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स्पेशल रिपोर्ट: चीन पणछन लामा का पता बताए- अमेरिका

ऱाष्ट्रपति ट्रंप
फाइल फोटो

नई दिल्ली। अमेरिका ने चीन के साथ कोरोना महामारी को लेकर चल रहे वाकयुद्ध के बीच तिब्बत का मसला उठा कर चीन को भड़काया है। अमेरिका ने एक बयान जारी कर चीन को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि वह तिब्बत के धार्मिक नेता पणछन  लामा का अता-पता बताए।





पणछन लामा  तिब्बत के सबसे बडे धार्मिक नेता दलाई लामा के बाद तिब्बत में दूसरे महत्वपूर्ण धार्मिक नेता हैं जिनके बारे मे कहा जाता है कि छह साल की उम्र में जब उन्हें पणछन लामा घोषित किया गया था तब चीन सरकार ने उन्हें अगवा कर तिब्बती लोगों से छिपा कर रखा हुआ है।

अमेरिकी  विदेश विभाग ने अपने ताजा बयान में कहा है कि वह  विशेष रूप से चीन में धार्मिक स्वतंत्रता को प्रोत्साहन और संरक्षण देने को प्राथमिकता देता  है, जहां सभी धर्मों के लोगों को गंभीर दमन और भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता के मुताबिक  25 वर्ष पहले 11वें पणछन  लामा गेधुन चोयक्यी न्यीमा के लापता होने की घटना को  उन्होंने याद किया, जो 1995 में चीन सरकार द्वारा छह साल की उम्र में अगवा किए जाने के बाद से सार्वजनिक तौर पर नहीं दिखे हैं।

प्रवक्ता के मुताबिक पणछन  लामा तिब्बती बौद्ध धर्म के सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्यक्तियों में से एक हैं, जिनका आध्यात्मिक दर्जा दलाई लामा के बाद दूसरा है। लेकिन चीन द्वारा पणछन  लामा का उत्पीड़न असामान्य बात नहीं है। अमेरिका तिब्बतियों की धार्मिक, भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को समाप्त करने के लिए चीन द्वारा चलाए जा रहे अभियान पर बहुत चिंतित है, जिसमें लारुंग गार और यचेन गार बौद्ध संस्थानों जैसे उपासना और शिक्षा के स्थलों का निरंतर विनाश किया जाना शामिल है।

सभी धार्मिक समुदायों के सदस्यों की तरह तिब्बती बौद्धों को भी अपनी परंपराओं के अनुसार और सरकारी हस्तक्षेप के बिना अपने धार्मिक नेताओं के चयन, शिक्षा और वंदना का अधिकार होना चाहिए। प्रवक्ता ने कहा कि वह  चीन सरकार से तुरंत पणछन  लामा का अता-पता बताने तथा सभी व्यक्तियों की धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए अपने स्वयं के संविधान और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का पालन करने की मांग करते हैं।

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