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पाकिस्तान ने फिर करतब दिखाया, ट्रम्प खुश हुए

रंजीत-कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

रंजीत कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

गत 12 अक्टूबर को पाकिस्तान ने एक अमरीकी परिवार को हक्कानी आतंकवादी गुट के चंगुल से छुड़ाने का जो करतब दिखाया उससे अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इतने खुश हो गए कि पाकिस्तान पोषित आतंकवादी गुटों द्वारा अफगानिस्तान में मारे गए हजारों अमरीकी सैनिकों की कुर्बानी को भूल गए। पिछले सप्ताह तक वह इसी बात के लिये पाकिस्तान को कोस रहे थे और चेतावनी दे रहे थे कि पाकिस्तान यदि नहीं सुधरा तो पाकिस्तान को इसके बुरे नतीजे भुगतने होंगे। आतंकवादियों को अपना हथकंडा बनाने वाले पाकिस्तान ने अमरीकी चेतावनी को सच समझ कर एक बार फिर आतंकवादियों के बीच अपना रुतबा दिखाया और पांच साल से तालिबान के हक्कानी गुट द्वारा बंधक बनाए गए अमरीकी दम्पति को छुड़ा लाने का अपना ऐसा करतब दिखाया कि अमरीकी राष्ट्रपति की जुबान ही बदल गई जो कुछ दिनों पहले तक आतंकवादियों को पनाह देने वाला देश बताकर उसे दंडित करने की बात कह रहे थे।





सचाई यह है कि आतंकवादियों पर लगाम लगाने के नाम पर अमरीका और इसके साथी देशों से पाकिस्तान फिरौती वसूलता रहा है । यह सब जानते समझते हुए भी अमरीका और इसके साथी देश इसे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अहम योगदान बताते रहे हैं। ठीक वैसे ही जैसे कोई अपहरणकर्ता किसी बंधक के परिवार से फिरौती वसूलने के बाद बंधक को छोड़ दे तो पुलिस उसे छुड़ाने का श्रेय ले लेती है। ताजा वारदात में अमरीकी परिवार को रिहा करवाने का श्रेय लेने के बाद पाकिस्तान से राष्ट्रपति ट्रम्प इतना खुश हो गए कि उसके साथ रिश्ते गहरे करने की बात करने लगे। वास्तव में ट्रम्प प्रशासन ने तो इसे अमरीका की बड़ी उपलब्धियों में एक बताया। जब पाकिस्तान की धऱती से अलकायदा द्वारा संचालित न्यूयार्क और वाशिंगटन में 9-11 को भीषण आतंकवादी हमला हुआ था तब से अमरीका अपहर्ताओं के संरक्षक पाकिस्तान को तीस अरब डालर से अधिक की सहायता दे चुका है। ट्रम्प ने इस सच्चाई को स्वीकारते हुए इसे बंद करने की बात कही थी लेकिन वह भी पाकिस्तान के चकमे में इस तरह फंस गए कि पाकिस्तान के साथ रिश्तों के नये दौर की बात करने लगे।

पाकिस्तान को जब जब अमरीका ने धमकी दी है पाकिस्तान ने इसी तरह का करतब दिखा कर अमरीकी सहायता जारी रखने को बाध्य किया है। पाकिस्तान की इन हरकतों से बाज आ कर अमरीकी नेता अक्सर ही यह धमकी दे डालते हैं लेकिन ऐसा लगता है कि पाकिस्तान और अमरीका के बीच रिश्तों का डोर अमरीकी गले की फांस बन चुका है जिससे अमरीका मुक्त होने को छटपटा रहा है लेकिन जब भी वह ऐसा करने की कोशिश करता है पाकिस्तान इसके गले की फांस और कस देता है। पाकिस्तान अमरीका को यह अहसास दिला देता है कि आतंकवादियों पर वही लगाम लगा सकता है इसलिये अमरीका पाकिस्तान की शर्तें मानता रहे। पाकिस्तान की शर्त है कि अफगानिस्तान से भारत को बाहर किया जाए। लेकिन हाल में अमरीकी प्रशासन ने साफ दुहराया है कि अफगानिस्तान में भारतीय मौजूदगी अफगानिस्तान में शांति व स्थिरता के लिये जरूरी है। लेकिन पाकिस्तान को लगता है कि अफगानिस्तान में भारत के रहने से वह अफगानिस्तान पर अपना दबदबा वैसे ही स्थापित नहीं कर सकेगा जैसा कि नब्बे के दशक में तालिबान शासन के दौरान वह हासिल कर चुका था। अफगानिस्तान को अपना सामरिक गहराई प्रदान करने वाला देश मानने वाले पाकिस्तान के मंसूबे भारत के वहां रहने से पूरे नहीं होंगे।

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