिये इमरान खान की जो आकांक्षा है वह तब तक पूरी नहीं होगी जब तक वह आतंकवादी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई कर उनका सफाया नहीं करते। आतंक से मुक्त माहौल में ही पाकिस्तान में सामान्य आर्थिक गतिविधियों को बहाल किया जा सकता है और तभी मौजूदा पाकिस्तान को एक नए पाकिस्तान की शक्ल दी जा सकती है। इसके लिये जरूरी है कि वह पाकिस्तानी सेना दवारा पोषित आतंकवादी संगठनों लश्कर ए तैयबा, जैश ए मुहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन आदि को अपनी धरती से भारत विरोधी हरकतें करने से रोकें। लेकिन ऐसा करने से पाकिस्तान की जम्मू-कश्मीर रणनीति को भारी धक्का लगेगा और भारत के खिलाफ एक बड़ा हथियार वह खो देंगे। पाकिस्तानी सेना इसकी इजाजत कतई नहीं देगी।

इमरान खान ने भारत के साथ सम्बन्धों को सामान्य बनाने के लिये सबसे पहले जम्मू-कश्मीर मसले के हल के लिये बातचीत और व्यापार बहाल करने का प्रस्ताव किया है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इमरान खान को लिखे अपने खत में पाकिस्तान के साथ रचनात्मक सम्बन्धों की बात कही है।  लेकिन इमरान खान चाहते हैं कि जल्दी से जम्मू-कश्मीर का मसला पाकिस्तान के पक्ष में हलकर अपने देश को नया पाकिस्तान बनाने की दिशा में आगे कदम बढ़ाएं।

पाकिस्तान के नये नेता को समझना होगा कि भारत अपने मौजूदा हिस्से वाले जम्मू-कश्मीर के इलाके को कतई पाकिस्तान को नहीं सौंपने वाला। इसका अर्थ यह हुआ कि पाकिस्तान जब तक जम्मू-कश्मीर का मसला हल नहीं कर लेता तब तक वह भारत को झुकाने के लिये भारत के खिलाफ कम तीव्रता वाला युद्ध लड़ने के लिये आतंकवादियों का इस्तेमाल करता रहेगा। यानी इमरान खान की प्राथमिकता पाकिस्तान को नया पाकिस्तान बनाने की नहीं यथास्थिति को बनाए रख खुद को सत्ता में आरूढ़ रहने की ज्यादा लगती है।

 

Comments

Most Popular

To Top