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‘लड़ाकू’ आकाश में भी भारतीय महिलाएं

दिनेश-तिवारी

दिनेश तिवारी (वरिष्ठ पत्रकार)

इंडियन एयरफोर्स के इतिहास में तीन महिला फाइटर पायलट सुपरसोनिक युद्धक विमान उड़ाकर अगले महीने साहस और जांबाजी की कथा लिखने जा रही हैं। यह भारतीय वायुसेना का बड़ा कदम है जिसमें भारतीय महिलाओं को और अधिक चुनौती तथा जोखिम भरी भूमिका देने का फैसला किया गया है। यह महिला शक्ति की महत्ता को साफ-साफ रेखांकित करता है तथा महिलाओं के साहस और शौर्य को भी परिभाषित करता है।





मालूम हो कि तीनों महिला पायलट- अवनि चतुर्वेदी, मोहना सिहं और भावना कंठ पिछले साल जून महीने में बतौर फ्लाइंग ऑफिसर कमीशन हुई थीं। इनकी फाइटर जेट उड़ाने की ट्रेनिंग खत्म होने वाली है। वह अब बहुत जल्द लड़ाकू विमान सुखोई- 30 उड़ाकर अपने कौशल का प्रदर्शन करेंगी। इन तीनों पायलट का साहसिक कदम भारत की महिलाओं में यह जज्बा पैदा करेगा कि वे भी इस ओर बढ़ें और भारतीय सेना व देश की चुनौती भरी सेवा करें। देश की तमाम महिलाएं अलग-अलग क्षेत्रों में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी प्रतिभा कौशल, बहादुरी का परिचय देकर कामयाबी की इबारत लिख रही हैं। अभी तक कई क्षेत्रों के साथ-साथ एक क्षेत्र एयरफोर्स में महिला फाइटर बनने का भी था जिसमें महिलाओं की नियुक्ति पर रोक थी लेकिन 2015 में सरकार ने गंभीर चिंतन-मनन, बहस के बाद इस क्षेत्र में पाबंदी हटा दी। समाज व सरकार की मानसिकता थी कि यह चुनौती भरा क्षेत्र महिलाओं के लिए अनुकूल नहीं है। पर अब अदृश्य दीवार लगातार टूटती दिख रही है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री ने भी समय की मांग को देखते हुए कहा था कि इंडियन नेवी में भी युद्धपोतों पर महिलाओं की तैनाती पर विचार होगा। यह सार्थक कदम सीधे-सीधे महिला शक्ति पर मोहर लगाते हैं। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री तथा देश की नई महिला रक्षामंत्री की सोच तथा निर्णय से सेना में महिलाओं के लिए और नए दरवाजे खुलेंगे।

गौरतलब है कि सेना के तीनों अंगों में महिलाओं की नियुक्ति होती है लेकिन कुछ खास पदों पर ही। एयरफोर्स में भी करीब 1,300 महिलाएं अपनी सेवाएं दे रही हैं। इस फोर्स में महिलाएं 1994 से पायलट हैं। पर ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट या हेलिकॉप्टर के लिए। अब नियुक्तियों का यह सीमित दायरा महिलाओं के लिए आकाश में ‘लड़ाकू’ दौर की शुरुआत करेगा। इससे समाज और सरकार दोनों में ही सकारात्मक सोच पैदा होगी और खासतौर पर समाज के उस वर्ग की मानसिकता में परिवर्तन आएगा जो सेना में महिलाओं को समान अवसर देने के मामले में भिन्न राय रखते हैं।

भारतीय सेना के तीनों अंगों समेत अर्धसैनिक बलों में महिलाओं की नियुक्ति पर सरकार के लगातार फैसले तथा जमीन, आकाश तथा पानी महिलाओं के साहिसक कारनामे दूसरी महिलाओं के लिए नए-नए अवसर खोलेंगे। इसी परिप्रेक्ष्य में पूरे देश के पुलिस बल को भी महिलाओं की 33 फीसदी भर्ती के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की विशेष जरूरत है।

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