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पाकिस्तान की आतंकी करतूत पर और तेज प्रहार की जरूरत

भारतीय सेना के जवान

जम्मू-कश्मीर में लगातार आतंकी गतिविधियां, सुरक्षाबलों पर ग्रेनेड हमला, उच्च मारक क्षमता के हथियार मिलना, सीमा पार से घुसपैठ की घटनाएं होना इस बात की संकेत करता है कि शीर्ष नेतृत्व को आतंकवाद पर चोट को और धारदार करने की जरूरत है। पड़ोसी देश पाकिस्तान आतंकवाद के मसले पर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर दो टूक सुनने और अपमानित होने के बाद भी सुधरा नहीं है। आतंक की फसल उगा कर वह उसे भारत की ओर भेजने की करतूत करता रहा है। खुफिया एजेंसियों की यह खबर काफी है जिसमें कहा गया है कि पिछले साल बालाकोट पर एयरस्ट्राइक कर आतंकी कैंपों को ध्वस्त करने के बाद वहां फिर से आतंकी कैंप सक्रिय हो गए हैं और जैश-ए-मोहम्मद आतंकी गुट भारत पर आतंकी हमला करने के लिए 27 दहशतगर्दों को ट्रेनिंग दे रहा है। भारत को समग्रता के साथ रणनीति बनाकर काम करने की जरूरत है।





सच्चाई यह है कि सीमा पार बालाकोट पर भारत द्वारा की गई एयर स्ट्राइक बाद भी पाकिस्तान में बदलाव नहीं है। और उससे बदलने की उम्मीद करना भी बेईमानी है। पाकिस्तान की कथनी और करनी को दुनिया जानती है। लगातार आक्रमक प्रहार ही उसे सुधरने के लिए मजबूर कर सकता है। बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान पूरी तरह बिलबिला गया था और उसे उस समय सूझ ही नहीं रहा था कि क्या करें। सीमा पार, सीमा पर और सीमा के इस पार जम्मू-कश्मीर घाटी में पूरी कार्य योजना के साथ काम कर रहे सुरक्षा बलों, सुरक्षा एजेंसियों, खुफिया एजेंसियों को और चाकचौबंद होकर काम करने की आवश्यकता है।

अनुच्छेद- 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर घाटी में सुधार दिखाई दे रहा है। यह सही है कि सीमा के इस पार पुलवामा आतंकी हमले के बाद बरगलाने वालों पर प्रहार करने के बाद स्थानीय युवा आतंकी कम बने हैं लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि पूरी सफलता तभी मिलेगी जब केंद्र व सूबे की सरकार की हर संभव कोशिश हो कि घाटी में हिंसा का माहौल खत्म हो, शांति बहाली पूरी तरीके से हो, घाटी के स्थानीय नेता अपनी रोटियां न सेकें और घाटी की हवा में विकास की खुशबू दिखाई दे। कई दशक से घाटी में स्थितियां बेहद असामान्य हैं, किशोर तथा युवा हिंसा-खून व अलगावबाद की घटनाओं को देख रहे हैं और उकसावे बहकावे में आकर पत्थरबाज और आतंकी बने हैं। इस पर कमी आई है इसका श्रेय सुरक्षा बलों को जाता है।

शीर्ष नेतृत्व और केंद्र शासित प्रदेश के हुक्मरानों-राजनेताओं की लगातार कोशिश हो कि घाटी के किशोर-युवा और स्थानीय नागरिक आतंक की राह पर न चलें। इसलिए उनके साथ प्यार, सहानूभुति तथा सख्ती के साथ काम करने की जरूरत है। लघु व लंबी अवधि के कदम बेहद कारगर साबित हो रहे हैं। जिसमें स्थानीय युवाओं को शिक्षा, रोजगार, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। पंचायतों व स्थानीय निकायों के वित्तीय अधिकार बढ़ाकर विकास कार्यों को बढ़ावा दिया गया है। जिसके परिणाम आतंक को कुचलने के लिए एक बेहद कारगर कदम साबित हुए हैं। लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि जिस तरह पाकिस्तान की नापाक हरकतें घाटी में अराजकता का माहौल पैदा करने के लिए की जा रही हैं उससे निपटने के लिए प्रभावशाली कदम तत्काल उठाने की जरूरत है।

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