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स्पेशल रिपोर्ट: अमेरिकी चुनाव- बर्नी का युवाओं पर नहीं चला जादू

बर्नी सैंडर्स और जोई बिडेन
फोटो सौजन्य- गूगल

वाशिंगटन से ललित मोहन बंसल

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव- 2020 करोड़ों लोगों के लिए रोचक विषय बना हुआ है। एक ओर रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हैं, जो दूसरी पारी के लिए भाग्य आज़मा रहे हैं। दूसरी ओर डेमोक्रेटिक पार्टी में अभी तक डेढ़ दर्जन संभावित उम्मीदवारों की उठापटक में क़रीब एक वर्ष बाद थोड़ा सा कुहासा छठा है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ आठ वर्षों तक उपराष्ट्रपति पद पर सुशोभित जोई बिडेन ने वरमोंट से सिनेटर बर्नी सैंडर्स को 3 मार्च, सुपर ट्यूज डे मतदान में पछाड़ दिया है। इस पराजय से समाजवादी बर्नी सैंडर्स की उलटी गिनती शुरू हो गई है। राष्ट्रपति चुनाव मंगलवार, 3 नवंबर को होने तय हैं।





क़रीब दो वर्षों तक चलने वाले चुनाव अभियान के प्रारंभिक चरण में डेमोक्रेटिक पार्टी से अधिकृत उम्मीदवारी के लिए पहले चार राज्यों-आयोवा, न्यू हैंप्शायर, नवेडा और साउथ कैरोलाइना में दाँव पर लगे 155 प्रतिनिधि मतों में बर्नी सैंडर्स ने प्रवासी मतों, मूलत: लेटिनों और छात्रों के बल पर आयोवा में कड़े संघर्ष के बाद न्यू हैंप्शायर व लेटिनो बहुल नवेडा जीत कर बढ़त ली थी। उन्हें अश्वेत बहुल राज्य साउथ कैरोलाइना में ऐसी मार पड़ी कि वह इसके अगले महीने 3 मार्च को हुए सुपर ट्यूज़डे में उबर नहीं पाए। अश्वेत मतदाताओं में लोकप्रिय बराक ओबामा के चहेतों और डेमोक्रेटिक पार्टी से बंधे लेटिनो, एशियाई, जिनमें प्रवासी भारतीयों में एक बड़ी संख्या ने जोई बिडेन को दस राज्यों में जीत दिलाई और प्रतिनिधि मतों में बर्नी सैंडर्स से आगे कर दिया। इन 14 राज्यों में से बर्नी सैंडर्स के हाथ कैलिफ़ोर्निया, कोलोराडो और दो नन्हें से राज्यों गृह राज्य वरमोंट और ऊटा आए। कैलिफ़ोनिया में बिडेन को बर्नी सैंडर्स के हाथों पराजय मिली। बिडेन (604), बर्नी (524), एलिज़ाबेथ वारेन (56) और अरबपति माइकल ब्लूमबर्ग (46) प्रतिनिधि मत बटोर पाए। नियमानुसार अधिकृत उम्मीदवार उसे बनाया जाएगा जो कुल 3979 प्रतिनिधि मतों में से 1991 मत बटोर सकेगा।

इस चुनाव में एक ख़ास बात देखने में यह आई कि न्यूयॉर्क वाल स्ट्रीट में स्टाक मार्केट चार फीसदी चढ़ गई। इसका सीधा संदेश यह गया कि अमेरिकी पूंजीवादी एक समाजवादी को झेलने को तैयार नहीं हैं। बिडेन को बराक ओबामा का वरदहस्त प्राप्त है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रति सम्पूर्ण प्रेम के बावजूद प्रवासी भारतीय चिकित्सकों का डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति झुकाव कम नहीं हुआ है। प्रवासी भारतीय चिकित्सकों की सबसे बड़ी संस्था ‘आपी’ ने बिडेन का समर्थन किया है।

बर्नी बनाम बिडेन : इसके बावजूद अधिकृत उम्मीदवारी के लिए रास्ता लंबा है। अगले मंगलवार से सुपर ट्यूज़डे में मिशिगन सहित सात राज्यों में बर्नी बनाम बिडेन मुक़ाबला होगा। श्रम बहुल इस राज्य में डेमोक्रेट गवर्नर ग्रेचेन विट्मर पहले से बिडेन को समर्थन दे चुकी हैं और पोल एक्ज़िट भी बिडेन को सात अंकों की बढ़त दे रहा है। ये सुपर ट्यूज़डे मुक़ाबले अप्रैल-जून तक चलेंगे। जुलाई में मिड वेस्ट के विसकोनसिन राज्य में डेमोक्रेटिक सम्मेलन होगा। इसमें अधिकृत दावेदारी के लिए कुल प्लेजड मतों में से अधिकतम 1991 मतों से दावेदारी सिद्ध करनी होगी। इस दौड़ के लिए बिडेन को पूंजीपतियों से चंदे की मोटी रक़म मिलनी शुरू हो गई है तो बर्नी सैंडर्स एक बार फिर नि:शुल्क उच्च शिक्षा और मेडिकेयर के नाम पर छात्रों और युवाओं को तैयार करने में जूझ रहे हैं। 75 करोड़ डालर व्यय करने वाले अरबपति माइकेल ब्लूमबर्ग ने राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी छोड़कर बिडेन के समर्थन में आ गए हैं तो एलिज़ाबेथ वारेन भी एक वर्ष जूझने के पश्चात बेरंग लौट आई है। हालांकि एलिज़ाबेथ प्रगतिशील होने के नाते बर्नी के ज़्यादा समीप हैं लेकिन उन्होंने अभी तक समर्थन नहीं दिया है। आज बर्नी के ख़िलाफ़ वे सब भारतीय लामबंद हो गए हैं, जो उनके दिल्ली हिंसा में दिए गए वक्तव्य से नाराज़ हैं। बर्नी ने ट्रम्प के भारत दौरे को निरर्थक और दिल्ली हिंसा में हिंदु समुदाय को टारगेट किया था। अब बर्नी समर्थित एक विशेष समुदाय के लोग बिडेन से जुड़े हिंदू समुदाय को तोड़ने में जुट गए हैं।

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