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उत्तराखंड के 17वें स्थापना दिवस पर पहली बार महिला IPS ने की परेड की अगुवाई

उत्तर प्रदेश से अलग होकर नए राज्य के रूप में गठित हुए उत्तराखंड की स्थापना के 17 साल पूरे हो गए हैं। गुरुवार 9 नवंबर को देवभूमि उत्तराखंड ने अपनी 17वीं वर्षगांठ मनाई। इस मौके पर प्रदेश में तमाम कार्यक्रम व परेड का  आयोजन किया गया। पहली बार  महिला आईपीएस अधिकारी ने परेड का नेतृत्व कर प्रदेश में एक नया इतिहास रच दिया।





पुलिस अधिकारियों को मिला सम्मान

राज्य के 17वें स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और राज्यपाल केके पॉल ने उत्तराखण्ड पुलिस के सराहनीय कार्य करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया। चार आधिकारियों को राष्ट्रपति पदक और 20 को पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। पुलिस अधिकारियों को सम्मानित करने के बाद राज्यपाल ने कहा कि  सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ राज्य के विकास के लिए संकल्पबद्ध है।प्राकृतिक आपदाओं को झेलने के बावजूद उत्तराखंड तरक्की के मार्ग पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन के शहीदों के बलिदान को बेकार जाने नहीं दिया जाएगा।

पहली बार महिला आईपीएस ने किया परेड का नेतृत्व

इस मौके पर गुरुवार को उत्तराखंड के पुलिस लाइन ग्राउंड में महिला आईपीएस अधिकारी ने परेड का नेतृत्व कर प्रदेश में एक नया इतिहास रच दिया। देहरादून की एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने पुलिस लाइन ग्राउंड में परेड का नेतृत्व किया।

2007 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं निवेदिता

उत्तराखंड कैडर की 2007 बैच के आईपीएस अधिकारी निवेदिता कुकरेती वर्तमान में देहरादून की एसएसपी हैं। परेड का नेतृत्व करने वाली निवेदिता कुकरेती के अनुसार, ‘यह मेरे लिये गर्व की बात है, हर अधिकारी को परेड की कमान करने का मौका मिलना एक गर्व का क्षण होता है और ये ‘राईजिंग डे परेड’ का नेतृत्व करने का मेरा पहला मौका है। उन्होंने कहा कि, परेड की सेवा एक अनुशासन का प्रतीक है और इससे यह संकेत मिलता है कि हम एक व्यक्ति की कमान के तहत आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।

पहली बार दिखा महिला पाइप बैंड का जलवा

उत्तराखंड पुलिस परेड ग्राउंड में महिला पाइप बैंड का जलवा भी पहली बार दिखा इस बैंड ने मधुर धुनें बजायीं अलग राज्य बनने के बाद 17 साल में पहली बार इस बैंड ने सार्वजनिक पेशकश दी 31 पीएसी बटालियन के इस बैंड की कमान मेजर भगवती मेहता ने संभाली। सैकेंड मेजर के तौर पर अनिता बिष्ट ने कमांड किया। इस टीम में 21 महिला जवान हैं। इनमें से 2 मेजर, 7 ड्रमर और 12 मशकबीन हैं 2015 में गुजरात में हुए आईपीएस मीट के दौरान महिला बैंड बनाने का आइडिया आया था।

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