vishesh

चीन युद्ध के बादल करीब हैं ?

दिनेश-तिवारी

दिनेश तिवारी (वरिष्ठ पत्रकार)

भारत के स्वतंत्रता दिवस के दिन सिक्किम सेक्टर के डोकलाम क्षेत्र में गतिरोध के बीच चीन की लद्दाख क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश और भारतीय सेना द्वारा चीनी सैनिकों को खदेड़ने की घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि चीन की मंशा ठीक नहीं है। उसे लगता है की चीनी मीडिया और चीनी सैनिकों का सहारा लेकर उकसाने, भड़काने और गलतबयानी की नीति से वह भारतीय जनभावनाओं तथा भारतीय फौजों को संयम खोने पर मजबूर कर भारत पर युद्ध थोपने की रणनीति पर सफल होगा। लेकिन भारत ने न ऐसा अतीत में किया है और न ही उसकी शैली है।





दुश्मन पर बन्दूक की पहली गोली वह नहीं चलाता पर चीन सीमा से जुड़े मौजूदा हालात संजीदा और नाज़ुक हैं। इस बात का पूरा अंदाज़ा भारत को है। भारत चीन की रग-रग से वाकिफ है। 1962 की धोखाधड़ी का अनुभव भी उसके पास है। भारत जानता है कि वर्तमान हालात में चीन द्वारा डोकलाम विवाद लंबा खींचना और उसकी ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया के न आने के फलितार्थ क्या हैं? ऊँट किस करवट बैठना चाहता है, इस बात का इल्म भारत को अच्छी तरह है। इसलिए सेना और अर्धसैनिक बलों को पूरी तरह तैयार रहने को कहा गया है।

सूत्र तो यहाँ तक इंगित करते है कि अगले माह दोनों देशों में एक चोट से ‘टकराव’ की स्थिति बन सकती है लेकिन भारत को अभी भी कूटनीतिक प्रयासों पर भरोसा है। चीन की हरकतों को देखते हुए सिक्किम, उत्तराखंड और हिमाचल में आईटीबीपी को सीमा पर पूरी तरह मुस्तैद रहने को कहा गया है। सेना और अर्धसैनिक बल दोनों ही आपसी तालमेल बढ़ा कर पल-पल की जानकारी व रणनीति बना रहे हैं। वैसे तो अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में सेना को ‘नो वार नो पीस’ यानि ‘न युद्ध के हालात हैं और न ही अमन’ मोड पर रखा गया है। लेकिन यदि चीन टकराव का रास्ता अपना कर भारत पर युद्ध के बादल मंडरा कर बारिश की कोशिश करता है तो भारत ही नहीं समूचे एशिया महाद्वीप में उसे यह दुश्मनी भारी पड़ेगी। आज भारत के पास सैन्य बल, अचूक हथियार, दुनिया के देशों की दोस्ती और अकूत जज्बा है। कोशिश यही हो कि टकराव न हो।

Comments

Most Popular

To Top