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समर नीति: घुसपैठ के 4 महीना- चीनी दादागिरी जारी

चीनी सैनिक
फाइल फोटो

पूर्वी लद्दाख के सीमांत इलाकों में वास्तविक नियंत्रण रेखा को अवैध तरीके से पार करते हुए चीनी सेना ने  भारतीय क्षेत्र के करीब एक हजार वर्ग किलोमीटर इलाके पर कब्जा कर  लिया है और  दादागिरी दिखाते हुए कह रहा है कि उसके सैनिक अपने इलाके में ही हैं। चीन का दावा है कि उसके सैनिक जहां हैं वही  वास्तविक नियंत्रण  रेखा है इसलिये चीन ने  वास्तविक नियंत्रण रेखा की अपनी अवधारणा के अनुरुप अपने सैनिकों को वहां तैनात  किया है।   मास्को में शुक्रवार को भारत और चीन के रक्षा मंत्रियों की बातचीत में चीन ने अपने इसी अडियल रुख का परिचय दिया।





 चीन ने गत पांच मई को पूर्वी लद्दाख के इलाके में घुसपैठ की थी और इसके बाद वह पूर्वी लद्दाख के अन्य इलाकों में घुसपैठ कर भारतीय इलाकों पर कब्जा जमा लिया । भारतीय सेना ने इसे चुनौती  दी तो चीनी सेना ने दादागिरी दिखानी शुरु की और साफ कहा कि उसके सैनिक अपने इलाके में ही हैं।

हालांकि इस मसले पर चीन जब बातचीत के लिये तैयार हुआ तो भारत की इस मांग से सहमति जताई कि चीनी सेना अपनी पुरानी तैनाती की स्थिति पर वापस लौट जाएगी। इस मसले पर भारत और चीन के सीमा मसले पर सलाह मशविरा और तालमेल के लिये गठित  संयुक्त समिति की बैठकों में जिन बातों पर सहमति होती रही उन्हें लागू करने के लिये  दोनों देशों के स्थानीय सैन्य कमांडरों की भी बैठकें हुई। लेकिन  जिन बातों पर सहमति हुई उन्हें जमीन पर उतारने के लिये चीनी पक्ष आनाकानी करता रहा।

 वास्तव में पिछले चार महीनों के दौरान  दोनों देशों के विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर की पांच  दौर की बातचीत हुई और  दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच भी पांच दौर की वार्ताएं हुई लेकिन इनके बावजूद पूर्वी लद्दाख के सीमांत इलाकों पर सैन्य तनातनी बढती ही गई। 15 जून की रात को तो अति हो गई जब गलवान घाटी में चीनी सैनिकों ने  निहत्थे भारतीय सैनिकों को धोखा देते हुए हमला कर दिया  और 20 भारतीय सैनिकों को मौत के घाट  उतार दिया। इसके बाद पांच जुलाई को  बढते तनाव के बाद भारत के राष्ट्रीय  सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री और स्टेट काउंसेलर वांग ई के बीच बातचीत में भी उन्होंने कहा कि चीनी सैनिक वास्तविक नियंत्रण रेखा तक वापस चले जाएंगे औऱ वहां से अपनी भारी सैनिक तैनाती को हटा लेंगे।

 लेकिन चीन का जो रवैया इन वार्ताओं के बाद देखा गया उससे साफ होता है कि चीन की कथनी औऱ करनी में भारी फर्क है। वह मुंह पर कुछ बोलता है औऱ पीठ पीछे कुछ और करता है। साफ है कि चीन की हरकतों और रुख  को उसी की भाषा में जवाब देना होगा। इसी के अनुरुप गत 29-30 अगस्त की रात को भारतीय सैनिकों ने पैंगोंग झील  के  दक्षिणी किनारे के इलाके में 15 हजार फीट उंची चोटियों पर चीनी सैनिकों को पीछे ढकेलते हुए काला टाप और हेलमेट टाप चोटियों पर अपने सैनिक बैठा दिये तो  चीन तिलमिला गया।   गत चार महीनों के दौरान  चीन ने पहली बार आरोप लगाया कि भारत ने ही चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा का उल्लंघन किया है। इस मसले पर बातचीत के लिये चीनी पक्ष ने भारत को बातचीत के लिये आमंत्रित किया।

 साफ है कि जब  भारत ने चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया तो वह जमीनी मोर्चे  को छोडकर टेबल पर बैठने को तैयार हो गया।  भारत ने  कडा तेवर दिखाते हुए चीन के  सौ से अधिक मोबाइल ऐप को प्रतिबंधित कर देने का ऐलान किया। इससे चीन को भारी सद्मा लगा है। चीन पर चहुमुखी प्रहार जिस तरह भारत ने किया है उसकी उम्मीद चीन नहीं कर रहा था। भारतीय सीमा पर चीन ने जो हरकत की है उससे चीन की अंतरराष्ट्रीय विस्तारवादी  छवि और धुंधली हुई है।

 

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