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पाकिस्तान की बौखलाहट

पीएम इमरान खान और बाजवा
फोटो सौजन्य- गूगल

यह पड़ोसी देश पाकिस्तान की हताशा और बौखलाहट ही कही जाएगी कि वह जांबाज भारतीय सेना के लगातार करारे जवाब के बीच बार-बार सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है। उसे यह बात समझ लेनी होगी कि भारत की अग्रिम चौकियों को निशाना बनाकर या एलओसी से सटी रिहायशी बस्तियों पर गोलाबारी कर कुछ हासिल होने वाला नहीं। उसे यह बात भी अच्छी तरह समझ लेनी होगी और गांठ बांध लेनी होगी कि उसकी नापाक हरकतों से उसकी जग हंसाई हो रही है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद- 370 व 35(A) हटने से पहले और बाद में वह पूरी दुनिया को कश्मीर मसले पर समझा नहीं पाया। उसे भारत के खिलाफ इस मामले में मुंह की खानी पड़ी। अब वह जिस तरह अंतर्राष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर गोलाबारी कर रहा है और सीमा पार से आतंकियों को घुसपैठ कराने की जुगत में है, उससे उसकी मंशा बिल्कुल साफ है कि वह केवल भारत को परेशान करना चाहता है। हालांकि वह भारत की सामरिक क्षमता से भलीभांति परिचित है। अतीत के उदाहरण उसके जेहन में है।





पूरी दुनिया जान चुकी है कि पाकिस्तान आतंक की फैक्ट्री है और लंबे समय से इसी करतूत में लगा हुआ है। जब सच पकड़ा जाता तो वह झूठ का सहारा लेता है। पाकिस्तान के हुकमरान और वहां के सेना के आला अफसर उसकी आतंकी गतिविधियों को सिरे से हमेशा ही नकारते आए हैं। पाकिस्तान को चाहिए और उसकी दूर-दर्शिता भी इसी बात में है कि वह कश्मीर मसले के सच को स्वीकार ले। उसे अब तक मान लेना चाहिए था कि कश्मीर मामला केवल और केवल भारत का मामला है। उसका इस मसले से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे में सीजफायर का लगातार उल्लंघन कर बार-बार अग्रिम चौकियों और रिहायशी बस्तियों को निशाना बनाकर भारत को उकसाने की कोशिश उसे कभी भी भारी पड़ सकती है। उसे यह बात समझ लेनी होगी।

दरअसल भारत की समूची युद्धक क्षमता से पाकिस्तान बखूबी वाकिफ है और चार बार वह मुंह की खा चुका है। वह भारत की नेतृत्व क्षमता को कम आंक बैठता है। यहां तक कि उसे पुलवामा हमले के बाद भी नहीं लगा था कि भारत उसकी सीमा के भीतर घुसकर कार्रवाई करेगा। पर दांव उलटा पड़ा। यहां तक कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 भी हट गया। वह इन्हीं बातों को लेकर बिलबिलाया हुआ है और वह हताशा व बौखलाहट में भारत पर गोलाबारी जैसी हरकतें करता है। भारत को पाकिस्तान की हर मंशा को समझना होगा और सरहद तथा विश्वपटल पर उसके अनुरूप कार्रवाई करनी होगी।

हकीकत यह है कि पाकिस्तान घाटी में आतंक के जरिए अराजकता पैदा करना चाहता है। पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-तैयबा, जैश-मोहम्मद कश्मीर घाटी में लोगों को धमका रहे हैं। खुफिया रिपोर्ट बताती हैं कि घाटी में करीब 275 आतंकी सक्रिय हैं। एलओसी के बेहद करीब पाकिस्तानी सेना की ओर से कई लॉन्च पैड भी सक्रिय हो गए हैं। इन्हीं पहलुओं के मद्देनजर भारत को रणनीति बनानी होगी। लंबा समय बीत जाने के बाद अब पाकिस्तान को भी सोचना होगा कि आजाद होने के बाद वह कहां खड़ा है और भारत कहां पहुंच गया ।

पाकिस्तान अगर यह सोच रहा हो कि देश में नागरिकता संशोधन कानून (NRC) के बाद उपजे हालात के बीच अपनी रोटियां सेक लेगा या सीजफायर उल्लंघन की आड़ में वह बर्फबारी का लाभ उठाकर सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ करा लेगा तो उसके लिए यह बात भूलनी ही बेहतर रहेगी। ऐसे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान तथा वहां के आला सैन्य अधिकारियों का यह कहना कि भारत पाक पर हमला कर सकता है, निराशा ही दर्शाता है।

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