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प्राथमिकता बने हवाई अड्डों की सुरक्षा

केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने भारत सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी है जिसमें कहा गया है कि देश के हवाई अड्डों पर आतंकी हमला रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हवाई अड्डों की सुरक्षा संबंधित राज्य पुलिस की प्राथमिकता में नहीं है। इन तथ्यों को उजागर करती यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है। आज भारत समेत दुनिया के तमाम मुल्कों में आंतक का खतरा मंडरा रहा है। कई देशों में यह गुपचुप तरीके से अपने पांव पसारने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहा। भारत भी कई वर्षों से आतंकवादी घटनाओं से दो-चार हो रहा है औऱ इससे निपटने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब देश के महत्वपूर्ण ठिकाने और स्थान आंतकवादियों के निशाने पर हैं तो उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं हैं ? फिर चाहे देशभर के 100 ऑपरेशनल एयरपोर्ट्स हों अथवा अन्य महत्वपूर्ण स्थल।





अमूमन भीड़भाड़ वाले इलाके अथवा स्थल चाहे रेलवे स्टेशन हों, बस अड्डे या हवाई अड्डे आतंकवादियों के निशाने पर होते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि यहां वारदात को अंजाम देकर वे अपनी कामयाबी की इबारत लिखें। बीते वर्षों में हवाई अड्डों में उन्होंने कुछ वारदातों को अंजाम दिया भी है। ऐसे में जरूरी है कि CISF की इस रिपोर्ट पर अक्षरशः पालन हो। मामला यात्रियों की संरक्षा-सुरक्षा का तो है ही, देश की प्रतिष्ठा का भी है। CISF की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि हवाई अड्डे पर आतंकी हमले को रोकना इसलिए चुनौतीपूर्ण है क्योंकि शहर की ओर से बड़ी संख्या में लोग प्रवेश करते हैं जिसमें आतंकवादियों की पहचान करना मुश्किल होता है। लिहाजा शहर की ओर से सुरक्षा घेरे को मजबूत करने के लिए 4,000 से अधिक जवानों की जरूरत है।

ऐसे में गृह मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय को सौंपी गई इस रिपोर्ट पर तत्काल अमल करने की आवश्यकता है। CISF बड़ी मुस्तैदी से अपने दायित्व का निर्वाह करती है जिसका एक छोटा उदाहरण है दिल्ली मेट्रो। रोज लाखों यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचाने वाली तथा कई लाइनों वाली मेट्रो में CISF बखूबी काम करती है। हाल ही में उसने दिल्ली मेट्रो और लोगों की सुरक्षा के लिए आतंकरोधी दस्ता तैयार किया है ताकि जरूरत पड़ने पर आतंकवादियों को चंद मिनट में धूल चटाई जा सके और घातक विस्फोटक को समय से पहले निष्क्रिय कर जान-माल की रक्षा की जा सके। यह निश्यच ही एक जांबाजी से जुड़ा स्वागतयोग्य कदम है।

राज्य सरकारों की पुलिस को भी नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल तथा नई चुनौतियों का कारगर ढंग से सामना करने वाली मानसिकता के साथ काम करने की जरूरत है। CISF की एक रिपोर्ट में जिस तरह का उल्लेख किया गया है, उस पर केंद्र और राज्यों के आला पुलिस अफसरों को अतिशीघ्र काम करने की पहल करनी होगी।

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