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समर नीति: गिलगिट का मौसम भी जानें

गिलगिट
फाइल फोटो

जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा दर्शाने के लिये भारत ने जब एक और अहम कदम उठाया तो पाकिस्तान को तेज मिर्ची लगी। भारत का ताजा कदम पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर औऱ इसके उत्तरी इलाकों में स्थित गिलगिट-बालटिस्टान के मौसम के ताजा हाल की जानकारी भारतीय रेडियो और टेलीविजन की बुलेटिन में शामिल करने का है। भारत का यह कदम इसलिये तार्किक है कि जब भारत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और गिलगिट- बालटिस्टान के इलाके को अपना हिस्सा मानता है तो उस इलाके के मौसम की जानकारी भी उसी तरह देनी चाहिये जैसे कि भारत अरुणाचल प्रदेश सहित देश के बाकी हिस्सों के मौसम की भविष्यवाणी की जानकारी देता है।





गौरतलब है कि भारत ने पिछले साल पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर को भारतीय संविधान के तहत धारा-370 के प्रावधान को रद्द कर दिया था और पूरे प्रदेश को दो केन्द्र शासित प्रदेशों लद्दाख व जम्मू व कश्मीर में बांट कर पूरे इलाके की नई प्रशासनिक भूमिका स्थापित की थी। पाकिस्तान ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी और आज तक वह इसे पचा नहीं पाया है। यही वजह है कि वह जम्मू कश्मीर में आंतंकवादी घुसपैठ को बढा रहा है ताकि पूरा जम्मू कश्मीर अस्थिर दिखाई दे और उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ हंगामा करने का बहाना मिले।

भारत के ताजा ऐलान के बाद पाकिस्तान ने कहा है कि भारत का यह कदम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का हनन करने वाला है। पाकिस्तान ने कहा है कि भारत द्वारा कोई भी ऐसा कदम जम्मू कश्मीर के विवादास्पद दर्जे को नहीं बदल सकता। लेकिन भारत ने पिछले साल अगस्त में धारा 370 को निरस्त करने वाले कदम के बाद दुनिया को यह बताने की कोशिश की है कि पाकिस्तान ने ही गैरकानूनी तौर पर जम्मु कश्मीर के एक तिहाई हिस्से पर कब्जा कर रखा है जिसे खाली करवाना भारत का लक्ष्य हमेशा रहेगा।

गिलगिट- बालटिस्टान इलाके को अपने देश में विलय करने के लिये पाकिस्तान पिछले दशकों से संवैधानिक संशोधन के कदम उठाता रहा है। गिलगिट बालटिस्टान के लोग हमेशा से पाकिस्तान के कदमों का विरोध करते रहे हैं लेकिन पाकिस्तान इनकी आवाज को बेरहमी से कुचलता रहा है। हाल में ही गत 30 अप्रैल को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान सरकार को इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी कि वह गिलगिट बालटिस्टान इलाके में चुनाव करवा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में गिलगिट- बालटिस्टान इलाके मे चुनाव होने तक एक अंतरिम सरकार के गठन की सिफारिश की गई है। ये चुनाव आगामी सितम्बर में तय करने की योजना पाकिस्तान सरकार ने घोषित की है। गौरतलब है कि जनवरी, 2019 में पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पाकिस्तान सरकार गिलगिट बालटिस्टान प्रशासन सुधार विधेय़क-2019 को संसद में पारित कर दे। वास्तव में पाकिस्तान सरकार ने 2009 में ही गिलगिट बालटिस्टान के इलाके के स्व -शासन के प्रस्ताव को जम्मू कश्मीर के हिस्से के तौर पर लागू करने का फैसला किया था।। तब जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसियेशन के अध्यक्ष मियां कयूम ने इसका विरोध करते हए कहा था कि जब तक संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरुप जम्मू कश्मीर मसले का हल नहीं निकल जाता है तबतक न तो पाकिस्तान और न ही भारत जम्मू कश्मीर के वैधानिक दर्जे को बदल सकता है। तब तथाकथित आजाद कश्मीर के प्रधानमंत्री सरदार मुहम्मद याकूब ने भी गिलगिट बालटिस्टान लोगों के राजनीतिक अधिकारों का समर्थन किया था। प्रधानमंत्री याकूब ने जम्मु कश्मीर के हिस्सों का दर्जा एकपक्षीय तौर पर बदलने का विरोध किया था। लेकिन पाकिस्तान नहीं माना और अपनी ओर से एकपक्षीय कदम उठाता रहा। इसलिये भारत के लिये भी यह लाजिमी हो जाता है कि 1947 में जम्मू कश्मीर के जिस हिस्से को गैरकानूनी तौर पर बलात कब्जा कर लिया था उसे अपने प्रादेशिक इलाके का अभिन्न हिस्सा बनाने का जरुरी वैधानिक कदम उठाए।

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