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सेना होगी अब और आधुनिक, बढ़ेगी ताकत

भारतीय सेना के आधुनिकीकरण का दौर अब शुरू हो चुका है। बीते दिन में रक्षा मंत्रालय के ऐसे ही फैसलों से भारत की सेना में तेजी से बदलाव आने की उम्मीद है। विश्व की दूसरी बड़ी थल सेना के हाथों में अब 40,000 करोड़ रुपये की लागत से बने छोटे हथियार होंगे। इनमें सात लाख रायफल, करीब 44,000 लाइट मशीन गन और 44,600 कार्बाइन की खरीद शामिल है। जल्द ही इन हथियारों की खरीद पर फैसला लेने वाली रक्षा मंत्रालय की शीर्ष संस्था डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) मुहर लगा देगी। इसी तरह रक्षा मंत्रालय का भारतीय नौसेना में 111 यूटीलिटी हेलिकॉप्टर खरीद का फैसला आधुनिकीकरण की ओर बढ़ने का अहम कदम है। सेना एक और योजना को अंतिम रूप देने में जुटी है जिसमें देश की 2,000 छावनियों को सरकार की स्मार्ट सिटी पहल की तर्ज पर आधुनिक तथा विकसित किया जाएगा।





रक्षा मंत्रालय के ये सारे कदम और फैसले समूची सेना के कुछ खास पहलुओं को आधुनिक व ताकतवर बना कर आगे बढ़ाएंगे, ऐसी उम्मीद स्वाभाविक है। लेकिन सामरिक क्षेत्र में दुनिया के बदलते मौजूदा दौर में भारत के पास चुनौतियां, खतरे, परेशानियों तथा जिम्मेदारियों की एक लंबी फेहरिस्त है। जमीन, आसमान, समंदर में दुश्मनों की खतरनाक निगाहें, घरेलू आतंकवाद का फन और शांति सेना के रूप में उसका कर्तव्यपालन, इन सभी मोर्चों पर सबल-सक्षम बनने के लिए रक्षा मंत्रालय और सेना दोनों को और तेजी से काम करने तथा त्वरित फैसले लेने की जरूरत है।

यह सही है कि अदम्य साहस, प्रबल पराक्रम तथा वीरोचित शौर्य की मिसाल भारतीय सेना जैसी दुनिया की अन्य सेनाओं में जल्दी नहीं मिलती, पर यह एक पहलू है जिसपर मोर्चे संभाले जाते हैं। लेकिन नई टेक्नोलॉजी से बने हथियार और साजोसामान सेना के लिए दूसरी बड़ी जरूरत हैं, जिनकी बदौलत दुश्मन को मुंह तोड़ जवाब दिया जाता है। इसी बात की दरकार आज पूरे सैन्य तंत्र को है। दरअसल दिक्कत यह है कि आधुनिक हथियारों के लिए हमें अभी तक विदेशी कंपनियों का ही मुंह देखना पड़ा। आजादी के बाद से विदेशों से हथियार मंगाते रहने और स्वदेशी विकल्पों के उच्च मानकों पर खरे न उतर पाने से हालात ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम तक नहीं पहुंच सके। यह निश्चित ही चिंताजनक है। इस ओर रक्षा मंत्रालय से जुड़ी शीर्ष एजेंसियों तथा डीआरडीओ को तत्काल ध्यान देने और काम करने की जरूरत है। सेना के आधुनिकीकरण के नाम पर आखिर सक्षम व कुशल भारत कब तक हथियारों व साजो-सामान का आयात करता रहेगा ?

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