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समर नीति: कोरोना का दाग अपने दामन पर नहीं चाहता चीन

फाइल फोटो

कोरोना वायरस की वजह से दुनिया भर में फैली तबाही के मसले पर चर्चा के लिये संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की मांग को चीन ने अमल में नहीं आने दे कर चोर की दाढी में तिनका वाली कहावत सिद्ध की है। चीन नहीं चाहता कि कोरोना वायरस फैलने की जिम्मेदारी चीन पर डाली जाए। लेकिन इसके बावजूद भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-20 के शिखर नेताओं के वीडियो सम्मेलन में सुंयुक्त राष्ट्र की संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन ( डब्ल्यूएचओ ) की कार्य प्रणाली में सुधार की मांग कर अप्रत्यक्ष तौर पर न केवल चीन को कठघरे में खड़ा किया है बल्कि डब्ल्यू एच ओ की विश्वनीयता को शक के घेरे में डाल दिया है।





20 विकसित और विकासशील देशों के संगठन जी- 20 में प्रधानमंक्षी नरेन्द्र मोदी ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के शिखर नेताओं के वीडियो सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस प्रस्ताव को राजननयिक और सामरिक हलकों में नजरअंदाज कर दिया गया कि संयुक्त राष्ट्र के तहत काम करने वाली संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन की कार्यप्रणाली में सुधार किया जाए और इसे कोरोना जैसी विश्व महामारी से निबटने में और सक्षम बनाया जाए। वास्त्व में चीन इस बात को लेकर काफी चिंतित है कि पूरी दुनिया में कोरोना महामारी के फैलने के लिये चीन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाए। इसके लिये वह अमेरिका और भारत सहित सभी देशों से कह रहा है कि कोरोना वायरस को चीन या ऊहान वायरस के नाम से नहीं पुकारे।

कोरोना वायरस को चीन के अन्य शहरों में फैलने से तो चीन रोकने में कामयाब रहा लेकिन यदि वह वक्त रहते ऊहान शहर में ही एहतियाती कदम उठा लेता तो कोरोना पूरी दुनिया को अपनी चपेट में नहीं लेता। लेकिन चीन ने शुरुआती दौर में अपनी छवि खराब होने से बचने के लिये विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी अपने प्रभाव में ले लिया और उसे न केवल कोरोना के बारे में गम्भीर कदम उठाने से रोका बल्कि चीन के दवाब में इसे वैश्विक महामारी बताने से रोका।

स्वाभाविक था कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की कार्य्प्रपणाली पर भारत सवालिया निशान लगाता। लेकिन सबसे बडा सवाल यह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों सहित बाकी दुनिया भी क्यों चुप है ? महामारियां किसी देश की सीमा को नहीं पहचानती इसलिये जरुरी है कि महामारियों से निबटने के लिये संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य मसलों की देखभाल करने वाली संस्था को इतना ताकतवर बनाया जाए कि वह अपने स्तर पर किसी देश से कह सके कि महामारी से बचने के लिये क्या कदम उठाए जाने जरुरी है।

वास्तव में डब्ल्यू एच ओ के प्रमुख टेड्रोस अधेनोम पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने कोरोना वायरस से निबटने के लिये चीन सरकार के प्रयासों की सराहना भी की और इस तरह कोरोना वायरस को चीन से बाहर फैलने से रोकने में नाकाम रहे। चीन यदि शुरु में ही कोरोना वायरस को फैलने से रोकने की जरुरी कार्रवाई कर लेता तो यह वायरस आज पूरी दुनिया पर कहर नहीं ढा रहा होता। चीन की लापरवाही से विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा नजरें चुराना एक अंतराष्ट्रीय अपराध ही कहा जा सकता है। इस लापरवाही की वजह से न केवल दुनिया में करोड़ों लोग भुखमरी के शिकार हुए हें बल्कि देशों की अर्थव्यस्था भी आने वाले कई सालों तक कराहती रहेगी। इसका हर्जाना कौन भरेगा हालांकि अमेरिका की एक गैर सरकारी संस्था ने एक अमेरिकी अदालत में चीन पर 30 ट्रिलियन डालर का जुर्माना अदा करने वाली याचिका दायर कर चीन को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है।

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