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आतंकवाद की समर नीति से पाक का वजूद ही खतरे में

रंजीत-कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

रंजीत कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

जो दूसरों के लिये कांटा बोएगा वह खुद भी उन कांटों का शिकार होगा। यह कहावत आतंकवाद के सिलसिले में पाकिस्तान पर बखूबी लागू होती है। इन कांटों से भारत को जरूर चुभन हो रही है लेकिन पाकिस्तान तो इससे लहुलूहान होता लगता है। वास्तव में पाकिस्तान ने अपनी समर नीति के तौर पर आतंकवाद को एक हथियार बनाया और न केवल भारत बल्कि पड़ोसी अफगानिस्तान पर भी इस नीति को लागू किया। यहां तक कि बांग्लादेश भी पाकिस्तान की इस नीति से त्रस्त है। पाकिस्तान की इस समर नीति का नतीजा है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तबाह हो चुकी है। पाकिस्तान में घरेलू क्या विदेशी निवेशक भी अपना धन लगाकर वित्तीय जोखिम मोल नहीं लेना चाहते। पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा का भंडार न्यूनतम करीब 15 अरब डालर के स्तर पर आ गया है जिसमें विश्व बैंक ने पिछले जून में तीन अरब डालर और जोड़े हैं। यदि पाकिस्तान को और मदद नहीं मिलती है तो वहां सरकार चलाना मुश्किल होगा। पश्चिमी देश और अमेरिका ऐसा नहीं होते देखना चाहते हैं क्योंकि ऐसा होने पर पाकिस्तान का आतंकवादी तबका पाकिस्तानी सत्ता पर फिर हावी होने लगेगा।





अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने इसी के मद्देनजर अपने भारत दौरे में कहा है कि पाकिस्तान यदि अपनी धरती पर पल रहे आतंकवादी गुटों को नेस्तनाबूद नहीं करेगा तो पाकिस्तान सरकार का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। लेकिन पाकिस्तान की सरकार मजबूर है। वह यदि आतंकवादी गुटों पर दबाव बढ़ाती है तो आतंकवादी गुटों के गुस्से का खामियाजा उसे भुगतना होगा। रेक्स टिलरसन जब इस्लामाबाद में पाक प्रधानमंत्री से बात कर रहे थे तब उन्होंने (पाक) अपनी मजबूरी दिखाते हुए साफ कहा कि आप हमसे आतंकवादियों के खिलाफ अधिक से अधिक कड़ी कार्रवाई करने की बात कहते हैं लेकिन यह तब तक ही चल सकता है जब तक हमारा अस्तित्व है।

अमेरिका की  चिंता है कि पाकिस्तान की सत्ता पर जेहादी तबका हावी हुआ तो वहां के परमाणु केन्द्रों और हथियारों पर उनका प्रभुत्व स्थापित होगा और यह न केवल दक्षिण एशिया बल्कि पूरे विश्व के लिये भारी खतरे की बात होगी। यही वजह है कि जब से अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प ने सत्ता सम्भाली है पाकिस्तान की सरजमीं से पैदा और फैलाए जाने वाले आतंकवाद पर अमेरिका ने फिर गम्भीरता से ध्यान देना शुरू किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने 25अक्तूबर को अपने भारत दौरे में भी यह साफ कर दिया है कि आतंकवाद के बारे में अमेरिका पाकिस्तान से ठोस नतीजों की अपेक्षा करेगा। अब सवाल यही उठता है कि क्या अमेरिका गम्भीरता से पाकिस्तान पर दवाब डालेगा और क्या अमेरिका के इस दवाब के आगे पाकिस्तान झुक जाएगा?

पाकिस्तान की पीठ पर आज चीन का हाथ है और रूस के साथ भी वह नजदीकी बढ़ाने में सफल हो रहा है। चीन के साथ हर मौसम की दोस्ती की बदौलत  पाकिस्तान आज अमरीका से ऐंठ कर बातें करने की हिम्मत करने लगा है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या चीन पाकिस्तान को मौजूदा वित्तीय संकट से उबार लेगा?  चीन अपने साथी देशों को वित्तीय भेंट नहीं बल्कि वित्तीय कर्ज देता है जिससे वह देश चीन के वित्तीय बोझ से और दब जाता है। लेकिन पाकिस्तान के हुक्मरान अपने निहित स्वार्थों की वजह से पाकिस्तान की जनता को भारत विरोध और जेहादी माहौल में रखने की रणनीति पर चलते रहना चाहते हैं ताकि उनकी सरकार अधिक से अधिक दिनों तक टिकी रहे। लेकिन यह कब तक मुमकिन होगा ?

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