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जम्मू-कश्मीर और इमरान के ‘आतंकी संगठन’

पाक पीएम इमरान खान
फाइल फोटो

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का अमेरिका जाकर कबूल करना कि पाकिस्तान की जमीन पर 30 से 40 हजार आतंकी मौजूद हैं और यह आतंकवादी वहां सक्रिय 40 समूहों के हैं, थोड़ा समझ से परे है। उन्होंने ऐसा क्यों कबूला यह तो इमरान खान स्वयं या पाकिस्तान का विपक्ष विस्तार से बता सकता है लेकिन पाकिस्तान की जमीन आतंकियों की पनाहगाह, आतंकियों को प्रशिक्षित करने का अड्डा है, यह बात बरसों से भारत कह रहा है। पता नहीं क्यों पाकिस्तान के हुकमरान और सेना इस तथ्य को पूरी दुनिया के सामने एक अरसे से नकारते रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में पिछले कई वर्षों से चल रहा आतंकवाद पाकिस्तान की देन है। इस बात को भारत ने समय-समय पर तमाम सबूतों के साथ पाकिस्तान व दुनिया को हमेशा बताया है। अब बालाकोट की स्ट्राइक के बाद भारत के आक्रामक प्रहार और दुनिया में आतंकवाद के मुद्दे पर थू-थू करवाता पाकिस्तान 40 आतंकी समूहों के सक्रिय होने की बात स्वीकार कर रहा है तो यह कोई नई बात नहीं है। सच तो पहले से ही दुनिया को पता है। फिर भी कहा जा सकता है- देर आयद, दुरुस्त आयद।





ऐसे में समझने वाली बात यह है कि अगर 40 आतंकी गुटों की मौजूदगी की स्वीकारोक्ति के बाद पाकिस्तान उनके खात्मे के लिए कोई कार्रवाई नहीं करता तो यह पूरी दुनिया के लिए एक खतरनाक संकेत होगा। घाटी का आतंकवाद सीमा पार पाकिस्तान की देन है यह बात किसी से छिपी नहीं है। सेना के ‘ऑपरेशन ऑल आउट’ के तहत आए दिन आतंकी मारे जा रहे हैं। ये आतंकी कहां से आए, इनकी ट्रेनिंग कहां हुई घाटी के बाशिंदे भी इस बात को अच्छी तरह जानते हैं। स्थानीय युवक पत्थरबाजी क्यों और किसके कहने पर कर रहे हैं यह बात किसी से छिपी नहीं है। आज भी गुलाम कश्मीर में आतंकियों को ट्रेनिंग देने के लिए 40-50 कैंप चल रहे हैं। इस बात की तस्दीक खुफिया एजेंसी करती रहती है। बताया जा रहा है कि यह कैंप तीन तरह के होते हैं- पहले तरह के कैंपों में आतंकियों की भर्ती की जाती है, दूसरे तरह के कैंपों में उन्हें ट्रेनिंग दी जाती है जिसमें ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों के रिटायर्ड अफसर होते हैं। तीसरे तरह के कैंप लॉन्चिंग पैड होते हैं जहां से आतंकी वारदात को अंजाम देने के लिए उन्हें घुसपैठ कराकर भारतीय इलाके में भेजा जाता है।

सच्चाई यह है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भले ही पाकिस्तान में आतंकी गुटों के सक्रिय होने की बात स्वीकार करें या आतंकी अड्डों को खत्म करने की बात करें या मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को सजा दिलाने की बात करें लेकिन समझना होगा कि पाकिस्तान की कथनी-करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। वह न जाने कितनी बार भारत के साथ धोखा कर चुका है। लिहाजा भारत अब उसकी हर चाल से अच्छी तरह वाकिफ है। पाकिस्तान के साथ कब, क्या, कितना और किस भाषा में जवाब देना है भारत समझता है। मामला चाहे पुलवामा हमले के बाद का हो, नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव का हो, घाटी में आतंकियों के सफाए या सीमापार घुसपैठ का हो। भारत की नीति और रणनीति दोनों ही तैयार है। और उस पर काम सधे कदमों से किया जा रहा है इस बात को पाकिस्तान जितनी जल्दी समझ ले बेहतर होगा। घाटी के आतंकवाद के खात्मे के लिए भारत बहुत आगे बढ़ चुका है। यह नया भारत है, बदला हुआ भारत है।

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