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‘जिन्दगी के साथ भी जिन्दगी के बाद भी’ BSF के जवान आएंगे दूसरों के काम

नई दिल्ली। भारतीय जवान जीते जी तो देश की रक्षा करते ही हैं। अब वे मरने के बाद भी देश के काम आना चाहते हैं। जी हां, हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान  भारतीय अर्धसैनिक बल (बीएसएफ) के जवानों ने अंगदान के प्रति अपना जज्बा दिखाया है। इंसानियत की मिसाल कायम करने जा रहे भारतीय अर्धसैनिक बल बॉर्डर सिक्युरिटी फोर्स के 70 हजार  जवानों ने अंगदान का प्रण लिया है।





8वें ‘भारतीय अंगदान दिवस’ के मौके पर नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (नोटो) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इस उल्लेखनीय योगदान के लिए बीएसएफ के महानिदेशक के के शर्मा को सम्मानित किया।

मानवसेवा का अंगदान से बेहतर नहीं कोई और तरीका

BSF ने अपने जवानों और अधिकारियों को इस बात के लिए प्रेरित कर एक अलग रिकॉर्ड कायम कर दिया है। यह जवान मुख्य रूप से पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमा पर देश की हिफाहज करते हैं। बीएसएफ के महानिदेशक केके शर्मा ने बताया कि बल में इसके लिए पिछले लंबे समय से लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। यहां तक कि रिटायर्ड कर्मियों के कल्याण के लिए चलने वाले कार्यक्रमों में भी यह संदेश दिया जा रहा है। अंगदान का प्रण लेने वालों में सेवारत जवान ही नहीं बल्कि रिटायर्ड कर्मियों का जज्बा भी काबिले तारीफ है। जवानों का मानना है कि मानयता की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है और इसके लिए अंगदान से बेहतर और कोई तरीका नहीं हो सकता।

देशभर में अंगदान करने वालों की संख्या बहुत कम

बता दें कि अंगदान कर दूसरों को जीवन देने वाले लोगों की संख्या पूरे देश में एक प्रतिशत भी नहीं है। कई लोगों की मौत सिर्फ इस कारण हो जाती है कि उन्हें समय पर अंग नहीं मिल पाता है। बीएसएफ की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस मुहिम में आगे आएं ताकि अंगदान के अभाव में होने वाली मौतों में कमी आए।

मरने के बाद ऐसे काम आते हैं शारीरिक अंग

अगर कोई व्यक्ति अंगदान की शपथ लेता है तो ब्रेन डेड हो जाने के बाद उसके परिवार की लिखित सहमति के बाद उसके शरीर के अंगों का इस्तेमाल जरूरतमंद के लिए किया जा सकता है। ब्रेन डेड एक ऐसी अवस्था है जब व्यक्ति का मष्तिष्क मृत हो चुका हो लेकिन उसके शरीर के अंग अगले कुछ घंटों के लिए काम कर रहे हों ऐसे में उन्हें उसके शरीर से किसी के शरीर में प्रत्यारोपित किया जा सकता है। ब्रेन डेड व्यक्ति के किडनी, लीवर, हार्ट, हड्डी कोर्निया आदि कई अंगों को इस्तेमाल किया जा सकता है।  आंकड़ों पर नजर डालें, तो देश में तकरीबन 1,75,000 किडनी ट्रांसप्लांट तथा 50 हजार मरीजों को लीवर ट्रांसप्लांट की जरुरत होती है।

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