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हिंद प्रशांत या एशिया प्रशांत ?

इन दिनों सामरिक दुनिया में एक बड़ी बहस छिड़ी है कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोडऩे वाले इलाके को  समग्रता में क्या नाम दिया जाए। इसे लेकर अमरीकी और चीनी सामरिक हलकों में गम्भीर मतभेद हैं।  कुछ अर्से  से अमेरिका के अकादमिक जगत में हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोडऩे वाले इलाके को हिंद प्रशांत यानी इंडो- पैसिफिक इलाका कहना शुरू किया गया था जिस पर चीन के कान खड़े हुए थे लेकिन उस पर कोई सरकारी प्रतिक्रिया नहीं दी थी। अब पिछले सप्ताह जब अमरीका के सरकारी सामरिक हलकों में हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को समग्रता में हिंद- प्रशांत कहा जाने लगा तो चीन ने इसे नजरअंदाज करते हुए इस इलाके को एशिया- प्रशांत इलाका ही कहा।





वास्तव में चीन नहीं चाहता कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को हिंद -प्रशांत इलाके के नाम से  जाना जाए क्योंकि इससे भारत का नाम प्रमुखता से उठता है और पूरे इलाके से भारत के जुड़े होने का प्रत्यक्ष अहसास मिलता है। जिस तरह प्रशांत महासागर के तहत चीन से लगा समुद्री इलाका दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर के तौर पर जाना जाता है चीन नहीं चाहता कि भारत के नाम से जुडा इतना बड़ा समुद्री  इलाका जाना जाए। ऐसे तो हिंद महासागर यानी इंडियन ओसन का नाम भी इंडिया यानी भारत के नाम पर रखा जाना चीन को अच्छा नहीं लगता। पाकिस्तान ने तो कुछ साल पहले हिंद महासागर के इलाके को इंडियन ओसन का  अंतर्राष्ट्रीय हलकों में आधिकारिक नाम बदलवाने की अनौपचारिक कोशिश भी की थी।   चीन और पाकिस्तान दोनों को पसंद नहीं कि पृथ्वी का तीसरा महासागर भारत के नाम से जाना जाए।

हिंद-प्रशांत इलाका कहने से ऐसा लगता है जैसे हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के इलाके पर भारत का ही प्रभुत्व हो। दोनों पृथ्वी के दो बड़े महासागर हैं । इनमें से एक हिंद महासागर का नाम हिंद पर रखे जाने से पृथ्वी  पर भारत की भौगोलिक और सामरिक अहमियत का पता लगता है। जैसे जैसे इस पृथ्वी से यूरोप का दबदबा घटने लगा है और एशियाई ताकतों का दबदबा बढऩे लगा है एशियाई देशों की सामरिक और आर्थिक अहमियत भी बढऩे लगी है। इसी को ध्यान में रखते हुए अमरीका ने कुछ साल पहले पिवोट टू एशिया की रणनीति लागू  करने का एलान किया था ताकि हिंद और प्रशांत महासागर के इलाकों पर वह दबदबा बनाए रखे। लेकिन चीन के भारी एतराज के बाद अमरीका ने इसे रिबैलेंसिंग एशिया का नाम दिया और इस इलाके में अपने कुल नौसैनिक संसाधन का 60 प्रतिशत तैनात करने की योजना को त्याग दिया। इस इलाके में शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिये अमेरिका अकेले चीन की चुनौतियों से मुकाबला नहीं कर सकता। इसलिए उसने भारत और कुछ अन्य देशों को साथ लेने की रणनीति पर काम करना शुरू किया है जिसके तहत अमेरिका ने हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाले इलाके को इंडो पैसिफिक कहना शुरू किया है ताकि ऐसा आभास हो कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के इलाके में भारत एक प्रमुख ध्रुव है जिसके नाम से ही यह इलाका ज्ञात हो। कुल मिला कर भारत के लिए यह अच्छी बात है कि इंडियन ओसन के बाद अब 21वीं सदी में हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के साझा इलाके को इंडो पैसिफिक इलाके के नाम से जाना जाए।

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