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CISF की स्कूलों में सुरक्षा की पहल

दिनेश तिवारी

दिनेश तिवारी (वरिष्ट पत्रकार)

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने सामाजिक सरोकार के तहत देश के नामचीन स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करने के लिए अपना परामर्श देने की पहल की है। देश के इस महत्वपूर्ण अर्द्धसैनिक बल का यह स्वागत योग्य कदम है। परामर्श भरी यह पहल ऐसे मौके पर आई है जब देश के तमाम स्कूल पर्याप्त सुरक्षा-व्यवस्था के अभाव में दर्दनाक हादसों का शिकार हो रहे हैं या फिर जघन्य हत्याओं के मामलों के कारण अखबार की लगातार सुर्खियां बन रहे हैं जिसका ताजा उदाहरण है दिल्ली से सटे गुरुग्राम में रेयान इंटरनेशनल स्कूल में कक्षा दो के मासूम छात्र प्रद्युम्न की दर्दनाक हत्या। ऐसे में सामाजिक सरोकार भरी सीआईएसएफ की पहल स्कूलों में सुरक्षा के हर स्तर पर नए सिरे से प्रकाश डालेगी और स्कूल सुरक्षा तंत्र को मजबूती प्रदान करेगी।





यह अच्छी बात है कि सीआईएसएफ के पास वर्तमान में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनोलॉजी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट और मुंबई के धीरूभाई अंबानी स्कूल जैसी शैक्षिणिक संस्थाओं में सुरक्षा को लेकर कंसल्टेंसी का सारगर्भित अनुभव है। इन संस्थाओं में इस अर्धसैनिक बल के अधिकारियों ने समग्रता के साथ अध्ययन कर सुरक्षा प्रबंधों के टिप्स तथा परामर्श दिया है। मसलन सीसीटीवी कैमरे के जरिए पूरे परिसर पर नजर, सुरक्षा अलार्म सिस्टम, अत्याधुनिक तकनीक से जुड़े यंत्रों का इस्तेमाल आदि। हालांकि इन सभी तकनीक व जरूरतों पर बल अमूमन नामी-गिरामी और चमकदार स्कूली संस्थाएं देती ही हैं, किंतु सीआईएसएफ का सतर्क-सजग रहकर सुरक्षा करने का बारीक अनुभव इन संस्थाओं के लिए लाभकारी साबित होगा। वैसे भी आज दिल्ली मेट्रो तथा पूरे देश के हवाई-अड्डों की सुरक्षा-व्यवस्था इसी बल के जिम्मे हैं।

अर्धसैनिक बल की परामर्श देने वाली कारगर पहल में फिलहाल केवल नामचीन स्कूली संस्थाएं- नवोदय विद्यालय समिति, केंद्रीय विद्यालय संगठन, दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसायटी, स्प्रिंगडेल्स, सलवान एडूकेशन ट्रस्ट, मॉर्डन स्कूल, संस्कृति स्कूल, मदर्स इंटरनेशनल, श्रीराम, एपीजे एडूकेशन सोसायटी शामिल हैं। बेहतर होगा कि सीआईएसएफ स्कूलों में सुरक्षा की कंसल्टेंसी का दायरा दूसरे महानगरों और नगरों के अन्य स्कूलों में भी बढ़ाएं। हत्याएं, हादसे, दुर्घटनाएं सभी जगह होती रहती हैं। स्कूल तथा शैक्षिक संस्थाएं इससे अछूती नहीं हैं। जब तक कोई छात्र स्कूली बस में पढ़ने के लिए घर से चढ़कर और पढ़ाई कर वापस सही-सलामत माता-पिता के पास नहीं आ जाता, जाने-अनजाने असुरक्षित ही रहता है। इसलिए सीआईएसएफ का यह कदम सुरक्षा के प्रति स्कूल प्रबंधन समेत अभिभावकों को भी और जागरूक बनाएगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।

 

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