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गणतंत्र दिवस: संविधान व सेना सर्वोपरि

आर्म्ड फ्लैग डे पर तीनों सेनाओं के जवान
फाइल फोटो

बदली हुई चुनौतियों और बढ़ी हुई सैन्य ताकत के बीच पूरा देश 71वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। भारत के शौर्य, गौरव व सांस्कृतिक विविधता को पूरी दुनिया देख रही है। भारतीय सेना, सशस्त्र बल और पुलिस के साहस, पराक्रम, सूझबूझ तथा अनुकरणीय योगदान के किस्से राजपथ से लेकर दूरदर्शन, आकाशवाणी समेत पूरी मीडिया में देखे, सुने और पढ़े जा रहे हैं। पर याद रहे 26 जनवरी केवल राष्ट्रीय पर्व ही नहीं बल्कि उन बलिदानी वीरों और महावीरों की याद का भी पर्व है जिनकी बदौलत आजादी मिली, उसके बाद संविधान बना और लागू हुआ कि एक संपूर्ण, स्वस्थ्य आचार संहिता व नियम कानूनों के तहत एक मजबूत संवैधानिक ‘छाते’ के नीचे हम सभी नागरिक रह सकें। संविधान व कानून का भी आदर हमें करना होगा। हर कीमत पर। नई दिल्ली के राजपथ पर मनाई जाने वाली 26 जनवरी की परेड इस बात का भी प्रतीक है कि हम भारत के नागरिक जान सकें और पूरी दुनिया को बता सकें कि भारत नए परिवेश में अपने रक्षा-पराक्रम में कहां पर है तथा सांस्कृतिक विविधता के साथ उसकी विशेष विरासत है और वह एक है।





लेकिन देश-दुनिया के वर्तमान हालात में हम भारत के नागरिकों को एक बात विशेष रूप से जाननी व समझनी होगी। वह है संविधान और सैन्यबलों का हर कीमत पर सम्मान। जिस तरह भारतीय संविधान की छाया में हम सभी नागरिक सुरक्षित हैं। उसी तरह सेना, सशस्त्र बल, पुलिस के उच्च कर्तव्यपालन से हम चैन की नींद सो पाते हैं। खेती-किसानी कर पाते हैं। स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर पाते हैं। कल-कारखानों में काम कर पाते हैं और राजनीति कर पाते हैं। जब हम चैन की नींद सो रहे होते हैं तब यह जांबाज जवान हिमालय की बर्फीली हवाओं, तपते रेत, दलदली जगहों, जंगली-दुर्गम क्षेत्रों, गली-चौराहों में धूल-धुएं के बीच अपनी ड्यूटी निभा रहे होते हैं। जरूरत पढ़ने पर बाढ़, दंगा, भूकंप अथवा कैसी भी प्राकृतिक आपदा में पूरी मुस्तैदी के साथ अपना कर्वव्य पालन करते हैं और वापस अपनी बैरकों में चले जाते हैं। यह उनकी सर्वोच्च निष्ठा और उनके अनुकरणीय अनुशासन को दर्शाता है।

इसलिए राष्ट्रीय पर्व (26 जनवरी) पर हमारा नैतिक कर्तव्य बनता है कि केवल इसी दिन ही नहीं साल के हरेक दिन यहां तक की क्षण-प्रतिक्षण संविधान और सैनिकों के सम्मान का जज्बा बना लें। सैनिकों और जवानों के जज्बे का कोई सानी नहीं है। यह उन्हीं के जोश और जुनून का प्रतिफल था कि हम 1965, 1971, करगिल में जय-विजय का उद्घोष कर पाए। इन जवानों को जब देश के हर नागरिक का शहरों से लेकर गांव-मोहल्ले तक सम्मान मिलता है तो उनका सीना चौड़ा हो जाता है। हम सभी नागरिकों को आज यह बात बड़ी शिद्दत और समझदारी से समझनी होगी कि सुरक्षाबलों का सम्मान यानी देश का सम्मान।

हम इस स्तम्भ के माध्यम से इस बात को फिर रेखांकित करना चाहते हैं कि केवल एक दिन यानी 26 जनवरी को हाथ में तिरंगा लेकर या घर पर तिरंगा फहरा कर ही हम शूरवीरों को सलाम नहीं कर सकते। इसलिए आइये, हम सब सेना और सुरक्षाबलों को जानें, पुलिस का सम्मान करें… उनके सर्वोच्च बलिदान को समझें… और उनसे जुड़ें। तभी सार्थक होंगे गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के पर्व। गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

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