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चीनी दादागिरी से परेशान छोटे देश भारत की ओर देख रहे हैं

रंजीत-कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

रंजीत कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

सिक्किम से लगे भूटान के डोकलाम इलाके में भारतीय  सेना द्वारा चीनी सेना को रोक कर डेरा जमाए डेढ़ महीने से अधिक बीत चुके हैं। इस दौरान चीन ने सरकारी और गैरसरकारी माध्यम से भारत को कई तरह की धमकियां  दी हैं लेकिन भारत बिना कोई हल्ला मचाए अपने कड़े रुख पर कायम है कि डोकलाम से होकर भारतीय सीमांत इलाकों तक सड़क नहीं बनाने देंगे। चीन का दावा है कि डोकलाम का इलाका चीन का है और यदि इस इलाके को लेकर कोई मसला है तो वह भूटान और चीन के बीच है न कि भारत और चीन के बीच। लेकिन चूंकि भूटान ने डोकलाम इलाके पर दावा किया है और इस इलाके से होकर सड़क बनाने पर एतराज जाहिर करते हुए चीनी विदेश मंत्रालय को विरोध पत्र भी भेजा है इसलिये भारत का फर्ज बनता है कि वह अपने कमजोर पड़ोसी का बचाव करे।





भारत को  अपने पड़ोसी दोस्त देश भूटान के हितों की तो रक्षा करनी ही है अपने सामरिक हित भी देखने हैं। यह सोच कर कि चीन तो सड़क भूटान के इलाके में बना रहा है उससे भारत को क्या फर्क पड़ेगा, भारत चुप नहीं बैठ सकता। हमारे पडोस के घर में यदि कोई चढ़ बैठा है और यदि इस पर एतराज नहीं जताया तो कल वही हमारे घर पर भी चढ़ने की कोशिश कर सकता है। भूटान के दावे वाले डोकलाम इलाके से होकर बनने वाली सड़क से अंततः भारत के उस इलाके पर सीधा प्रहार करने की स्थिति में आ जाएगा जिसे चिकन नेक या सिलिगुड़ी कोरिडार कहते हैं। यह चिकेन नेक महज करीब 25 किलोमीटर चौड़ा भौगोलिक इलाका है जिसकी नाकेबंदी कर उत्तर पूर्वी राज्यों को शेष  भारत से काटा जा सकता है। अपने प्रादेशिक इलाके की रक्षा करने के लिये दीर्घकालिक नजरिया लेकर चलना होता है और भारत को पूरा हक है कि अपने निहत्थे पडोसी देश की रक्षा के लिये पहल करे। आखिर भारत ने 2007 में भूटान के साथ दोस्ती की जो संधि की है उसका पालन करना हमारा धर्म बनता है।

डोकलाम इलाके में भूटान और भारत के सामरिक हित मेल खाते हैं इसलिये भारत ने काफी हिम्मत दिखाते हुए चीन जैसी दम्भी सैनिक ताकत से लोहा लेने का कदम उठाया है। अपनी सैनिक और आर्थिक ताकत से दुनिया पर धौंस जमाने की कोशिश करने वाला चीन भारत पर भी धौंस जमा ले यह भारत को बर्दाश्त नहीं हो सकता। आखिर भारत भी एक उभरती सैनिक और आर्थिक ताकत है और इतनी क्षमता तो रखता ही है कि वह चीन जैसे देश को चुनौती दे सके। चीन की दादागिरी से चीन के सभी पडोसी देश परेशान हैं और वे देश अब भारत की ओर देख रहे हैं कि  भारत चीन से कैसे लोहा लेता है। दक्षिण पूर्व एशिया के देश खासकर वियतनाम,फिलिपींस , इंडोनेशिया जैसे देश चीन के आक्रामक रवैये के आगे बेबस महसूस कर रहे हैं। अब वे देख रहे हैं कि भारत चीन की दादागिरी से कैसे मुकाबला करता है। भारत यदि आज डोकलाम के मसले पर झुकता  है तो कल को चीन भारत से लगे अन्य सीमांत इलाकों में भी भारत को  दबाने की कोशिश करेगा तो भारत फिर उसे चुनौती नहीं दे पाएगा। चीन के रवैये से दुखी दूसरे छोटे देशों का मनोबल भी टूटेगा। इसलिये जरूरी है कि भारत चीन की हेकड़ी तोड़ने के लिये उसकी सभी बंदरभभकियों को झिड़क दे।

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