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घाटी के बदलते हालात को हजम नहीं कर पा रहा पाकिस्तान

इमरान खान
फाइल फोटो

संसद में सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर के हालात पर दिए गए आंकड़े तथा जानकारी इस बात की ओर पूरी तरह इशारा करती है कि वहां पर स्थिति सामान्य है और हालात तेजी से सुधर रहे हैं। यह पूरे देश व केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के लिए बेहद सुखद है। इस पहलू पर राजनीतिक दलों को विशेष गौर करना चाहिए कि वे राजनीति के बजाय राष्ट्रनीति पर ध्यान दे। घाटी में जनजीवन पटरी पर है, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल तथा कोर्ट कचहरी के खुल जाने से जाहिर है कि वहां की रफ्तार विकास की ओर बढ़ेगी। लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री का यह बयान भी आश्वस्त करने वाला है कि वहां दवाइयों की कोई कमी नहीं है तथा सभी अस्पताल-स्वास्थ्य केंद्र खुले हैं। बावजूद इस सब के केंद्र सरकार को घाटी के समग्र हालात पर पैनी नजर रखने की जरूरत है ताकि वहां के असामाजिक तत्व तथा पाकिस्तान का राग अलापने वाले चंद लोग आम नागरिकों को बरगला न पाएं क्योंकि घाटी में कट्टरपंथी युवाओं का ब्रेनवाश करने की कोशिश कर रहे हैं।





यह अच्छी बात है कि इन कट्टरपंथी मौलवियों पर सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर है। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट बताती है कि कट्टरपंथी दक्षिण कश्मीर में ग्रामीण युवाओं को बंदूक थामने के लिए उकसा रहे हैं। इस पर केंद्र सरकार तथा केंद्र शासित प्रदेश के शीर्ष अफसरों को सतर्क तथा चौकस रहने की आवश्यकता है। क्योंकि पिछले सालों में देखा गया है कि जितने आतंकी मौत के घाट उतारे जाते हैं उतनी संख्या में नए आतंकीम बन जाते हैं। सीमा के इस पार चंद कट्टरपंथी तथा सीमा के उस पार पड़ोसी देश की करतूत घाटी में आतंकवाद के लिए जिम्मेदार है। हकीकत यह है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान चुप नहीं बैठा है। उसकी कोशिश है कि घाटी में आतंक के जरिए आराजकता फैले और वहां का माहौल खराब हो। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट बताती है कि घाटी में अभी भी 273 आतंकी सक्रिय हैं। एलओसी के बेहद करीब पाकिस्तानी सेना की ओर से कई लॉन्च पैड दोबारा हरकत में आ गए हैं। रिपोर्ट बताती है कि गुरेज, मच्छल, उड़ी, नौशेरा, सुंदरबनी जैसे क्षेत्रों में 250 से ज्यादा आतंकवादी सक्रिय हैं।

पाकिस्तान धुंध और बर्फबारी की आड़ में घुसपैठ कराने की फिराक में है। लेकिन उसे समझना होगा कि भारत की सामरिक क्षमता, खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां बेहद चौकन्नी हैं। अभी भी वह कश्मीर का राग अलापने से बाज नहीं आ रहा। आंकड़े बताते हैं कि वह कर्ज में डूबा हुआ है। बीते 71 वर्ष में जितना कर्ज पाकिस्तान पर चढ़ा है उसमें 30 फीसदी हिस्सा अकेले इमरान सरकार का है। पाकिस्तान को अपने गिरेबान में अब झांक लेना चाहिए और कश्मीर का राग अलापना बंद कर देना चाहिए। सच्चाई यह है कि घाटी के सामान्य होते हालात को पड़ोसी देश हजम नहीं कर पा रहा।

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