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‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ पिता की हत्या के 9 साल बाद…

नई दिल्ली। कहते हैं यदि कुछ ठान लेने की जिद सिर पर सवार हो तो मंजिल भी कदमों में आ पहुंचती है। ऐसा ही एक उदहारण हैं आइपीएस रोहित राजबीर सिंह, जिनकी कहानी किसी फिल्म से कम नहीं। उन्होंने जिन्दगी में ढेरों उतार-चढ़ाव देखे लेकिन उनकी जिदें और भी पक्की होती गईं और एक दिन उन्होंने वह कर दिखाया जिसके लिए उन्होंने सपने देखे थे।





उनके पिता दिल्ली पुलिस के ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ एसीपी राजबीर सिंह देश के 8 सबसे चर्चित ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ में से एक थे। एक दिन अपराधियों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। राजबीर की मौत दिल्ली पुलिस के लिए जबर्दस्त झटका था। एसीपी राजबीर सिंह ने बेहद कम वक्त में शोहरत की बुलंदियों को हासिल किया। वह भर्ती तो सब इंस्पेक्टर के पद पर हुए, लेकिन अपनी जाबांजी के दम पर महज 13 साल में प्रमोट होकर एसीपी बन गए। एक के बाद एक 50 से अधिक एनकाउंटर किये। एसीपी पद के जिस मोड़ पर राजबीर सिंह अचानक अलविदा कह गए, उनकी मौत के ठीक नौ साल बाद उनके बेटे आईपीएस रोहित राजबीर सिंह ने उसी जगह दिल्ली पुलिस से एसीपी के तौर पर कमान संभाली है। आईपीएस रोहित पिता से जुड़ी यादें और मुश्किलों से जूझते हुए कैसे तय किया आईपीएस  बनने तक का सफ़र ये हर पिता के सिर को गर्व से ऊंचा कर देगा।

कभी ख़त्म नहीं हुआ पिता का इंतजार

 

16 साल के रोहित राजबीर सिंह 24 मार्च 2008 की रात भी अपने पिता और दिल्ली पुलिस के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसीपी राजबीर सिंह का इंतजार कर रहे थे क्योंकि कई बार उनके पिता ड्यूटी से लेट हो जाते थे। लेकिन उस दिन का इंतजार कभी ख़त्म ही नहीं हुआ। रात के करीब 11 बजे दिल्ली पुलिस के कुछ सिपाही घर पहुंचे और उन्होंने बताया कि उनके पिता को गोली लगी है। पूरा परिवार अस्पताल पहुंचा तो पता चला कि उनके पिता नहीं रहे। इस हादसे के बाद तो जैसे रोहित का संसार ही उजड़ गया था। उसके घर में दादा-दादी, मम्मी और बहन थी यदि ऐसे में वह कमजोर पड़ता तो उन सब का कौन ख्याल रखता लिहाजा रोहित ने धैर्य से काम लिया और खुद को मजबूत बनाया।

पूरा किया पिता का सपना

रोहित के पिता की इच्छा थी कि उनका बेटा आईपीएस बने लेकिन पिता के जाने के बाद वह अकेले हो गए लेकिन हिम्मत नहीं हारी और जुट गए अपने पिता के सपने को पूरा करने में। डीपीएस में पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी से 2013 में मकैनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की लेकिन नौकरी न करने का फैसला लिया और आइपीएस की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने 2015 में यूपीएससी की परीक्षा पास की और उनके घर में फिर से खुशियों की की लहर दौड़ पड़ी।

मेहनत और किस्मत ने दिया साथ

ACP रोहित राजबीर सिंह बताते हैं कि उनके जीवन में बहुत से इत्तेफाक हुए लेकिन मेहनत के साथ साथ किस्मत ने भी बराबर उनका साथ दिया। पहली ही बार में सिविल सर्विस की परीक्षा पास की और मनमाफिक कैडर भी मिला। उसके बाद उसी जगह पोस्टिंग मिलना, जिस डिपार्टमेंट में पापा थे। ये सब ऐसे इत्तेफाक थे जो मुझे एक ही दिशा में ले जा रहे थे। रोहित राजबीर सिंह को पिछले माह पांच सितम्बर को ही दिल्ली के पटेल नगर में एसीपी बनाया गया है।

क्राइम अंगेस्ट विमन पर रहेगा फोकस

पहली बार आईपीएस की वर्दी पहने पर रोहित कहते हैं कि उनके पिता उन्हें इस रूप में देखते तो उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता। अपनी पहली तैनाती के बारे में वह बताते हैं कि ‘मेरा पहला और आखिरी आदर्श ‘डिवोशन टू ड्यूटी’ ही रहेगा महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर मेरा फोकस रहेगा।उसके बाद स्ट्रीट क्राइम को रोकना है मेरी दिलचस्पी खतरनाक अपराधों की जांच में रहती है  अपनी ट्रेनिंग के दौरान रोहित राजबीर सिंह ने एक मर्डर मिस्ट्री और दो हत्या की कोशिश के मामले को भी सुलझाया था।

मां को रहती है फिक्र

पति को खोने के बाद रोहित की मान को उनकी और भी ज्यादा फ़िक्र रहती है उनकी मां, बहन और दादा हरियाणा के गुरुग्राम में रहते हैं। रोहित के अनुसार वह अभी शादी के बारे में नहीं सोच रहे हैं अभी उनका सिर्फ एक ही मकसद है कि अपनी जिम्मेदारियों को ईनामदारीपूर्वक निभाऊं।

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