vishesh

समर नीति: युद्ध के लिए उकसा रहा है चीन

चीन ने किया सड़क का निर्माण
फाइल फोटो

पूर्वी लद्दाख के सीमांत इलाकों में चीनी सैन्य घुसपैठ औऱ भारी सैन्य तैनाती से पैदा सैन्य तनातनी को खत्म करने के लिये दोनों देशों के बीच उच्च्स्तरीय राजनीतिक, राजनयिक और सैनिक स्तर की कई दौर की वार्ताएं पिछले चार महीनों के दौरान हो चुकी है। इन वार्ताओं के बावजूद भारत और चीन के बीच तनाव घटने के बदले बढता ही गया है। साफ है कि चीनी पक्ष भारत के साथ बातचीत को जारी रखने के बहाने सीमांत इलाकों में अपनी सैन्य मौजूदगी और तैनाती को और मजबूत करने की रणनीति पर चल रहा है। सितम्बर के शुरु में भारत और चीन के रक्षा और विदेश मंत्रियों की मास्को में चीनी विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच दो उच्चस्तरीय राजनीतिक वार्ताओं के नतीजे काफी निराशाजनक कहे जा सकते हैं।





पूर्वी लद्दाख के सीमांत इलाके में पांच मई से पहले की यथास्थिति बहाल करने के लिये चीन पर भारत का दबाव कारगर नहीं साबित हो रहा है। शायद चीन को लग रहा है कि भारत युद्ध ल़डने या चीन के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई कर चीनी सेना को कब्जे वाले भारतीय इलाकों से बेदखल करने की स्थिति में नहीं है।

चीनी सेना ने गत पांच मई को पहली बार पूर्वी लद्दाख के कई इलाकों में घुसपैठ की थी और तब से दोनों देशों के बीच पांच दौर की राजनयिक और पांच दौर की सैन्य कमांडर वार्ताएं हो चुकी हैं । शुरुआती दौर की इन वार्ताओं में चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा तक अपने सैनिक पीछे ले जाने पर सहमति दिखाई थी लेकिन बाद में वह न केवल मुकरता गया बल्कि अपनी घुसपैठ और अतिक्रमण की कार्रवाई और मजबूत करता गया।

चीन के इस रवैये से भारत को यह बडा सबक मिला है कि उसकी कथनी और करनी में भारी फर्क है और उसके वादों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इसीलिये भविष्य में चीन के किसी भी प्रस्ताव को भारत को काफी सोच समझ कर स्वीकार करना होगा।

मास्को में चार सितम्बर को चीन के रक्षा मंत्री की भारतीय रक्षा मंत्री से बातचीत चीनी पहल पर ही हुई थी जिससे उम्मीद बन रही थी कि चीन सीमांत इलाकों में तनाव दूर करने के लिये कुछ सकारात्मक कदम उठाने का प्रस्ताव रखेगा लेकिन दोनों के बीच दो घंटा 20 मिनट तक चली बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला। इसी तरह दस सितम्बर को मास्को में चीनी विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश मंत्री से बातचीत का प्रस्ताव रखा तो भारतीय पक्ष ने इस उम्मीद में निमंत्रण स्वीकार किया कि चीन तनाव घटाने को उत्सुक लग रहा है। लेकिन चीन के रवैये से अब यह साफ हो गया है कि उसने एक दीर्घकालीन समर नीति के तहत लद्दाख के भारतीय इलाके में घुसपैठ और अतिक्रमण किया है जिसे भारतीय सेना तभी निरस्त कर सकती है जब चीन के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई की जाए।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत और चीन के बीच राजनयिक रिश्तों की स्थापना की 70 वीं सालगिरह के मौके पर चीन ने भारत के भूभाग पर अपनी बुरी निगाह लगा कर भारत के साथ तनाव मोल लिया है। चीन देख रहा है कि कोरोना महामारी की चपेट में आया भारत बदतर आर्थिक हालात के बीच चीन से सैन्य टकराव मोल लेने को तैयार नहीं होगा। लेकिन सितम्बर के शुरु में रक्षा और विदेश मंत्रियों की वार्ता में भारत ने चीन को जिस तरह अपने राष्ट्रीय संकल्प का साफ संदेश दिया है उससे चीन को यह समझ लेना चाहिये कि भारत युद्ध की धमकियों से डरने वाला नहीं। भारत अपनी प्रादेशिक अखंडता की रक्षा के लिये कृतसंकल्प है और इसके लिये वह चीन की किसी सैन्य चेतावनी को झेलने के लिये तैयार है। पूर्वी लद्दाख के सीमांत इलाकों में चीनी सेना को बेदखल करने और उसे वास्तविक नियंत्रण रेखा तक पीछे जाने के लिये मजबूर करने के इरादे से भारतीय सेना पूरी तरह तैयार हो चुकी है।

Comments

Most Popular

To Top