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समर नीति: हिंद महासागर के द्वीप देश के साथ रिश्ते गहरे करने का फैसला

हिंद महासागर पर चाइना का नजर

भारत का आंगन माने जाने वाले हिंद महासागर के द्वीप देशों के साथ चीन द्वारा विशेष सामरिक रिश्ते स्थापित करने की कोशिशों के मद्देनजर भारतीय सामरिक कर्णधारों ने देर से ही सही एक उचित पहल करते हुए द्वीप देशों के साथ रिश्ते गहरे करने का फैसला किया है। हिंद महासागर में अपनी पैठ गहरी करने और अफ्रीकी देशों के साथ अपने सामरिक औऱ आर्थिक रिश्ते गहरे करने की चीन की लम्बे अर्से से रणनीति लागू हो रही है । इन द्वीप देशों पर उसका प्रभाव इसी से समझा जा सकता है कि सेशल्स ने अपने एजम्शन द्वीप पर भारत को नौसैनिक सुविधाएं विकसित करने से रोका हुआ है।





सेशल्स के अलावा मडगास्कर , मेयोते और मारीशस हिंद महासागर के वनीला द्वीप कहे जाते हैं और इनके साथ रिश्ते गहरे करने के लिये विदेश मंत्रालय में हिंद महासागर विभाग के तहत अब तक श्रीलंका, मालदीव, मारीशस और सेशल्स को रखा था लेकिन अब इस विभाग के तहत मैडगास्कर, कोमोरोस और फ्रेंच रियूनियन को भी शामिल करने का फैसला किया है। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने मैडगास्कर से रक्षा औऱ सामरिक रिश्ते गहरे करने के लिये वहां एक डिफेंस अताशे भी तैनात करने का फैसला लिया है। गौरतलब है कि मैडगास्कर में चीन ने अपनी नौसैनिक सुविधाएं स्थापित करने की पहल की है।

चीन की इन कोशिशों की काट के लिये भारत ने मैडगास्कर के लिये सद्भावना दौरे पर भारतीय कोस्ट गार्ड का एक पोत भेजा है। अन्य द्वीप देशों के साथ भी कोस्ट गार्ड के जरिये समुद्री रिश्ते स्थापित करने की योजना है। सबसे अहम यह है कि भारत हिंद महासागर के वनीला द्वीप देशों के राष्ट्रप्रमुखों के साथ शिखर बैठक भी आय़ोजित करने की योजना बना चुका है।

कोमोरोस द्वीप पर भारत की ओऱ से अब तक हुए सबसे उच्चस्तरीय दौरे में भारत ने अपने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को गत अक्टूबर माह में भेजा गया। हाल में ही तूफान से पीडित इन द्वीप देशों के लिये अपने राहत पोत भेजकर सद्भावना अर्जित की थी।

हिंद महासागर के ये द्वीप देश चीन की नजर में इसलिये हैं कि इस इलाके को वह अफ्रीका के प्रवेश द्वार के तौर पर मानता है। इसलिये चीन इन द्वीप देशों पर अपनी नौसैनिक सुविधाएं स्थापित करना चाह रहा है। चीन इन गरीब द्वीप देशों के साथ अपनी चेकबुक कूटनीति के जरिये रिश्ते गहरे करने की रणनीति पर चल रहा है। भारत को भी देखना होगा कि चीन की चेकबुक कूटनीति की क्या काट हो सकती है। अहम बात यह है कि ये द्वीप देश भारत के ही स्वाभाविक साथी कहे जा सकते हैं लेकिन भारत ने इन रिश्तों का अब तक समुचित तरीके से दोहन नहीं किया।

हालांकि भारत ने इन द्वीप देशों के साथ समुद्री रिश्ते गहरे करने के लिये इंडियन ओसन नेवल सिम्पोजियम (आयंस) जैसी कई क्षेत्रीय पहल की है औऱ इंडियन ओसन रिम एसोसियेशन के जरिये भी इन्हें एक मंच पर लाने की कोशिश की है लेकिन इसके बावजूद चीन ने इन सब निर्धन द्वीप देशों के साथ अपनी चेकबुक कूटनीति के जरिये रिश्ते गहरे करने में कामयाबी पा ली है। जैसा कि हम श्रीलंका के साथ चीन द्वारा सामरिक रिश्तों को मजबूत होते देख रहे हैं। मालदीव में सत्ता परिवर्तन की वजह से भारत को कुछ राहत मिली है कि नये शासक चीन के साथ रिश्तों को पहले की तरह अहमियत नहीं देंगे। मालदीव और श्रीलंका दोनों भारत के सबसे नजदीकी पडोसी द्वीप देश हैं जिनके सत्तारुढ़ नेताओं के साथ चीन ने निजी और सरकारी तौर पर रिश्ते बनाने में कामयाबी पा ली थी यही वजह है कि चीन ने इन द्वीप देशों को पूरी तरह अपने प्रभुत्व में करने में कामयाबी पा ली थी लेकिन राहत की बात है कि श्रीलंका का नया नेतृत्व चीन की रणनीति को लेकर सतर्क है और वह भारत को आश्वस्त कर रहा है कि चीन से रिश्ते ऐसे नहीं होंगे कि उससे भारत को सामरिक तौर पर किसी तरह की कोई चिंता हो।

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