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अमरीका अब ‘सांप’ को दूध नहीं पिलाएगा 

रंजीत-कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

रंजीत कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

अफगानिस्तान सदियों से बड़ी ताकतों के बीच सामरिक खेल का अखाड़ा रहा है। इस खेल में पासा पलटने वाला नवीनतम दांव अमेरिका ने खेला है। इससे पाकिस्तान और चीन तिलमिला गया है। अफगानिस्तान पर अपना दबदबा जमाने के लिये अब तक चीन और पाकिस्तान ने रूस का साथ लेने में कामयाबी पा ली थी और तालिबान को काबुल की सत्ता सौंपने के लिए चाल चलनी शूरु कर दी थी। ऐसा लग रहा था कि अमरीका मैदान छोड़ कर भागना चाह रहा है। इससे भारत चिंतित हो गया था।





अब अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दक्षिण एशिया की नयी नीति घोषित कर तालिबान की पिछलग्गू ताकतों के पांव के नीचे की जमीन खिसका दी है। अमरीका ने बहुत हीं साफ शब्दों में पाकिस्तान और चीन को चेता दिया है कि अफगानिस्तान की मौजूदा जनतांत्रिक सरकार को बचाने के लिये कोई कसर नहीं छोड़़ेगा। अमरीका ने इस संकल्प को निभाने के लिए पहले से मौजूद 8 हजार सैनिकों की संख्या बढ़ाकर 12,000 करने का फैसला किया है और नाटो के अपने दूसरे साथी देशों से भी और सैनिक भेजने को कहा है। औऱ भारत से भी कहा है कि अफगानिस्तान के विकास में अपनी भागीदारी बढाये। भारत ने इसका स्वागत किया है और अब नये जोश के साथ अपनी भूमिका बढाने  को त्तैयार है। भारत ने अबतक वहां दो अरब डॉलर से अधिक का निवेश विकास औऱ पुनर्निर्माण कार्यो  में किया है। इसके अलावा एक अरब डॉलर और निवेश करने को तैयार है।
अफगानिस्तान में शांति और विकास का माहौल तभी बन सकता है। जब वहां आतंकवादी ताकतों को काबू में किया जा सके। इसके लिए अमरीका ने पाकिस्तान को लतड़ा  है कि अपनी धरती को आतंकवादी पनाह नहीं बनन दे। हिलेरी क्लिंटन ने अपने बिदेश मंत्री कार्यकाल में ही आगाह किया था कि पाकिस्तान को आर्थिक मदद देना वैसा ही है। जैसा कि घर के पिछवाड़े  में सांप को पालना। ट्रम्प के ताजा बयान से लगता है कि उन्होंने इस सांप को दूध पिलाना बंद करने का फैसला किया है। कितनी विडंबना है कि अमरीकियों को अब तक यह डर सता रहा था कि सांप को दूध पिलाना बंद किया तो वह उन्हें डस लेगा। लेकिन अब ट्रम्प ने फन दिखाते सांप को ही डरा दिया है। इससे भारत को भारी राहत मिली है कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ भी आतंकवादी हरकतें करवाने से हिचकेगा। भारत को यही उम्मीद है कि अमरीका अपनी नई दक्षिण एशिया नीति पर अडिग रहेगा।
 अमरीकी राष्ट्रपति यदि अपनी नीति को सख्ती से लागू करते हैं तो पाकिस्तान में आतंकवादी शिविरों, प्रशिक्षण अड्डों आदि को अपने ड्रोन से निशाना बनाना होगा। पाकिस्तान को अब इसी का डर सता रहा है। भले ही पाकिस्तान के सिर पर चीन का हाथ हो पाकिस्तान आज भी अमरीकी सैन्य मदद पर भारी निर्भर है। उसके एफ-16 लड़ाकू विमानो की देखरेख अमरीकियों द्वारा ही की जाती है। न केवल अमरीका बल्कि अमरीकी नीतियों की वजह से उसके यूरोपीय साथी देश भी पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने लगेंगे। ट्रम्प की यह नीति अमरीका में 9-11 के आतंकवादी हमलों की याद दिलाती है जब तब के अमरीकी उप-विदेश मंत्री रिचर्ड आर्मीटाज ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ को खरी खोटी सुनाते हुए कहा था कि यदि नहीं सुधरे तो अमरीका पाकिस्तान को पाषाण युग में भेज देगा।

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