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स्पेशल रिपोर्ट: अफगानिस्तान में शांति वार्ता ‘छलावा’

तालिबान लड़ाके
फोटो सौजन्य- गूगल

वाशिंगटन से ललितमोहन बंसल

अफगानिस्तान में 18 वर्ष से चले आ रहे युद्ध को लेकर एक बार फिर प्रश्न चिन्ह लग गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का ‘थैंक्स गिविंग औऱ अकस्मात अंधेरे में अपने अमरीकी जवानों से मिलकर उनके साथ भोजन करना और वर्ल्ड मीडिया को यह समझाने की कोशिश करना कि क़तर की राजधानी ‘दोहा’ में शांति वार्ता फिर से शुरू हो गई है। इसके ठीक एक सप्ताह बाद काबुल के उत्तर में भारी सुरक्षा दायरे में घिरे अमेरिकी मिलिट्री बेस बगराम सेंटर पर तालिबान के छह लड़ाकों ने विस्फोट से भरे दो वाहनों के साथ सेंटर के क़रीब निर्माणाधीन मेडिकल केन्द्र पर विस्फोट में दो को मौत के घाट उतार दिया।





तालिबान लड़ाकों की कोशिश सेंटर तक पहुंचने की थी। अफ़ग़ानी सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें पहले ही रोक लिया था। उस समय तालिबानी तो हाथ नहीं लगे लेकिन इन तालिबानी लड़ाकों ने यह संदेश देने की ज़रूर कोशिश की कि अमेरिका, सरकार को नाटो और अफ़ग़ानिस्तान की अशरफ़ गनी सरकार जो सोच रही है, वैसा है नहीं। कहा तो यह जाने लगा है कि हम जहां से चले थे वहीं हैं। इसके चंद घंटों में दुनिया भर में गए संदेश के मद्देनज़र अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने मेडिकल सेंटर पर हवाई आक्रमण कर उन सभी छह तालिबानी आतंकवादियों को ढेर कर दिया। अमेरिकी प्रचार तंत्र ने यह दावा तो किया है कि इस तालिबानी विस्फोट हमले में कोई अमेरिकी सैनिक नहीं मारा गया । इसमें जानमाल की क्षति हुई है, वह उस निर्माणाधीन बिल्डिंग में दो लोगों की जानें गई हैं। तालिबान ने शाम होते होते इस की ज़िम्मेदारी भी ले ली। तालिबान प्रवक्ता सहेल शाहिन के छोटे भाई और डिप्टी कमांडर ऐनिस हक्कानी ने इस घटना की ज़िम्मेदारी लेते हुए मीडिया को जानकारी दी कि उन्ही के लड़ाके दो वाहनों में विस्फोट के साथ बगराम सेंटर में घुसना चाहते थे।

यह एक विडम्बना मात्र है। थैंक्स गिविंग़ पर ट्रम्प और प्रथम महिला मेलेनिया ने एयरफ़ोर्स वन नुमा विमान से बारह घंटे के लंबे सफ़र के बाद बेगराम मिलिट्री सेंटर में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति और अमेरिकी कमांडरों और अमेरिकी मीडिया के सम्मुख तीन बड़ी घोषणाएँ की। उन्होंने बताया कि सितंबर की तयशुदा ‘कैम्प डेविड’ वार्ता के औचक रद्द होने के तीन महीने बाद दोहा में शांति वार्ता फिर से शुरू हो गई है, तालिबान हिंसा नहीं करेगा और अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान में अनिश्चितकाल तक थोड़े से सैनिक रखेगा। उन्होंने बातों बातों में कहा कि तालिबानी पहले युद्ध विराम नहीं चाहते थे, अब उन्होंने युद्ध विराम के लिए सहमति जताई है। इस पर लोगों ने राहत की सांस ली थी।

इस पक्ष में सच्चाई कितनी है, इस पर अगले दिनों तालिबान के प्रवक्ता सहेल शाहिन ने ‘टाइम’ से बातचीत में साफ़-साफ़ उगल दिया कि उन्होंने ट्रम्प को ऐसा कोई आश्वासन नहीं दिया है। तालिबानी प्रवक्ता ने कहा है कि उनकी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और नाटो देश जब तक अफ़ग़ानिस्तान से अपनी सारी सेनाएं वापस नहीं बुला लेते है, तब तक शांति वार्ता को लेकर कोई समझौता नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि 7 सितंबर के लिए तयशुदा कैम्प डेविड वार्ता ट्रम्प ने ट्विटर के ज़रिए की थी, अब शांति वार्ता को एक सिरे तक ले जाने की ज़िम्मेदारी भी उन्हें की है। रही बात अशरफ़ गनी सरकार की। वह उसे पहले भी अमेरिकी प्रशासन का पिट्ठू समझता था और आज भी। मालूम हो कि ट्रम्प ने साल 2019 के शुरू में ‘स्टेट आफ यूनियन’ संबोधन में कहा था कि अमेरिका इस कभी ख़त्म न होने वाले युद्ध से निजात पाना चाहते हैं। इसके बाद अभी तक 8,240 अफ़ग़ान नागरिक मारे जा चुके है। अफ़ग़ान मूल के अमेरिका में पले बढ़े राजदूत जलमय ख़लीलजाद पिछले ग्यारह महीनों से इस शांति वार्ता में उलझे हुए हैं।

अफगानिस्तान में पिछले 18 वर्षों से तालिबान और अमेरिका सहित नाटो देशों की सेनाओं के बीच लगातार युद्ध में भारी जानमाल की क्षति पर अग्रणी दैनिक ‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने ख़ुफ़िया रिपोर्ट जारी कर अमेरिकी राजनीति में एक भूचाल खड़ा कर दिया है। यह ख़ुफ़िया रिपोर्ट अमेरिकी कांग्रेस की ओर से तैयार कराई गई थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि पिछले दो दशक में पूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश और बराक ओबामा के अफ़ग़ानिस्तान में बैठे मिलिट्री के बड़े-बड़े जनरल और मिलिट्री अधिकारी व्हाइट हाउस को सुहावनी रिपोर्ट देते हुए ख़ुशनुमा जानकारी देते रहे कि उन्हें लगातार युद्ध में सफलता मिल रही है। इसके विपरीत सच्चाई यह है कि इन 18 सालों में 2,440 अमेरिकी सैनिक खोन और एक खरब डालर खोने के बाद मिला क्या ?

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