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जवानों को आत्महत्या से बचाएंगे BSF और लंदन का रिसर्च ग्रुप

बीएसएफ-जवान

नई दिल्ली। सुरक्षा बलों में तैनात जवानों में आत्महत्या के बढ़ते मामले बड़ी परेशानी की वजह बन रहे हैं। बात सिर्फ सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की करें तो वर्ष 2014 में इसके 46 जवानों ने आत्महत्या की थी। वर्ष 2015 में 27 और वर्ष 2016 में 25 जवानों ने हताश होकर मौत को मुंह गले लगा लिया था। इस वर्ष अब तक सीमा सुरक्षा बल के 34 जवानों ने किन्हीं न किन्हीं कारणों से अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। कुछ ऐसे ही आंकड़े अन्य सुरक्षा बलों के भी मिल सकते हैं। इसमें दो राय नहीं कि बढ़ते तनाव और अवसाद की वजह से जवानों द्वारा खुद की जान लेने के सिलसिले ने पिछले कुछ वर्षों में गति पकड़ी है।





जवान आत्महत्या के रास्ते पर आगे न बढ़ें इसके लिए बीएसएफ ने कई कदम उठाए हैं। अब उसी रास्ते पर आगे बढ़ते हुए बीएसएफ बुधवार (15 नवंबर) को दिल्ली में लंदन के रिसर्च ग्रुप इंटरनेशनल हेल्थ यूनिवर्सिटी चेस्टर की एक टीम के साथ बैठक में न सिर्फ आत्महत्या करने के कारणों की वजह तलाशेंगे बल्कि इनका निदान भी ढूंढेंगे। एक वेबसाइट के मुताबिक केन्द्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर हो रही इस बैठक में बीएसएफ के अधिकारी लंदन के रिसर्च ग्रुप की टीम के साथ उन बिंदुओं पर चर्चा करेंगे जो जवानों में आत्महत्या की प्रवृत्ति रोकने में मददगार बन सकते हैं।

वैसे जवानों अवसाद से बचाने के लिए सीमा सुरक्षा बल पहले ही कई कार्यक्रम शुरू कर चुका है। इन कार्यक्रमों में वेलनेस क्वोशंट और मेंटर मेंटी सिस्टम प्रमुख है। इन कार्यक्रमों के तहत सीमा सुरक्षा बल प्रश्नावली के जरिए तनावग्रस्त जवानों की पहचान कर उनकी काउंसलिंग करता है।

 

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