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समर नीति- चोट खाए सांप की तरह चीन

इंडो-चाइना आर्मी

भारत सिक्किम सीमा पर भूटान के दावे वाले डोकलाम इलाके को चीन ने अपना बता कर वहां अपनी सैनिक तैनाती में असाधारण बढ़ोतरी कर दी है। लगता है कि चीन चोट खाए सांप की तरह फुफकार रहा है और वह किसी भी वक्त भारत को डसने को तैयार बैठा है। पिछले साल जून से अगस्त के दौरान चीन और भारत की सेना 73 दिनों तक आमने-सामने तैनात रही। भारत द्वारा चीन को वहां से पीछे हटने को विवश करने के बाद चीन इसे अपने अपमान के तौर पर ले रहा है और अब जबकि उस पर ब्रिक्स शिखर बैठक का आयोजन रद्द होने का कोई राजनयिक दबाव नहीं रहा वह भारत के सामने फिर गुर्राने लगा है। डोकलाम के इलाके से हो कर चीन चुम्बी घाटी तक सड़क बनाना चाहता था जिसे भारतीय सेना रोकने में कामयाब रही। चीन के लिये यह भारी अपमानजनक बात थी क्योंकि वह अपने को न केवल इस क्षेत्र बल्कि पूरी दुनिया का दादा समझने लगा है जो दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद महासागर तक अपना प्रभुत्व स्थापित करने की जुगत में है। चीन समझ रहा है कि भारत ही ऐसा अकेला देश है जो केवल बयानबाजी के जरिये नहीं बल्कि चीन के सामरिक मंसूबों को जमीनी कार्रवाई के जरिये चुनौती दे रहा है।





डोकलाम में अपनी सैन्य तैनाती में भारी बढ़ोतरी को लेकर चीन ने जो बयान दिया है उससे लगता है कि न केवल साल 2018 बल्कि आने वाले कई सालों तक डोकलाम भारत औऱ चीन के सैनिकों के बीच दंगल का एक नया मैदान बनेगा। चीन की इस चुनौती का मुकाबला करने के लिये भारत ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई कूटनीतिक चालें चली हैं जो चीन के सामरिक जगत में चिंता पैदा कर रही है। इसमें एक अहम कदम हिंद प्रशांत के इलाके में शांति व सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये अमेरिका और साथी देशों के क्लब में भारत द्वारा शामिल होना। अमेरिका, आस्ट्रेलिया और जापान के साथ एकजुट हो कर भारत चर्तुपक्षीय गुट में शामिल हो गया है जो खुलेआम चीन को विस्तारवादी बता कर उसके द्वारा पेश चुनौतियों से मुकाबला करने के लिये सामरिक साझेदारी की बात कर रहा है। यह कह कर कि चीन समुद्री कानूनों का पालन करे और एक नियम आधारित व्यवस्था को माने भारत और इसके साझेदार देश चीन को आगाह कर रहे हैं कि चीन अपनी प्रादेशिक सीमओं का विस्तार करने के लिये एकतरफा कदम नहीं उठाए। चीन के खिलाफ भारत और साथी देश जिस तरह लामबंद हो रहे हैं वह चीन को नागवार गुजर रहा है। इसलिये चीन के शासक सीमाओं पर भारत पर सैन्य दबाव बनाने की रणनीति पर चल रहे हैं ताकि भारतीय सेना को वहां अपने पूरे सैन्य संसाधन झोंकने को मजबूर होना पड़े। इस तरह भारत पर सामरिक और आर्थिक दबाव बढाकर चीन भारत को विकास के पथ से भटकाना चाहता है।

चीन की इस चाल को काटने के लिये भारत को भी अपने को सैनिक और आर्थिक तौर पर इतना मजबूत बनाना होगा कि चीन भारत से लगी करीब 4000 किलोमीटर लम्बी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत के  खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई करने के पहले कई बार सोचे। डोकलाम में चीन का उकसावे वाला कदम भारत के लिये एक नई चुनौती है जिससे भारत को निबटने के लिये अपनी सैन्य तैयारी में भारी इजाफा करना होगा।

 

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