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भरोसे के काबिल नहीं है पाक

इमरान खान

नियंत्रण रेखा के पार बालाकोट में पाकिस्तान द्वारा फिर से आतंकी कैंपों का सक्रिय करना तथा सीमा पार 250 सशस्त्र आतंकी आतंकी घुसपैठियों का भारत की सीमा में लगातार घुसने की फिराक में होना भारतीय सेना के लिए कान खड़े करने वाली खबर है। नए थल सेना अध्यक्ष ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है कि नियंत्रण रेखा के पास फिर से आतंकी शिविर सक्रिय हो गए हैं। ऐसे कहा जा सकता है कि नियंत्रण रेखा पर हालात बेहद तनाव भरे हैं ऐसे में जांबाज सैन्य बलों को चौकस निगाहों के साथ अपना कर्तव्य पालन करने की जरूरत है। एक पखवाड़े पहले तत्कालीन आर्मी चीफ बिपिन रावत ने भी इस बात की चिंता जताई थी कि नियंत्रण रेखा पर स्थिति कभी भी बिगड़ सकती है। बदली हुई परिस्थितियों के बीच नए थलसेना अध्यक्ष और देश के पहले चीफ और डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत की भी जिम्मेदारियां बढ़ गईं हैं।





दरअसल पिछले साल अगस्त में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद पाकिस्तान की ओर से नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन बढ़ गया है। संसद में पेश किया गया आंकड़ा भी इस बात की तस्दीक करता है कि अगस्त 2019 से अक्टूबर के बीच पाकिस्तान ने 950 बार संघर्ष विराम को उल्लंघन किया है। संघर्ष विराम की आड़ में वह सशस्त्र घुसपैठियों-आतंकियों को भारत की सीमा में दाखिल कराने की फिराक मे रहता है। इसी साल की पहली रात यानी 31 दिसंबर और एक जनवरी की रात में नौशेरा सेक्टर के थरयाट जंगल में मुठभेड़ में दो भारतीय जवानों की शहादत की खबर भी इस बात की इशारा करती है कि पाकिस्तान किसी सूरत में अच्छे पड़ोसी का धर्म न निभाने की कसम खाए बैठा है।

पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम (BAT) लगातार नियंत्रण रेखा पर लगातार भारतीय सेना को निशाना बनाने की कोशिश करती रहती है। पाकिस्तान हर तीसरे-चौथे दिन BAT के अभियानों को अंजाम दे रहा है ऐसे में निश्चय ही हालात पर लगातार निगरानी और पैनी नजर रखने की खास जरूरत है। BAT में सामान्य तौर पर विशेष बलों के कर्मी और आतंकी शामिल होते हैं। BAT की सक्रियता एलओसी पर दिख रही है। दो बार सर्जिकल स्ट्राइक औऱ एयर स्ट्राइक होने बाद भी लगातार सक्रिय है। इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि BAT टीम ने पुंछ के मेंढर में एलओसी पर भारतीय जवान हेमराज का सिर काट लिया था। इसके बाद से लगातार BAT राजौरी और पुंछ जिले की एलओसी पर सक्रिय है। ऐसे में सतर्क सचेत होकर दुश्मन की हरकतों पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।

खुफिया जानकारी बताती है कि एलओसी पार आतंकी शिविर, लॉन्च पैड भारत में घुसपैठ के इरादे से भी बनाए गए हैं और इनका संचालन पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की मदद से किया जा रहा है। यह तो तय है कि पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज आने वाला नहीं। उसकी कथनी-करनी में जमीन-आसमान का फर्क है। पूरी दुनिया में आतंकवाद की फसल उगाने के नाम पर फजीहत हो रही है। फिर भी वह अपनी कारस्तानियों से  बाज नहीं आ रहा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भले ही भारत से आतंकी अड्डों को खत्म करने की बात कर रहे हों लेकिन पाकिस्तान पर भरोसा इसलिए नहीं किया जा सकता है क्योंकि वह भारत के साथ पहले भी ना जाने कितनी बार धोखा कर चुका है।

यह सही है कि पुलवामा हमले के बाद भारत द्वारा बालाकोट में आतंकी अड्डों को खत्म करने की सर्जिकल स्ट्राइक का असर पाकिस्तान पर पड़ा था। वह भारत के नए तेवर तथा पराक्रम से बिलबिला भी गया था। लेकिन वह कब अपनी चालबाजियों, कारनामों, हरकतों को अजाम देने लगे, कहना मुश्किल है। नए आतंकी शिविरों को बनाने की खुफिया खबर को इसी परिप्रेक्ष्य में समझने की जरूरत है। पाकिस्तान पर विश्वास न करने से बेहतर है कि इसे उसकी की भाषा मे जवाब दिया जाए। प्रहार ऐसा हो कि वह बिलबिला उठे। पाकिस्तान भले की गुलाम कश्मीर में हताश-निराश मन से मदरसों, गांव के घरों- झोपड़ियों में आतंकी शिविर चलाकर भारत की सीमा में घुसपैठ के मंसूबे देख रहा हो। पर भारत के सैन्य बलों की निगाहें और ताकत उसकी कायराना हरकतों को विफल करने के लिए पर्याप्त हैं।

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