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AIR FORCE अफसरों पर सवाल ?

दिनेश-तिवारी

दिनेश तिवारी (वरिष्ठ पत्रकार)

वायुसेना अधिकारियों के बारे में नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की यह रिपोर्ट कि वायुसेना के अफसरों ने देश में घूमने के लिए अवकाश यात्रा रियायत (LTC) की छुट्टी ली, पर घूमने के लिए विदेश चले गए, फौज में अनुशासन की गरिमा के प्रति सवाल खड़े करती है। भारतीय सेना अथवा किसी भी देश की सेना की पहली व अंतिम पूंजी अनुशासन होती है। बिना अनुशासन अथवा मर्यादा के चाहे दुश्मन के सामने हो या घर-दफ्तर में बात बनती नहीं है। फौज में सैनिक को ईमानदार, देशभक्त, वफादार तथा प्रतिबद्धता के लिए तैयार किया जाता है। ऐसे में वायुसेना अफसरों का थोड़े से स्वार्थ के लिए ऐसा आचरण उनकी निष्ठा पर ही दाग लगाता है।





मजेदार बात यह है कि सब कारनामा उच्च अधिकारियों की जानकारी में था। विदेश से लौटकर अफसरों का फर्जी बिल जमा कर भुगतान ले लेना इस बात की ओर इंगित करता है कि यह कोई चूक नहीं, बल्कि जानबूझ कर किया गया ‘अपराध’ है। इसीलिए कैग (CAG) अधिकारियों के रक्षा मंत्रालय के समक्ष उठाने के बाद वायुसेना ने जांच शुरू कर दी है और ब्याज समेत रकम वसूलने की बात कही है। पर बात रकम वसूलने भर से बनती नहीं है। मामला नीयत से जुड़ा पैसों की हेराफेरी से है इसलिए सेना के नियम-कायदे के मुताबिक इस मामले पर ऐसी कार्रवाई हो कि कोई भी ऐसी हरकत करने से पहले सोचे।

समग्र राष्ट्र सैनिक को या यों कहिए समूचे रक्षा तंत्र को बेहद सम्मान, आदर व वीरता की नजर से देखता है। वह हर हाल में उम्मीद करता है कि सेना अनुशासित, संतुलित संयमित व समर्थित ही होती है। ऐसे में इस तरह के मामले देशवासियों के मन में सेना की छवि को धूमिल करते हैं। गौरतलब है कि कैग ने 2010-15 के बीच ऐसे 49 मामलों पर सवाल उठाया है और अफसरों को 82.58 लाख रुपये नियम विरूद्ध भुगतान की बात रक्षा मंत्रालय से कही है।

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