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पाकिस्तान के खिलाफ नई रणनीति की जरूरत

बीएसएफ की सीमा पर कार्रवाई

जम्मू-कश्मीर सीमा और नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान अपनी पागलपन भरी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। उसकी लगातार कोशिश है कि सरहद पर सीजफायर का उल्लंघन करे और घाटी में आतंकवादियों की घुसपैठ कराए। औसतन वह रोज ही LOC और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर 6-7 बार फायरिंग करता है और उसकी आड़ में हरसंभव घाटी में अस्थिरता फैलाने की जुगत करता है। यूं तो भारत मुस्तैदी और बहादुरी से जवाब देता है तथा एक कदम आगे बढ़कर देता है। पर बात न सिर्फ वहीं की वहीं है बल्कि हाल के वर्षों में जम्मू-कश्मीर में हालात खराब हुए हैं। पिछले एक सप्ताह में सैन्य अधिकारी समेत कई जाबांज जवानों की शहादत हमें इस बात की ओर सोचने के लिए विवश करती है कि अब पाकिस्तान के खिलाफ विशुद्ध व्यावहारिक होकर नई रणनीति बनाई जाए।





यह ठीक है कि भारत ने अभी तक रक्षात्मक नीति अपनाई है उधर से गोली आती है तो उसका जवाब बखूबी दिया जाता रहा है। और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे कदम भी उठाए जाते रहे हैं। पर ‘अस्थिरता’ का हिमायती पाकिस्तान काफी नुकसान के बाद भी अपनी कारस्तानियों से बाज नहीं आ रहा। स्थितियां तो यहां तक बदल गई हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक और आपरेशन आल आउट जैसी कारगर कार्रवाई से उपजी बौखलाहट से हाल के दिनों में पाकिस्तान की गोलाबारी तथा आतंकवादियों की घुसपैठ की घटनाएं बढ़ी हैं। यह चिंताजनक है। जरूरत है नई सोच के साथ ऐसी रणनीति बनाने की जो इस समस्या से निजात दिला सके।

वैसे तो हमारे रक्षा विशेषज्ञ, विदेश मामलों के जानकार तथा देश का शीर्ष नेतृत्व इस समस्या पर अरसे से गहन चिंतन और निगाह रख ही रहा है। पर इस मसले पर क्या ऐसा नहीं हो सकता कि सीधे तौर पर सिर्फ दो बिंदुओं पर काम हो? पहला, उन ठिकानों को खत्म करने का काम जहां आतंकियों की ट्रेनिंग होती है। पूरी दुनिया अब मान रही है कि पाकिस्तान आतंकियों की पनाहगाह है। इस बाबत भारत ने दुनिया के शीर्ष मंचों पर पाकिस्तान के मंसूबों को उजागर कर उसकी असलियत बता दी है। पाकिस्तान के साथ बातचीत कम ऐक्शन ज्यादा हो। उसके खिलाफ लगातार की जाने वाली कड़ी कार्रवाई पाकिस्तान की रीढ़ तोड़ देगी। और उसका हौंसला जमीन पर आ जाएगा। इतिहास बताता है कि 1971 के युद्ध के बाद पाकिस्तान का मनोबल धरातल पर था। कश्मीर का माहौल और मिजाज भारत के पक्ष में था।

दूसरी कार्रवाई हो कि घाटी के नागरिकों, विशेषकर युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जाए। ठीक है कि इस पर काम हो रहा है पर इसे और रफ्तार देना समय की वाजिब मांग है। पत्थरबाजी की घटनाएं कट्टरपंथियों के उकसावे की देन है। तर्क के आधार पर घाटी के नागरिकों को समझाने तथा प्यार से उन्हें संपूर्ण भारत से जोड़ने का यही समय है। इस पहल से जम्मू-कश्मीर में अमन-चैन के हालात बनने का रास्ता स्वतः शुरू हो जाएगा।

निस्संदेह समस्या पुरानी है लेकिन पाकिस्तान पर कारगर ढंग से उठाया गया हर कदम कश्मीर की आग बुझाने के लिए पर्याप्त होगा। केन्द्र और राज्य सरकार, सेना, सशस्त्र बल, राज्य की पुलिस, खुफिया एजेंसियों की संयुक्त पहल से बात बनेगी ही।

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