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स्पेशल रिपोर्ट: चीन ने तेवर नरम किए- कहा हम दोस्त हैं दुश्मन नहीं

चीनी राजदूत सुन वेई तुंग
फाइल फोटो

नई दिल्ली। गत 05 मई से भारत-चीन के पूर्वी लद्दाख के सीमांत इलाकों में भारतीय सेना के साथ तनातनी करने के बाद चीन ने भारत के क़डे रुख को देखते हुए अपने तेवर नरम कर लिये हैं और अब वह कह रहा है कि हम दो हजार सालों से दोस्त रहे हैं। हम पड़ोसी हैं और आपस में दुश्मन नहीं।





यहां चीन के राजदूत सुन वेई तुंग ने एक विशेष वीडियो संदेश में कहा है कि गत पांच जुलाई को दोनों देशों के सीमा मसलों पर विशेष प्रतिनिधियों के बीच हुइ वार्ता में जो सहमति बनी है उसे लागू किया जाएगा। गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख के जिन इलाकों में भारत और चीनी सेनाएं गत पांच मई से आमने सामने तैनात हो गई थीं और इस वजह से गत 15 जून को गलवान घाटी में खूनी झडप भी हुई थी वहां से अब चीनी सेनाएं पीछे हटने लगी हैं। चीनी सेना गलवान घाटी के अलावा हाट स्प्रिंग, गोगरा आदि इलाकों से भी पीछे हटने लगी है। पैंगोंग झीलके जिस इलाके को लेकर यह शंका थी कि चीन वहां से नहीं हटेगा वहां से भी चीनी सैनिकों द्वारा अपने साज सामान पीछे करने की प्रकिया शुरु करने की रिपोर्टें हैं।

यहां चीनी राजदूत ने कहा कि भारत और चीन के बीच दो हजार साल का दोस्ताना आदान प्रदान का इतिहास रहा है। इसमें से अधिकांश वक्त में दोस्ताना सहयोग का ही दौर रहा है। चीनी राजदूत ने कहा है कि सहयोग से दोनों को फायदा होता है और तनाव से किसी को लाभ नहीं होता। दो बडे पडोसी देश होने के नाते यह स्वाभाविक है कि हमारे बीच कुछ मतभेद हों लेकिन इनके प्रबंध के लिये हम वार्ता करते रहे हैं. हमें हमेशा इस बात को ध्यान में रखना होगा कि समग्रता में दिवपक्षीय रिश्तों को देखें और मतभेदों को अपनी जगह पर रहने दें और देखें कि मतभेदों की वजह से आपसी रिश्तों पर असर पडे।

राजदूत ने कहा कि चीन और भारत के बीच सीमा का सवाल इतिहास की देन है जो संवेदनशील और जटिल है। हमें इसका एक न्योयोचित और समुचित समाधान निकालना होगा जो परस्पर मान्य हो। इस मसले का अंतिम समाधान निकलने तक हमें सीमांत इलाकों में शांति व स्थिरता को बनाए रखना होगा।

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