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सेना ने मिसाइल से दिया पाक के ‘पागलपन’ को जवाब

पाक को जवाब देते भारतीय जवान

भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा सेक्टर में पाकिस्तान को मिसाइल व तोप का इस्तेमाल कर जिस तरह मुंहतोड़ जवाब दिया है वह इस बात की ओर इंगित करता है कि पड़ोसी देश सीजफायर उल्लंघन की आड़ में आतंकी घुसपैठ की कोशिश न करे। और अगर वह ऐसी हिमाकत करता है तो नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहे। सेना ने एक वीडियो भी जारी किया है जिसमें पाकिस्तानी चौकियों से धुआं उठते हुए देखा जा सकता है। पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर सीमा और नियंत्रण रेखा पर पिछले कुछ सालों से अपनी पागलपन भरी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। उसकी लगातार कोशिश रही है कि वह सरहद पर सीजफायर का उल्लंघन करे और घाटी में आतंकवादियों की घुसपैठ कराए। औसतन वह रोज ही नियंत्रण रेखा और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर 6-7 बार फायरिंग करता है और घुसपैठ की कोशिश करता है। सेना के आंकड़े बताते हैं कि इस साल यानी 2020 की जनवरी माह में ही 367 बार पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर का उल्लंघन किया गया। 2019 में 3,168 बार जबकि 2018 में 1,629 बार सीजफायर का उल्लंघन किया। सीजफायर उल्लंघन के दौरान एक बात और देखने में आई जहां वह पहले छोटे हथियार इस्तेमाल करता था वहीं अब पिछले 06 महीनों से पाकिस्तान की तरफ से आर्टिलरी गन का इस्तेमाल हो रहा है। यह बात भारतीय सेना भलीभांति जानती है। लिहाजा इसी तैयारी के साथ सेना ने उसे करारा जवाब दिया है।





दरअसल भारतीय सेना हर नापाक हरकतों का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार रहती है। इसी परिप्रेक्ष्य में यह भी सही है कि भारत ने अब तक रक्षात्मक नीति अपनाई है। उधर से गोली आती है तो उसका जवाब बखूबी दिया जाता है। जरूरी होने पर सर्जिकल स्ट्राइक जैसे कदम भी उठाए गए। पर ‘अस्थिरता’ का हिमायती पाकिस्तान काफी नुकसान के बाद भी अपनी कारसतानियों से बाज नहीं आ रहा। स्थितियां तो यहां तक बदल गईं हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन ऑल आउट जैसे कारगर कार्रवाई से उपजी बौखलाहट से बीते दिनों में पाक की गोलीबारी तथा आतंकवादियों को घुसपैठ कराने की मानसिकता बढ़ी है। यह पहलू भारतीय सेना के लिए विशेष रूप से गौर करने लायक है।

हालांकि सेना को समय-समय पर नापाक पाक की तरह तरह की खुफिया जानकारी मिलती रहती है। सेना के पास इस बात की भी खुफिया जानकारी है कि फिलहाल गुलाम कश्मीर के बालाकोट में 15-20 आतंकी कैंप हैं जहां आतंकियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। सेना यह भी जानती है कि बालाकोट ट्रेनिंग कैंप फिर से सक्रिय हैं और वहां 35 नए जिहादियों को आतंकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिसमें करीब एक दर्जन कश्मीरी मूल के आतंकी हैं। ऐसे में फिर से गहन चिंतन और पैनी निगाह रखने का काम बखूबी करना होगा। सीमा पर बदले हालात और चुनौतियों के बीच पर क्या ऐसा नहीं हो सकता कि सीधे तौर पर सिर्फ एक बिंदु पर काम हो? उन ठिकानों को फिर से खत्म करने का काम हो जहां आतंकियों की ट्रेनिंग होती है। पूरी दुनिया मान चुकी है कि पाक आतंकियों की पनाहगाह है। लिहाजा उसके साथ आंख में आंख डालकर और तेज प्रहार किया जाए। बातचीत कम हो और एक्शन ज्यादा हो। जैसा कि सेना ने कुपवाड़ा सेक्टर में किया। पाक के खिलाफ लगातार, ताबड़तोड़ तेज प्रहार जैसी कार्रवाइयां उसकी रीढ़ तोड़ने में सक्षम है।

सच्चाई यह है कि  उसके खिलाफ जब-जब एयरस्ट्राइक की गई वह हक्का-पक्का और बिलबिलाया नजर आया। इतिहास बताता है कि 1971 की युद्ध के बाद पाकिस्तान का मनोबल इसलिए जमीन पर था क्योंकि भारत ने पूरे पराक्रम के साथ उसे धूल चटाई थी। इसलिए बदले परिवेश में शीर्ष नेतृत्व तथा सैन्य रणनीतिकारों को काम करने की जरूरत है। आज कश्मीर के भी हालात बदले हुए हैं। भले ही सीमा पार आतंकी ट्रेनिंग दी जा रही हो लेकिन तमाम कमांडर सीमा के इस पार आने को तैयार इललिए नहीं हैं क्योंकि उन्हें पता है घाटी में आते ही सुरक्षाबलों द्वारा वे मौत के घाट उतार दिए जाएंगे।

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