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जवानों के भत्तों में फंड की कमी कहां तक उचित ?

एसएसबी के जवान
फाइल फोटो

यह खबर परेशान करने वाली है- जिसमें कहा गया है कि सीमा की सुरक्षा में तैनात सशस्त्र सीमा बल के जवानों को जनवरी-फरवरी दो महीने के भत्तों का भुगतान फिलहाल नहीं किया जाएगा। ऐसा निर्णय बल में फंड की कमी की वजह से लिया गया है। ऐसे में सवाल यह है कि बल के सैनिकों के भत्ते जिसमें बच्चों की पढ़ाई का शैक्षिक भत्ता भी शामिल है, को रोकना भला कहां तक उचित है? भत्ते रोके जाने से इस बले के किसी भी सैनिक के सामान्य खर्चों व बच्चों की पढ़ाई के खर्च पर दिक्कत आएगी ही। इस सश्स्त्र बल के जवान नेपाल और भूटान से सटी 2450 किमी खुली सीमा की निगरानी करते हैं। पूरी कर्तव्यनिष्ठा व बहादुरी के साथ अपनी ड्यूटी कर देश की हिफाजत करते हैं। और बड़ी संख्या में जवान बिहार और झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान में तैनात हैं।





बल के आला अफसरों को यह बात शिद्दत के साथ ध्यान में रखनी होगी कि जवान के माता पिता, पत्नी-बच्चे घर पर रहकर भेजी गई धनराशि का इंतजार करते हैं ताकि घर की खर्चें बाधित न हों। लेकिन फंड का भुगतान न होने तथा छुट्टियों का पैसा नहीं मिलने से फिलहाल दिक्कत आएगी ही। यह ठीक है कि बकाए एरियर का भुगतान मार्च महीने में हो जाएगा किंतु देश के पांच सशस्त्र बलों में से एक सशस्त्र सीमा बल पर ऐसा संकट आना किसी भी तरह उचित नहीं है। इससे बल तथा सरकार की लापरवाही ही कही जाएगी।

हकीकत यह है कि पांच महीने पहले भी सितंबर माह में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के तीन लाख जवानों का 3,600 रुपये का राशन भत्ता रोक दिया गया था। वजह यह बताई गई थी कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फंड की कमी को लेकर भेजे गए तीन रिमाइंडरों पर ध्यान नहीं दिया था। आखिर यह चूक, गलती, लापरवाही किसकी है यह तय होना चाहिए। बाद में मामले के तूल पकड़ने के बाद अक्टूबर माह में बल के जांबाज जवानों के लिए फंड जारी किया गया। निश्चय ही इस अनदेखी, हीलाहवाली पर आला अफसरों तथा सरकार को समग्रता के साथ विशेष ध्यान देने की जरूरत है ताकि भविष्य में कभी भी, किसी भी सशस्त्र बल के जवानों के फंड भुगतानों को लेकर ऐसी पुनरावृति न हो। सशस्त्र बल का यह कथन भी आंख खोलने वाला है जिसमें कहा गया है कि कभी-कभी फंड की कमी हो जाती है और पहले भी ऐसा हो चुका है। यह सरासर जांबाज जवानों और उनके परिवारों की अनदेखी है।

नीति-नियंताओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि इन जवानों की तैनाती तथा उनके साहस, पराक्रम से ही देश की सीमाएं सुरक्षित हैं। आज बदली हुई परिस्थितियों और चुनौतियों के बीच दुश्मन की आंख में आंख डालकर जिस तरह प्रतिकूल मौसम के बीच ये सैनिक अपने कर्तव्य का पालन कर रहे हैं उसमें फंड की ऐसी किल्लत कहां तक उचित है ? धन की कमी का असर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जवान के मन पर पड़ता है। घर-परिवार भी प्रभावित होता है। इस पर पूरी गंभीरता ध्यान दिए जाने की जरूरत है क्योंकि सैनिक का मनोबल ही देश की रक्षा में सबसे पहले काम आता है।

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