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महामारी की इस भयावहता में है सैन्यबलों की दोहरी जिम्मेदारी

कोविड-19 का संक्रमण और सेना

कोविड-19 वायरस के संक्रमण से उपजे संकट से निपटने के लिए सैन्य बल भी पूरी तरह मुस्तैद और सतर्क हैं। ऐसे में उन पर दोहरी जिम्मेदारी है। पहला यह इस महामारी से निपटने के लिए उन्हें सार्वजनिक स्तर पर चाक-चौबंद रहना है और दूसरा यह कि सभी जवानों को इस वायरस के संक्रमण से खुद को भी बचाना है। महामारी बनते इस वायरस की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने आदेश जारी कर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की जवानों की गैर-जरूरी छुट्टियां रद्द कर दी हैं ताकि यात्रा के दौरान कोराना वायरस से संक्रमित होने की खतरे को नियंत्रित किया जा सके। अलावा इसके सामाजिक समारोह से दूर रहने, सेमिनार, खेलकूद, बाजार में न जाने, हाथ न मिलाने आदि की हिदायत दी गई है। निश्चय ही सावधानी भरे ये कदम बेहद कारगर हैं। बलों की मेडिकल विंग में काम करने वाले कर्मियों को विशेष रूप से सतर्क रहने के निर्देश इस बात की ओर इशारा करते हैं कि सावधानी ही इस वायरस के संक्रमण से बचने का अचूक हथियार है।





कोरोना वायरस का संकट पैदा होने के बाद ही सशस्त्र बल खास तौर पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) तथा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) सीधे तौर पर संक्रमित अथवा संभावित संक्रमित यात्रियों के सीधे संपर्क में थे। आईटीबीपी ने चीन के वुहान से आए यात्रियों का विशेष ख्याल रख अपने क्वॉरनटाइन सेंटर में रखा और पूरी सतर्कता भरी निगरानी से आईटीबीपी के साथ-साथ सीआईएसएफ के जवान भी हवाई अड्डों पर अपनी मुस्तैद ड्यूटी निभा रहे हैं। चूंकि महामारी की भयावहता को देखते हुए भारत सरकार ने इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया है। लिहाजा यहां पर यह बात रेखांकित करनी जरूरी है कि किसी क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से इन्सान या किसी दुर्घटना के कारण जनहानि या संपत्ति का इतना नुकसान हो जाना कि उससे निपटना असंभव हो, तब भारत सरकार उसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करती है। सरकार समय-समय पर बाढ़, भूकंप, ओलावृष्टि, तूफान आदि से निपटने के लिए एनडीआरएफ की राशि का उपयोग करने का निर्देश देती है। ऐसे में सरकार के इस कदम के बाद हम सभी को इस महामारी की गंभीरता को समझने की जरूरत है।

और जरूरत इस बात की भी है कि संकट की इस घड़ी में सेना और सशस्त्र बलों के हर जांबाज जवान की तरह देश का हर नागरिक राष्ट्र-रक्षक की भूमिका अदा करे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में इस ओर इशारा करते हुए साफ कहा है कि संकल्प और संयम से ही इस आपदा से निपटने में मदद मिल सकती है। ऐसे में हम सभी नागरिक संकल्प इस बात का लें कि सरकार तथा वैज्ञानिकों द्वारा दी गई एडवाइजरी का पूरी तरह पालन करेंगे और हर वक्त संयम इस बात का रखेंगे कि हम अफवाहों-आशंकाओं पर न तो ध्यान देंगे और न फैलाएंगे। अगर सुरक्षाबलों के साथ-साथ देश का हर व्यक्ति सतर्क, सजग होगा तथा पूरे मन से संयमित होगा तो इस भयावह संकट से पार पाना मुश्किल नहीं होगा। भारत में अभी सावधानी तथा सतर्कता की विशेष जरूरत है क्योंकि देश में इस महामारी ने दो चरण पूरे किए हैं और तीसरे में प्रवेश किया है। तीसरे चरण का अर्थ है कि बड़े पैमाने पर सामुदायिक स्पर्श के जरिए इसका तेजी से संक्रमण।

प्रधानमंत्री की चिंता और अपील से समझा जा सकता है कि सरकार इससे बचाव के लिए नागरिकों को जागरूक और सचेत करना चाहती है। प्रधानमंत्री ने संबोधन में रविवार को जिस जनता कर्फ्यू का आह्वान किया है उसमें देश के एक-एक नागरिक की जागरूकता भरी सहभागिता जरूरी है। प्रधानमंत्री के इस महामारी से बचाव के सुझाव आखिर जन-जन की रक्षा के लिए ही है। यहां यह बात भी समझनी होगी कि महामारी से बचने की सावधानी केवल शहर के बाशिंदों को ही नहीं करनी बल्कि गांव से शहर तक तथा समुद्र तटीय इलाकों से लेकर लेह-लद्दाख तक करने की जरूरत है। हर किसी को यह बात गांठ बांध लेनी होगी कि भय और अनिश्चिता के दौर में बचाव में ही जीवन का बचाव है।

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